Loksabha 2019 Election Result : सर चढ़कर बोला मोदी का जादू, सिंधिया से लेकर दिग्विजय तक हारे अपनी सीट, ये हैं खास कारण...

Loksabha 2019 Election Result : सर चढ़कर बोला मोदी का जादू, सिंधिया से लेकर दिग्विजय तक हारे अपनी सीट, ये हैं खास कारण...

Deepesh Tiwari | Publish: May, 24 2019 12:08:10 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

जिस किले को 2014 हिला तक नहीं सकी थी मोदी लहर, वो 2019 के चुनाव में ढ़ह गया...

भोपाल@अरुण तिवारी की रिपोर्ट...
लोकसभा 2019 चुनावों के रिजल्ट को लेकर मध्यप्रदेश सहित पूरे देश से ही कांग्रेस के लिए अच्छी खबर नहीं आई। यहां तक की इस चुनाव में कांग्रेस वो सीट तक हार गई, जिसे 2014 की मोदी लहर तक नहीं हिला पाई थी।


जी हां, इस बार चुनाव में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सबसे खास सीटों छिंदवाड़ा और गुना में से एक सीट तक हार गई। यानि गुना वो सीट जिससे सिंधिया के हारने के बारे में लोग कल्पना तक नहीं करते थे, इस बार गुना में ही सिंधिया तक को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस मध्यप्रदेश की पूरी 29 सीटों में से अपनी केवल एक खास सीट छिंदवाड़ा को बचा सकी।

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2018 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद उत्साह में आई कांग्रेस का राज्‍य में हुए लोकसभा चुनाव (Election 2019 Result) में तकरीबन सफाया सा हो गया है। यहां प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 28 पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। सबसे खास बात ये है कि यह स्थिति तब सामने आई है जब दिसंबर 2018 में ही हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 114 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।


MP में लोकसभा चुनाव (2019 Election Result) के रिजल्ट के साथ ही जहां एक ओर कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया है वहीं प्रदेश में कमल एक बार फिर खुलकर खिला है।

इससे पहले 2018 के विधानसभा चुनावों में 15 सालों से सत्ता पर काबिज शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्‍व वाली बीजेपी सरकार को सत्‍ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा था।

जानकारों की मानें तो कांग्रेस (Congress) यदि विधानसभा चुनाव में किए गए अपने प्रदर्शन को दोहराती तो करीब आधी या इससे कुछ अधिक सीटों पर कब्‍जा कर लेती, लेकिन मोदी के जादू ने राज्‍य के सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) के चेहरे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं।

यहां तक की अपेक्षा के उल्ट बीजेपी 2014 के लोकसभा चुनाव (Madhya Pradesh Lok Sabha elections result 2019) से भी बेहतर प्रदर्शन करती नजर आई। वह राज्‍य की 28 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और कांग्रेस ने केवल सीएम कमलनाथ के गृहनगर छिंदवाड़ा में जीत दर्ज की हैं।

इससे पहले मोदी लहर के दौरान भी 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 27 सीटों पर ही कब्‍जा जमा पाई थी और कांग्रेस दो सीटें की अपने नाम कर पाई थी। लेकिन इस बार तो भाजपा ने 28 सीट जीतकर 2014 से बढ़त पा ली।

राजनीति के जानकार डीके शर्मा केे अनुसार पिछली यानि 2014 की मोदी लहर के बाद इस 2019 के चुनावों में कुछ महत्वपूर्ण बातें चुनाव को प्रभावित करती दिखीं। भले ही इनकी ओर कम ध्यान दिया गया, लेकिन ये अंदर ही अंदर काम करती गईं, जिसका रिजल्ट अब सामने है। कुल मिलाकर ऐसे 6 कारण हैं जिन्होंने कांग्रेस की मजबूती को कमजोर किया...

कारण 01 : शर्मा के अनुसार 2019 के चुनाव में आखिर ऐसी क्‍या बात रही कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी (BJP)को धूल चटाने वाली कांग्रेस के पांच महीने बाद ही अपना खाता खोलने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

उनके अनुसार इसके पीछे बड़ा कारण 'मोदी' का नाम ही है। तभी तो पूरे देश की तरह मध्‍यप्रदेश (MP Election Result 2019) के लोगों ने भी 'नमो अगेन' का नारा दोहराया गया।


उनका ये भी मानना है कि इस बार भी नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)की वोटरों के दिल में विश्‍वसनीयता कायम रही और ऐसे में ही ये स्थिति बंपर जीत के रूप में तबदील हुई।

