पकौड़ा पॉलिटिक्स : सड़क पर आमने-सामने आए कांग्रेस-बीजेपी, पुलिस से हुई झूमाझटकी

चाय और पकौड़े वाले ठेले लेकर बोर्ड ऑफिस चौराहे पहुंची कांग्रेस

By: योगेंद्र Sen

Published: 10 Feb 2018, 01:00 PM IST

भोपाल। देशभर में पकौड़े पर चल रही राजनीति अब मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी शुरू हो गया है। कांग्रेसियों ने शनिवार को प्रदर्शन करने के लिए भाजपा के बैनर तले चाय और पकौड़े वाले ठेले लेकर बोर्ड ऑफिस चौराहे पहुंची। बोर्ड ऑफिस चौराहे से लेकर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय तक रैली निकालकर कांग्रेसियों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेसियों ने जमकर भाजपा सरकार के खिलाफ नारे बाजी भी की। इधर, कांग्रेसियों ने पीसीसी कार्यालय के बाहर पकौड़े स्टॉल लगाए।

कांग्रेसियों का कहना है कि अगर भाजपा वाले प्रदर्शन करने आए तो उन्हें पकौड़े खिलाएंगे। उधर, लंबे समय के बाद सड़क पर उतरे भाजपा के कार्यकर्ताओं ने भी हाथ ठेला लेकर पीसीसी कार्यालय पहुंचे। भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीसीसी कार्यालय पहुंचने के पहले ही बैरिकेट्स लगाकर रोक लिया। जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झूमाझटकी हुई।

इसके पहले भी पकौड़ा प्रदर्शन में बुधवार को प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष कुणाल चौधरी ने भाजपा सरकार के बेरोजगारी नीति का जमकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान युवा कांग्रेस अध्यक्ष कुणाल ने पकौड़ा बेचकर भाजपा सरकार की उपलब्धियों और देश को गुमराह करने के खिलाफ नारेबाजी की। बतादें कि हाल ही में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राज्यसभा में अपना पहला भाषण दिया। जहां उन्होंने भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए भाजपा की तारीफ की थी।

इस वजह से शुरू हुआ पकौड़े पर विवाद

देश में बेरोजगारी मुद्दे पर अमित शाह ने कहा था कि "बेरोजगारी से अच्छा है कि पकौड़े बेचना, परिश्रम से पैसे कमाना" जिसके बाद से प्रदेश भर में कांग्रेसियों ने पकौड़ा सेंटर खोलकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पीसीसी करेला विधानसभा में युवा कांग्रेस अध्यक्ष कुणाल ने बैनर लगाए, जिसमें लिखा है आप सभी को पकौड़ा बजट की शुभकामनाएं..। मौके पर उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गले में, मैं हूं प्रोफेसनल डिजानर, डॉक्टर और इंजीनियार लिखा हुआ माला पहन कर भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

MP विधानसभा चुनाव पर सियासत
चुनावी साल 2018 में कांग्रेस हर हाल में सत्ता में वापसी की कोशिश में है। इसके लिए चाहे राष्ट्रीय स्तर का फोकस हो या फिर प्रदेश स्तर पर पार्टी के नए नए प्रयोग, हर तरह से कांग्रेस के मन में एक ही बात है कि मध्यप्रदेश की सत्ता अब उसके हाथ में हो। शायद यही वजह है कि कांग्रेस लगातार भाजपा के बेरोजगारी नीति पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सत्ता के किनारे तक पहुंचने के लिए चुनाव की इस नदी में कांग्रेस सहयोगी दलों की नाव का सहारा ले सकती है।

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योगेंद्र Sen Reporting
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