scriptcrime bhopal | जेल के पहरेदारों से कहते हैं आतंकी, डेथ वारंट आने में लगेगा वक्त | Patrika News

जेल के पहरेदारों से कहते हैं आतंकी, डेथ वारंट आने में लगेगा वक्त

फांसी का खौफ- संविधान पर यकीन नहीं फिर भी सुप्रीम कोर्ट की आस,

अंडा सेल में सफदर नागौरी सहित सभी छह आतंकियों को किया गया है कैद

सुबह 11 से दोपहर 2 के बीच में मिलने आते हैं परिजन

 

अहमदाबाद के सीरियल बम ब्लास्ट मामले में आरोपी मास्टरमाइंड सफदर नागौरी एवं उसके साथी शिवली, शादूली आमिल परवेज, कमरुद्दीन और हाफिज को फांसी की सजा सुनाई गई है। सभी को भोपाल सेंट्रल जेल में रखा गया है।

भोपाल

Published: February 24, 2022 10:21:26 pm

आतंकियों ने न्यायालय में खुली सुनवाई के दौरान भारत के संविधान पर अविश्वास जताया था लेकिन फांसी से बचने के लिए अब उन्हें इसी संविधान और सुप्रीम कोर्ट से आस है। सजा सुनाए जाने के पहले ही दिन मास्टरमाइंड सफदर नागौरी ने साफ कह दिया था कि उसका भारतीय संविधान में कोई विश्वास नहीं है। अंडा सेल की पहरेदारी करने वाले जेल के पहरेदारों से आम बोलचाल में नागौरी और उसके साथी अक्सर कहते हैं कि अभी डेथ वारंट आने में समय लगेगा, जिला न्यायालय से सजा मिलने के बाद हाईकोर्ट में मामला कंफर्म किया जाएगा जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील का रास्ता भी खुला हुआ है। गांधीनगर स्थित सेंट्रल जेल के अंदर अंडा सेल के 31 काउंटर मौजूद हैं जिनमें से 23 में आतंकियों को रखा गया है।
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सुबह से मिलने आते हैं परिजन
अंडा सेल में बंद आतंकियों के परिजन अभी भी सुबह 10 से दोपहर 2 के बीच उनसे मिलने के लिए आते हैं। जेल मैन्युअल के हिसाब से 20 मिनट की औपचारिक मुलाकात करने का अधिकार परिजनों को दिया गया है। इस दौरान जेल सुरक्षा गार्ड मौके पर मौजूद रहते हैं। परिजनों के द्वारा लाया गया किसी भी प्रकार का खाने पीने का सामान जेल के मुख्य द्वार पर ही रखवा लिया जाता है। कई बार परिजन आतंकियों तक इन्हें पहुंचाने की गुहार लगाते हैं लेकिन कड़े कानून के चलते इसे अनदेखा किया जाता है।
डेथ वारंट आते ही सब तय हो जाएगा

सेंट्रल जेल के अधीक्षक दिनेश नरवाणे ने बताया कि न्यायालय ने आरोपियों को फांसी की सजा दे दी है। न्यायालय ही मामले में डेथ वारंट जारी करेगा। हाईकोर्ट इसे कंफर्म करेगा। वारंट में आतंकियों को सजा देने का स्थान एवं समय निर्धारित किया जाएगा। जिस जगह पर फांसी दिया जाना मुकर्रर होगा उस जगह फांसी की तैयारियां पूरी की जाएंगी। तय समय पर प्रोटोकॉल मैनुअल के हिसाब से मौजूद प्रशासनिक पैनल के सामने आतंकियों को फांसी पर लटका दिया जाएगा। शासकीय चिकित्सक द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद शव परिजनों के सुपुर्द किए जाएंगे।

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