फ्रांस के हैकर ने बताई खामी, जिलों को दे दी लोकल एप बनाने की छूट

- बंद हुआ सार्थक-डेशबोर्ड, सिस्टम बदलकर जिलों को अधिकार दिए

jitendra [email protected] भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना संदिग्ध व संक्रमित मरीजों की मानीटरिंग के लिए बना सार्थक एप को लेकर अब सरकार ने सिस्टम बदल दिया है। फ्रांस के एथिकल हैकर एलियट एंडरसन के इस एप पर सवाल उठाने के बाद इसका एक मॉड्यूल डैशबोर्ड बंद कर दिया गया है, लेकिन बाकी के चार मॉड्यूल काम कर रहे हैं। इतना जरूर है कि एयियट के आब्जर्वेशन के बाद सरकार ने सेंट्रलाइज सिस्टम को बदलकर कोरोना के लिए शहरों को लोकल एप बनाने की छूट दे दी, जिसके तहत इंदौर ने अपना लोकल एप तैयार किया है। अब मैप-आईटी सार्थक सहित अपने डाटा सेंटर को साइबर सिक्योरिटी के नजरिए से और फूलपू्रफ करने में लगा है।
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दरअसल, फ्रांस के एथिकल हैकर एलियट ने सार्थक एप की कई खामियों को उजागर किया था। एलियट ने इसके डैशबोर्ड में लोगों के डाटा रखने को गलत ठहराकर आसान हैकिंग का खतरा बताया था। साथ ही लोगों का इस एप पर रिअल टाइम लोकेशन ट्रेस करना गलत ठहराया था। इसके चलते मैप-आईटी ने तुरंत सार्थक एप के दो मॉड्यूल में काम बंद कर दिया। इसमें एक मॉड्यूल को डेशबोर्ड के साथ बंद कर दिया गया, जबकि दूसरा मॉड्यूल केंद्र सरकार के कोरोना मानीटरिंग के लिए बने आरटीपीसी में शिफ्ट कर दिया गया। इसके अलावा मैप-आईटी ने सभी जिलों को लोकर एप डेवपल करने की छूट दे दी है, जिसमें सबसे पहले इंदौर ने लोकल एप तैयार कर लिया है। मैप-आईटी ने इसके बाद से सेंट्रलाइज मानीटरिंग बंद कर दी। सार्थक एप में कोरोना को लेकर संदेह वाले या स्क्रीनिंग वाले मरीजों के साथ पॉजीटिव मरीजों का मोबाइल नंबर व अन्य पूरी डिटेल रखी जाती है। इसमें व्यक्ति की पूरी रियल टाइम लोकेशन मानीटर होती है। इस पर हैकर ने सवाल उठाए थे।
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कौन है एलियट-
एलियट फ्रांस का एक एथिकल हैकर है, जो दुनियाभर के सिस्टम को हैक करके उनकी खामियां बताता है। एलियट ने ही आरोग्य सेतु की खामियों को उजागर किया था, जिसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोग्य सेतु को प्रायवेसी के लिए खतरा बताया था।
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डाटा सिक्योरिटी के लिए भी अलर्ट-
फ्रांस के एथिकल हैकर के मैप-आईटी को ट्वीट करने के बाद मैप-आईटी के डाटा पर दुनियाभर के एथिकल व नॉन-एथिकल हैकर्स की नजरें पहुंच गई हैं। इस कारण अब मैप-आईटी अपने साइबर सिक्योरिटी फीचर्स को भी अपग्रेड कर रहा है, क्योंकि मैप-आईटी के पास सरकार के डाटा भी मौजूद रहते हैं, जिनके हैक होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इसके चलते अब साइबर सिक्योरिटी पर अधिक अलर्ट होने की स्थिति बन गई है।
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इनका कहना-
सार्थक एप का डैशबोर्ड हटा दिया गया है। साथ ही एक मॉड्यूल को केंद्र के आरटीपीसी में शिफ्ट किया गया है। सार्थक एप पब्लिक के लिए नहीं है, इस कारण इसमें केवल कुछ लोगों का एक्सेस ही है। इसके अलावा जिलों को लोकल स्तर पर एप बनाने के अधिकार दे दिए गए हैं। वे अपने स्तर पर एप तैयार कर रहे हैं। - नंदकुमारम्, सीईओ, मैप-आईटी, मप्र
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जीतेन्द्र चौरसिया Reporting
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