scriptCongress called the process of Panchayat elections unconstitutional | पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया कांग्रेस ने, फिर भी चुनाव से पीछे नहीं हटेगी पार्टी | Patrika News

पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया कांग्रेस ने, फिर भी चुनाव से पीछे नहीं हटेगी पार्टी

आरक्षण में रोटेशन ना होने से महिलाओं को चुनाव लडऩे का मौका नहीं मिलेगा

भोपाल

Published: December 07, 2021 11:43:40 am

भोपाल। मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर जारी अधिसूचना को कांग्रेस ने नियम विरुद्ध बताया। कांग्रेस विधायक एवं पूर्व कमलेश्वर पटेल ने सोमवार को मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि संविधान और पंचायत राज की भावना को अनदेखा करते हुए तानाशाही तरीका अपनाया गया है। शिवराज सरकार पंचायत चुनाव को दलीय चुनाव में बदलना चाहती है। परिसीमन को तानाशाही तरीके से रद्द करने का कोई कारण नहीं बताया गया। पटेल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस चुनाव से पीछे नहीं हटेगी। यह भी तय है कि कांग्रेस इस मामले में कोर्ट नहीं जाएगी यदि कुछ पीडि़त पक्ष अदालत में चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देते हैं तो कांग्रेस उनकी आवश्यक मदद करेगी। पत्रकार वार्ता को पूर्व मंत्री एवं विधायक पीसी शर्मा एवं जेपी धनोपिया ने भी संबोधित किया।
पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया कांग्रेस ने, फिर भी चुनाव से पीछे नहीं हटेगी पार्टी
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पूर्व मंत्री पटेल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243 डी में त्रिस्तरीय पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसी तरह 243 (टी) नगर पालिकाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान किया गया है। फिर भी भाजपा सरकार ने पंचायतों का परिसीमन पिछले 15 वर्षों में कभी कराया ही नहीं।
पटेल ने कहा कि 2014 के निर्वाचन की स्थिति में जिस पंचायत अध्यक्ष के पद पर पुरुष का आरक्षण था, वह 2021 निर्वाचन में महिला का आरक्षण किया जाना था किंतु अध्यादेश के आने के पश्चात वह पद पुन: पुरुष के लिए आरक्षित हो जाने से मध्य प्रदेश शासन के महिलाओं के सशक्तिकरण संबंधी खोखले दावों की पुष्टि करता है। पूर्व मंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243 सी एवं डी के तहत पंचायतों में दो तथ्य आवश्यक हैं। पहला परिसीमन और दूसरा रोटेशन में प्रति 5 वर्ष में पंचायतों में आरक्षण कराकर चुनाव कराएं। उन्होंने पूछा कि क्या मध्य प्रदेश सरकार किसी अध्यादेश के जरिए भारतीय संविधान को बदल सकती है। एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि जब पेसा अधिनियम लागू कर दिया गया है तो अनुसूचित क्षेत्रों में क्या स्थिति होगी यह किसी को मालूम नहीं है।

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