कांग्रेस के घर वापसी अभियान में रुठे नेताओं की रुची नहीं

कांग्रेस के घर वापसी अभियान में रुठे नेताओं की रुची नहीं

Harish Divekar | Publish: Sep, 19 2018 01:49:41 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

सिर्फ कार्यकर्ताओं को मना पाई कांग्रेस

 


मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अपने रुठे हुए नेताओं को वापस कांग्रेस में शामिल करने के लिए चलाया गया घर वापसी अभियान फेल होता नजर आ रहा है। इस अभियान के शुरु होने के बाद एक भी दिग्गज या बडे नेता को कांग्रेस संगठन पार्टी में शामिल करने में पूरी तरह से फेल हुए हैं। कुछ नेता पार्टी में वापस आना भी चाहते थे, लेकिन पार्टी के अंदर गुटबाजी के चलते उनकी वापसी का रास्ता तय नहीं हो पाया।

घर वापसी अभियान के लिए पूर्व मंत्री इंद्रजीत पटेल की अध्यक्षता में गठित प्रवेश समिति अब तक सिर्फ स्थानीय निकाय और जिला पंचायत के कुछ जनप्रतिनिधियों को ही कांग्रेस में शामिल करवा पाई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान कमलनाथ के हाथ में आने के बाद कई बागी और रूठे हुए नेताओं की वापसी के संकेत मिले थे। नाथ ने इसे स्वीकार भी किया था।

उन्होंने पटेल को घर वापसी की अभियान की जिम्मेदारी देकर कहा था कि नेताओं की घर वापसी की जाए, लेकिन पार्टी के असरदार और प्रभावी नेताओं की गुटबाजी के चलते पटेल के प्रयास सफल नहीं हो पाए। कमेटी बनने के बाद सबसे पहले कांग्रेस छोड़कर गए दिग्गज नेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और मंत्री राकेश पाठक का नाम प्रमुखता से लिया गया था। बाद में मंत्री पाठक ने पार्टी में वापसी आने की चर्चा पर यह कहते हुए विराम लगा दिया कि वे भाजपा में खुश हैं। इसके अलावा कांग्रेस से बागी होकर विधानसभा चुनाव लडऩे वाले निर्दलीय विधायक दिनेश राय 'मुनमुन" को भी इस अभियान में पार्टी में लेने की कोशिशे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, चतुर्वेदी की घर वापसी के लिए तो पार्टी के दिग्गज नेताओं सहित कई नेताओं ने काफी कोशिश की। हालांकि ये कोशिशें नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के विरोध के चलते परवान नहीं चढ़ सकीं।

बाद में चतुवेर्दी ने यह कहा था कि मैं चुनाव लडऩा चाहता हूं और जहां हूं, वहीं ठीक हूं। विधायक दिनेश राय ने कांग्रेस नेताओं की कोशिशों में हो रही देरी और अन्य कारणों से भाजपा को ज्वाइन कर लिया। नाथ के कमान संभालने के बाद दो बड़े नेताओं पूर्व संसदीय सचिव रहे मोहन सिंह बुंदेला व पूर्व विधायक राजनारायण पुरनी ने घर वापसी की। हालांकि पुरनी की घर वापसी पर पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव की सहमति नहीं ली गई थी और उनकी इसको लेकर नाराजगी रही।
अब तक 65 लोगों की वापसी
बताया जाता है कि प्रवेश समिति ने पीसीसी के माध्यम से बागी होकर चुनाव लडऩे या रूठकर पार्टी छोडऩे वाले नेताओं से आवेदन मंगाए थे। समिति ने अब तक 65 नेताओं की घर वापसी कराई है। इनमें उमरिया जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानवती ही प्रमुख हैं। इनके अलावा सात मौजूदा व नौ पूर्व पार्षदों और आठ जिला कांग्रेस कमेटियों की भी घर वापसी हुई।

भाजपा के असंतुष्ठों पर नजर
कांग्रेस भले ही अपने रुठे नेताओं को पार्टी में वापस लाने में भले ही सपफल नहीं हुई हो, लेकिन वो इस बार भाजपा के असंतुष्ट नेताओं को कांग्रेस में शामिल करने का पूरा जोर लगा रही है। दरअससल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा में इस बार एक सीट से औसतन 5 से 7 उम्मीदवार दावेदारी कर रहे हैं। इससे भाजपा के सामने असंतुष्टों से भितरघात का खतरा बढ गयसा है। इन सबके चलते कांग्रेस टिकट वितरण के दौरान भाजपा से नाराज नेताओं पर नजर बनाए हुए हैं। कांग्रेस सूत्र बताते हैं कि पीसीसी अध्यक्ष से भाजपा के कई नेता मुलाकात कर चुके हैं, जो टिकट नही मिलने की स्थिति में कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। इधर, कमलनाथ भी बीजेपी के तीस विधायकों से संपर्क का दावा कर चुके हैं।

 

वर्जन —
प्रवेश समिति ने बगावत कर चुनाव लडऩे और अन्य कारणों से पार्टी छोडऩे वाले नेताओं को पार्टी में दोबारा लेने के आवेदनों पर विचार कर रही है। कुछ लोगों की वापसी हो चुकी है कुछ और पार्टी में शामिल हो रहे हैं, वापसी के पहले सभी नेताओं से लिखित में लिया गया कि वे गलती को दोबारा नहीं दोहराएंगे।
-इंद्रजीत कुमार पटेल, अध्यक्ष, प्रवेश समिति पीसीसी

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