ज्योतिरादित्य सिंधिया चुने गए अध्यक्ष, पूर्व में लगे थे कई आरोप

ज्योतिरादित्य सिंधिया चुने गए अध्यक्ष, पूर्व में लगे थे कई आरोप

Deepesh Tiwari | Updated: 11 Aug 2019, 10:01:20 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

एसएटीआइ विदिशा का मामला...

भोपाल। तमाम तरह के आरोप प्रत्यारोपों के बीच आखिरकार शनिवार को हुए चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया ( Jyotiraditya Scindia ) को अध्यक्ष चुन लिया गया।

दरअसल विदिशा में एसएटीआइ के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के शनिवार को हुए चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया ( scindia ) अध्यक्ष, मोतीलाल वोरा उपाध्यक्ष और डॉ. लक्ष्मीकांत मरखेड़कर सचिव निर्वाचित घोषित किए गए।

चुनाव में सोसायटी के 20 में से 10 सदस्यों ने भाग लिया। पूर्व वित्तमंत्री और सोसायटी सदस्य राघवजी ने चुनाव प्रक्रिया का विरोध करते हुए इसका बहिष्कार किया।

सदस्यता सूची पर बवाल :
इससे पहले एसएटीआई ( sati ) को संचालित करने वाली महाराजा जीवाजीराव एजूकेशन सोसायटी (एमजेईएस) की बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के गठन के लिए प्रशासक द्वारा जारी सदस्यता सूची पर बवाल मचा हुआ था।

ये लगाए थे आरोप...
दावे आपत्तियों के समय पूर्व सांसद राघवजी, प्रतापभानु शर्मा, नपाध्यक्ष मुकेश टंडन और जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष श्याम सुन्दर शर्मा सहित डॉ. पद्म जैन और राममोहन सिन्हा, दीपक तिवारी और यतीन्द्र बहुगुणा ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और सदस्यता सूची को फर्जी बताते हुए यह भी कहा कि फर्जी सूची से होने वाले चुनाव अवैधानिक होंगे। जबकि प्रशासक ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए उन्हीं 20 सदस्यों के नामों को असली बताया, जिसमें से 14 सदस्यों को अधिकांश सदस्य फर्जी बता रहे थे।


आपत्तियों पर प्रशासक ने ये दिए थे जवाब....
आपत्ति- हाईकोर्ट में एक और याचिका लंबित है, चुनाव नहीं कराए जा सकते।
प्रशासक- इस केस में इस बात का कहीं भी उल्लेख नहीं है कि चुनाव नहीं कराए जा सकते।
आपत्ति- सदस्यता सूची फर्जी है, इनसे चुनाव नहीं कराए जा सकते।
प्रशासक- सोसायटी के कार्यालय में मौजूद सूची के अनुसार ही सदस्यों के नाम लिए गए हैं। किसी ने और कोई प्रमाण नहीं दिए।

आपत्ति- ज्योतिरादित्य सिंधिया ( jyotiraditya scindia ) की सदस्यता शुल्क बाद में जमा हुआ, वे सदस्य नहीं हैं।
प्रशासक- वो 2012 का जिक्र है। मौजूदा रिकार्ड के अनुसार सिंधिया सदस्य हैं।
आपत्ति- सोसायटी के पूर्व सचिव प्रतापभानु शर्मा से पुराना रिकार्ड नहीं मांगा गया।
प्रशासक- सोसायटी का रिकार्ड सोसायटी के दफ्तर में रहता है, किसी के घर पर नहीं। प्रतापभानु शर्मा का घर सोसायटी का दफ्तर नहीं है।

 

फर्जी सूची से चुनाव सोची समझी साजिश : राघवजी
वहीं इससे पहले पूर्व सांसद राघवजी ( ragav ji ) ने अपनी आपत्ति दर्ज कराने के बाद मीडिया से कहा था कि समिति की सदस्यता के मामले में 2012 में डॉ पद्म जैन ने एक याचिका हाईकोर्ट में लगाई है। इसका निराकरण होने तक चुनाव की यह प्रक्रिया न्यायालय की अवहेलना है।

राघवजी ने बताया कि मैंने उस रजिस्टर को देखना चाहा था, जिसके आधार पर चुनाव कराए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासक ने ये रजिस्टर नहीं बताया। राघवजी ने इसे सोची समझी साजिश निरुपित करते हुए कयहा कि ये चुनाव सिर्फ नाटक है, सब पहले से तय है कि कौन क्या बनाया जाएगा।

 

ज्योतिरादित्य jyotiraditya scindia को दी फर्जी सदस्यता : टंडन
नपाध्यक्ष मुकेश टंडन ने कहा था कि हमें दी गई सदस्यता सूची पूरी तरह फर्जी है। इसमें 16 सदस्यों को फर्जी तरह से जोड़ा गया है। इस पर ही हमने आपत्ति दर्ज कराई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया jyotiraditya scindia कभी सोसायटी के सदस्य नहीं रहे।

माधवराव सिंधिया के निधन पर प्रतापभानु शर्मा ने उन्हें 2001 में सदस्य तो बना दिया, लेकिन उनका सदस्यता शुल्क 2009 में जमा किया गया। ऐसे में उनकी सदस्यता वैध कैसे मानी जा सकती है। सिंधिया को षडयंत्रपूर्वक चुनाव नहीं कराना चाहिए। संस्था पर कब्जा करने के ये प्रयास उचित नहीं हैं। अवैधानिक तरीके से चुनाव कराया गया तो जनांदोलन खड़ा हो जाएगा।

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