मिशन 2023 के लिए कांग्रेस का मेगा प्लान, फिर खड़ा होगा पुराना संगठन, अब परफॉरमेंस को मिलेगी प्राथमिकता

उपचुनाव में कांग्रेस को केवल 9 सीटों पर जीत मिली, जबकि कांग्रेस ने 28 सीटों पर जीत का दावा किया था।

By: Pawan Tiwari

Updated: 23 Nov 2020, 08:38 AM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश की 28 सीटों के परिणाम कांग्रेस के अनुकूल नहीं थे। कांग्रेस ने सत्ता में वापसी का दावा किया था लेकिन उसे मात्र 9 सीटों पर जीत मिली। कांग्रेस का फोकस अब 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव पर है। इसके लिए पूर्व सीएम कमलनाथ संगठन को मजबूत करने के लिए फोकस कर रहे हैं। हार के बाद से ही कायस लगाए जा रहे हैं कि कमलनाथ नेता प्रतिपक्ष या प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष में से कोई एक पद छोड़ सकते हैं।

कांग्रेस में अब संगठन की मजबूती पर सबसे ज्यादा फोकस है। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने इसके लिए परफॉरमेंस को पहली प्राथमिकता पर रखा है। इसके तहत संगठन में परफॉरमेंस ऑडिट के आधार पर पद और जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए नए सिरे से गाइडलाइन तय की गई है। इनके आधार पर ही कार्यकर्ताओं को प्रदेश और जिले में पद दिए जाएंगे। इतना ही नहीं पदाधिकारियों के काम का रिपोर्च कार्ड भी बनेगा। प्रदेश से जिले और ब्लॉक के पदाधिकारियों की हर छह माह में समीक्षा होगी।

दरअसल, कमलनाथ का नया संगठन अब मिशन 150 यानी 2023 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत बनाया जाएगा। इसी बीच में नगरीय निकाय, पंचायत और मंडी चुनाव भी होने हैं, जिनमें कांग्रेस अपनी धमक दिखाने की तैयारी कर रही है। इन चुनावों में जिला और ब्लॉक स्तर के संगठन की अहम भूमिका रहने वाली है।

योग्यता को मिलेगा मौका
एमपी में उपचुनाव में हार के बाद अब कांग्रेस नए फॉर्मूले के तहत संगठन को मजबूत करने में जुट गयी है। इसके लिए कांग्रेस ने अपना माइक्रो फॉर्मूला तैयार किया है। इस फॉर्मूले के तहत अब कांग्रेस की इकाई को ना सिर्फ सीमित संख्या में गठित किया जाएगा बल्कि काम और योग्यता के आधार पर ही कार्यकर्ताओं को टीम में जगह दी जाएगी।

नया फार्मूला
सूत्रों का कहना है कि संगठन की सभी इकायों को भंग कर नए सिरे से पुर्नगठन की तैयारी कर ली है। एमपी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की पीसीसी चीफ कमलनाथ के नेतृत्व में बैठक भी हो चुकी है। जल्द ही नए फॉर्मूले के साथ कांग्रेस की नई टीम का गठन करने की तैयारी की जा रही है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के अनुसार, प्रदेश की सभी कांग्रेस इकाइयों को भंग कर नए सिरे से गठन किया जाना चाहिए। इसके गठन को लेकर एक माइक्रो फॉर्मूला तैयार किया गया है। एक फॉर्मेट के तहत ही पूरे संगठन की संरचना अलग प्रकार से की जाएगी।

सेवादल पर भी फोकस
कांग्रेस में सेवादल को फ़ौजी अनुशासन और जज़्बे के लिए जाना जाता है। इसका संगठनात्मक ढांचा और संचालन का तरीक़ा सैन्य रहा है। कभी कांग्रेस में शामिल होने से पहले सेवादल की ट्रेनिंग ज़रूरी होती थी। इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी की कांग्रेस में एंट्री सेवादल के माध्यम से ही कराई थी। नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सब सेवादल को ‘कांग्रेस का सच्चा सिपाही’ कहते रहे हैं। लेकिन अब सेवा दल खत्मे की तरफ है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस एक बार फिर से सेवादल को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

बूथ पर फोकस
जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर बूथ पर पकड़ बनाने के लिए बूथ सहयोगी नियुक्त करनी चाहिए। कांग्रेस की योजना हर बूथ पर दस सहयोगी नियुक्त करने की है। बूथ पर फोकस औऱ अपने कार्यकाल के किए कामों के प्रचार जनता के बीच कांग्रेस को एक बार फिर से खड़ा कर सकता है।

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