जहां महिला रहे वहीं दर्ज करा सकती है दहेज प्रताडऩा का केस

सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में फैसला देते हुए कहा है कि ससुराल से निकलने को मजबूर हुई महिला के लिए ये ज़रूरी नहीं कि वो दहेज उत्पीडऩ की शिकायत उसी शहर में दर्ज कराए, जहां ससुराल है। महिला

माता-पिता के शहर या जहां भी उसने शरण ली है, उस जगह शिकायत दर्ज करवा सकती है। आम तौर पर आपराधिक मामले में ये कानून है कि केस उसी पुलिस थाने में दर्ज कराया जा सकता है जहां की सीमा क्षेत्र में घटना घटी हो। लेकिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार को कहा कि चूंकि महिला अपना ससुराल का घर छोडऩे के लिए मजबूर हुई है इसलिए वो जहां रहेगी वहां वह भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत केस दर्ज करा सकती है। इस मामले में पैरवी भोपाल के एडवोकेट विक्रांत सिंह और अजय श्रीवास्तव ने की।

सिंह ने बताया कि इस संबंध में रूपाली देवी की ओर से केस किया गया था। वे देवरिया की रहने वाली हैं और उनकी शादी महू में हुई थी। उनके ससुराल वालों ने दहेज के लिए प्रताडि़त किया तो वे अपने मायके देवरिया चली गईं। उन्होंने देवरिया में दहेज प्रताडऩा का केस दर्ज कराया। लेकिन ससुराल वालों ने इस पर आपत्ति की थी कि मामला महू का है तो यहीं पर केस दर्ज कराया जा सकता है। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

रिश्वत लेने वाले रेलवे के स्टेशन मैनेजर-यार्ड मास्टर को 3 साल की कैद

स्टेशन की साफ-सफाई के ठेके को एक साल के लिए बढ़ाने के एवज में सफाई ठेकेदार से 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ाये भोपाल रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर शोभाराम मीणा और असिस्टेंट यार्ड मास्टर कमलेश चंद उनियाल को अदालत ने 3 साल के सश्रम कारावास-25 हजार रूपये जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष सत्र न्यायाधीश सीबीआई आलोक अवस्थी ने यह फैसला सुनाया है।

सीबीआई के वकील कमालउददीन ने बताया कि भोपाल रेलवे स्टेशन की सफाई का ठेका 1 जून 2007 से 31 मई 2008 तक मेसर्स एक्वाक्लीन सर्विसेस के पास था । सतोषजनक कार्य के अधार पर ठेके को एक साल के लिए बढाने के ऐवज में कंपनी के मेनेजिग डायरेक्टर मनीष गंगेले से मीणा और उनियाल ने 10 हजार की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने पर सीबीआई की टीम ने 2 जुलाई 2008 को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

सुनील मिश्रा
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