कारण 02: कांग्रेस के प्रयोग महंगे सबित हुए...
शर्मा के अनुसार लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस की ओर से किए गए प्रयोग भी काफी हद तक कांग्रेस की हार का कारण माने जा सकते है। इसमें जहां तक सूचना सामने आ रही थी कि सिंधिया ग्वालियर से लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें गुना से उतारा गया।

वहीं दिग्विजय को कठिन सीट के नाम पर भोपाल से उतारना और अजय सिंह के द्वारा सतना सीट से चुनाव लड़ने की चाहत के बावजूद उन्हें सीधी से लड़ाने का कांग्रेसी प्रयोग कहीं न कहीं कांग्रेस को नुकसान पहुंचाता दिखा।

 

कारण 03 : बिजली का गुल होना फिर शुरू...
बिजली के मामले में बीजेपी सरकार के समय में अच्‍छी स्थिति रही. गांवों और तहसील क्षेत्रों में भी पावरकट नहीं के बराबर था लेकिन कांग्रेस की सरकार आते ही पावर कट का दौर शुरू हो गयाA बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया।

पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj singh chouhan)ने अपनी सभाओं में कहा, लालटेन का फिर से इंतजाम कर लीजिए, कांग्रेस की सरकार आ गई है और बिजली कटौती शुरू हो गई है।

दिग्विजय सिंह जब राज्‍य के सीएम थे तब गांवों में ही नहीं शहरों में भी पावरकट आम बात थी. राज्य की कांग्रेस सरकार ने इसके लिए केंद्र की बीजेपी सरकार पर दोष मढ़ा लेकिन यह बात भी लोगों के गले नहीं उतरे।

कारण 04: अधूरा कर्ज माफी का वादा !...
कांग्रेस पार्टी ने 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में कहा था कि जीत हासिल करने के बाद वह 10 दिन के भीतर किसानों के दो लाख के भीतर के कर्ज (Loan waiver)माफ कर देंगे।

लोगों ने इस वादे पर ऐतबार करते हुए कांग्रेस को सत्‍ता में ला दिया, लेकिन कुछ ऐसा हुआ वह पूरी तरह से वादे पर अमल नहीं कर पाई। कांग्रेस सरकार में इस बारे में 10 दिन के अंदर आदेश तो जारी किया किया लेकिन कुछ किसानों के बेहद कम राशि के कर्ज माफ हुए। वहीं प्रक्रिया में भी देर हुई, ऐसे में कांग्रेस ने बचाव में कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण वादे को पूरा करने में देर हुई। लेकिन यह तर्क किसानों को पूरी तरह संतुष्‍ट नहीं कर पाया।

 

कारण 05: मोदी-ब्रांड का जादू...
इस बार भी मोदी-ब्रांड का जादू खूब चला। भले ही मप्र में लोगों ने विधानसभा चुनाव के दौरान 15 वर्ष से सत्‍ता पर काबिज बीजेपी सरकार को हराने के लिए वोट किया, लेकिन उस समय भी लोग यही कहते नजर आए थे कि केंद्र में तो मोदी को ही वोट देंगे। यानि राज्य की काफी हद तक जनता केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को लेकर संतुष्‍ट रही।

यही कारण रहा कि आम चुनाव में कांग्रेस को वोट देने वालों ने भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में मतदान किया। इसके साथ ही बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के जरिये पाकिस्‍तान को मुंहतोड़ जवाब देने के नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)के साहसिक फैसले को भी लोगों ने सराहा।

कारण 06: शासन की छाप और थोक में तबादले और लॉ एंड ऑर्डर...
शर्मा का कहना है इसके अलावा कांग्रेस शासन अपनी छाप भी जनता में छोड़ने में कामयाब नहीं दिखा। तभी तो करीब 70 वादे पूरी किए जाने की बात कहने के बावजूद इनका असर चुनावों में नहीं दिखा।

वहीं राज्‍य में सत्‍ता संभालते ही कांग्रेस के राज में थोक में तबादले (Transfer)शुरू हो गए। जिसके चलते कर्मचारी वर्ग में खासी नाराजगी रही। हालत यहां तक आ पहुंचे कि कुछ कर्मचारियों के तो दो-तीन माह के अंतरात में दो या तीन बार तबादले हुए।

ऐसे में बीजेपी (BJP) ने आरोप लगाया कि कमलनाथ की कांग्रेस सरकार में तबादलों ने उद्योग का रूप ले लिया है। यहां भ्रष्‍टाचार चरम पर है। इसके साथ ही कानून व्‍यवस्‍था को लेकर भी बीजेपी मुद्दा बनाने में सफल रही।

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