सिमी के आतंकी को चार बार आजीवन कारावास की सजा

सिमी के आतंकी को चार बार आजीवन कारावास की सजा

Sunil Mishra | Publish: Mar, 16 2019 07:46:50 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

पुलिस दल पर हमला कर की थी एटीएस आरक्षक की हत्या, दो जवान हुए थे घायल

रतलाम में एटीएस पुलिस आरक्षक की गोली मारकर हत्या, उपनिरीक्षक और एक अन्य आरक्षक पर जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने प्रतिबंधित संगठन सिमी के आतंकी मोहम्मद फरहत को 4 बार उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने हत्या, दो पुलिसकर्मियो की हत्या का प्रयास और विधि विरूद्ध क्रियाकलाप अधिनियम के तहत फरहत को अलग-अलग उम्र कैद से दंडित किया है। हालांकि चारों सजाएं एक साथ चलेंगी।

विशेष सत्र न्यायाधीश गिरीश दीक्षित ने यह फैसला सुनाया है। मामले में फरहत केन्द्रीय जेल भोपाल में बंद है। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये फरहत को सजा सुनाई गई। फरहत के अन्य साथी सह आरोपी जाकिर की मौत हो चुकी है, वहीं अदालत ने सह आरोपी निजाउद्दीन को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।

पैरवी करने वाले जिला अभियोजन अधिकारी राजेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि एटीएस रतलाम को 3 जून 2011 को सूचना मिली थी कि खंडवा जिले में एटीएस आरक्षक की हत्या के आरोपी सिमी के आतंकी रतलाम में छिपे हैं। सूचना पर एटीएस के उपनिरीक्षक मनीष दुबे, आरक्षक शिवप्रताप सिंह और जितेन्द्र मोचीपुरा रतलाम पहुंचे। एटीएस के दल को देखकर मोहम्मद फरहत ओर उसके साथियों ने टेम्पो से भागने का प्रयास किया। बाद में पिस्टल से पुलिस दल पर कई फायर किए। हमले में आरक्षक शिव प्रताप सिंह की मौत हो गई थी। वहीं उपनिरीक्षक मनीष दुबे और आरक्षक जितेन्द्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

 

 

पूर्व नेता प्रतिपक्ष पहुंचे कोर्ट, मिली जमानत

बुरहानपुर जिले के चक्काजाम के एक मामले में शुक्रवार को पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह जिला अदालत पहुंचे। मामले में अजय ङ्क्षसह का स्थाई गिरफ्तारी वांरट जारी था। राजनैतिक मामलों के लिए गठित विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेश सिंह की अदालत में अजय सिंह ने आत्मसमर्पण किया। अदालत ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेजने के आदेश दिए। बाद में अजय सिंह की ओर से वकील सैय्यद साजिद अली ने जमानत अर्जी पेश की। अदालत ने अर्जी स्वीकार कर अजय सिंह की 20 हजार की जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।

इन्दौर इच्छापुर मार्ग पर तापती पुल के पास कांग्रेस नेताओ-कार्यकर्ताओ ने 27 दिसंबर 2002 को चक्काजाम कर दिया था। पुलिस ने मामले में 241 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया था। इस मामले में अजय सिंह के खिलाफ स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी था।

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