वायरस नहीं बदल रहा है अपना रूप, जल्द बन सकता है लंबे समय तक चलने वाला टीका

- भारत में मरीजों की संख्या 562 के करीब...
- अब तक हो चुकी है 11 लोगों की मौत...
- वैज्ञानिक कर रहे हैं अध्ययन...
- जल्द बन सकता है लंबे समय तक चलने वाला टीका...

भोपाल। वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई है। पूरे भारत में अब तक कोरोना वायरस (coronavirus) से संक्रमित मरीजों की संख्या लगभग 562 तक पहुंच चुकी है। रोजाना कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामले सामने आ रहे हैं। इनमें से 512 लोगों का इलाज चल रहा है। बुधवार को बिहार में एक, मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में पांच और तेलंगाना में तीन नए मरीज मिले हैं। यह आंकड़े स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए हैं।

coronavirus positive patient run away at home in shivpuri

भारतीय आयुर्विज्ञान शोध परिषद (ICMR) के अनुसार भारत में अभी कोरोना संक्रमण दूसरे स्टेज में है, लेकिन कम्यूनिटी ट्रांसमिशन यानी सामुदायिक प्रसार बढ़ा तो इसे संभालना चुनौती भरा हो जाएगा। अन्य देशों की तरह इसको फैलने से रोकना है। बताया जा रहा है कि अगर ये तीसरी स्टेज में पहुंच गया तो इसको रोकना मुश्किल हो जाएगा। यहीं कारण है कि विदेश से भारत लौटे सभी लोगों का क्वारंटीन और देश में रह रहे लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।

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आपको बता दें कि इस वायरस के जेनेटिक कोड पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस अपना रुप नहीं बदल रहा है। ये अच्छी बात है। वायरस के अपना रुप न बदलने के कारण शोधकर्ताओंका मानना है कि वे लंबे समय तक चलने वाला टीका बना सकते हैं। उनका कहना है कि वायरस समय बदलने के साथ विकसित भी होते है लेकिन कोरोना वायरस अपना रुप स्थिर रखे हुए है।

वायरस एक होस्ट सेल के अंदर रहकर खुद को बढ़ाते हैं और फिर जनसंख्या के जरिए आस-पास फैलते जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान कुछ अपने प्राकृतिक रूप में ही रहते हैं जबकि कुछ अपना स्वरूप बदल लेते हैं। कोरोना के रुप न बदलने के कारण त्रुटि दर कम हो जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि एक वायरस दूसरे से ज्यादा खतरनाक है।

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वैज्ञानिकों के अनुसार सार्स-कोव-2 वायरस के कारण कोविड-19 बीमारी होती है। यह कोरोना वायरस के जैसा है जो प्राकृतिक रूप से चमगादड़ों में पाया जाता है। यह पिछले साल चीन के वुहान में मनुष्यों के अंदर आया था। कोरोना वायरस के फैलने के बाद वैज्ञानिक अब वायरस के 1,000 विभिन्न नमूनों का अध्ययन कर रहे हैं। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में मॉल्यूकल जेनेटिस्ट पीटर थीलन वायरस का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया है कि संक्रमित लोगों और वुहान में फैलने वाले मूल वायरस के बीच केवल चार से 10 आनुवंशिक अंतर हैं।

 

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जेनेटिस्ट पीटर थीलन कहते हैं कि लोगों को अपना शिकार बनाने के बावजूद इस वायरस में बहुत कम अनुवांशिक अंतर आया है। उम्मीद जताई जा रही है कि सार्स-कोव-2 के लिए एक ही टीका बनाया जा सकता है। वहीं फ्लू के लिए हर साल अलग-अलग टीके बनाए जाते हैं। आने वाले सालों में कोरोना वायरस का टीका खसरे या चिकनपॉक्स के टीकों की तरह होगा।यह टीका लोगों के इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करेगा।

Ashtha Awasthi
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