पीएफ ब्याज कम होने पर टकराव

भार्गव बोले- कांग्रेस सरकार कर्मचारियों के खिलाफ, सरकार का दावा- केंद्र ने ही किया ब्याज कम...

भोपाल@जितेंद्र चौरसिया की रिपोर्ट

भविष्य निधि (पीएफ) पर ब्याज कम होने को लेकर कांग्रेस सरकार और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं। गुरुवार को नेता-प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा। भार्गव ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हमेशा से ही कर्मचारियों का अहित किया है।

भाजपा सरकार के समय कर्मचारियों को पीएफ पर 8.75 प्रतिशत ब्याज मिलता था, लेकिन कमलनाथ सरकार ने इसे घटा दिया। वहीं कांग्रेस सरकार ने इसे भाजपा की कमअक्ली बताया है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि पीएफ पर ब्याज केंद्र सरकार ने ही कम किया है। राज्य स्तर पर यह ब्याज कम नहीं किया गया।


भार्गव के ये आरोप-

प्रदेश की कमलनाथ सरकार का निर्णय कर्मचारी विरोधी है। कांग्रेस ने हमेशा से ही कर्मचारियों के अहित ही किए हैं। भारतीय जनता पार्टी की सरकार के समय कर्मचारियों को भविष्य निधि पर 8.75 प्रतिशत ब्याज मिलता था, लेकिन कमलनाथ सरकार ने इसको घटाकर कम कर दिया है। प्रदेश सरकार को यह फैसला वापस लेना चाहिए। इससे प्रदेश के निम्न आय वर्ग के 10 लाख से अधिक कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। सरकार एक तरफ फिजूलखर्ची करके नाचने-गाने वालों पर करोड़ों रुपए फूंकने जा रही है, लेकिन अपने ही कर्मचारियों के साथ नाइंसाफी कर रही है।

इधर, सरकार का पक्ष-
जीपीएफ पर ब्याज केन्द्र सरकार ही तय कर रखी है। राज्य ने उसे केन्द्र से लिंकअप कर रखा है।

- अनुराग जैन, एसीएस, वित्त विभाग, मप्र

ये है मामला-
जीपीएफ पर ब्याज दर 8.75 प्रतिशत से घटाकर 7.9 प्रतिशत कर दिया गया है। यह ब्याज दर जुलाई 2019 से मार्च 2020 तक मिलेगी। इससे कर्मचारी-अधिकारियों को प्रतिवर्ष ढाई हजार से 25 हजार रुपए तक का नुकसान होगा। कर्मचारियों ने इसका तगड़ा विरोध किया है। इसके बाद इस पर सियासत गर्मा गई है।

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दीपेश तिवारी
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