113 करोड़ के प्रोजेक्ट में लगाई फर्जी बैंक गारंटी

नागपुर की कंपनी के खिलाफ क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज, 113 करोड़ की लागत से एमपी के 4 शहरों में बनना थे आईटीआई भवन

भोपाल। केंद्र सरकार की ओर से रीवा, जबलपुर, सागर एवं शहडोल में आईटीआई भवन के प्रोजेक्ट में नागपुर की प्रायवेट कंपनी ने 113 करोड़ रुपए का ठेका लेकर फर्जी बैंक गारंटी जमा कराई है। नियमानुसार कंपनी को 10 फीसदी राशि के बराबर संपत्ति के दस्तावेज बैंक में जमा करवाने थे लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। तीन साल बाद जब बैंक को ये बात पता चली तो मामले का खुलासा हुआ। निर्माता कंपनी ने भोपाल में राजदीप महाकाली सोसायटी शाहपुरा में कार्यालय खोला था। कंपनी के डायरेक्टर नितिन सुभाष शर्मा के खिलाफ निर्माण एजेंसी के प्रबंधक एमए मंसूरी ने क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज करवाया है। एएसपी गोपाल धाकड़ ने बताया कि तीन साल पहले 2018 में नागपुर की तिरूपति कंस्ट्रक्शन कंपनी को आईटीआई कॉलेज के भवन बनाने का ठेका दिया गया था। रीवा, जबलपुर, सागर और शहडोल में कॉलेज के भवन के लिए 113 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। इसके लिए कंपनी संचालक नितिन सुभाष शर्मा ने 10 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी रखी थी। उसने काम भी शुरू कर दिया, लेकिन तीन साल तक किसी का बैंक गारंटी के कागजातों पर ध्यान नहीं गया। इस बीच शिकायत मिलने पर मंसूरी ने गारंटी से संबंधित कागजात के बारे में बैंकों से पता लगवाया। वहां से पता चला कि उनके यहां से इस तरह के कागजात जारी नहीं किए गए। इसके बाद मंसूरी ने क्राइम ब्रांच को गुरुवार देर रात शिकायत की। क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद नितिन सुभाष शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया। क्राइम ब्रांच जल्द ही बैंक गारंटी वाले कागजात को लेकर संबंधित बैंकों को पत्र लिखकर जानकारी लेगी। जांच में यह भी शामिल किया जाएगा कि उसने यह कागजात कैसे हासिल किए। इसके साथ ही ठेके देने की प्रक्रिया और बैंक गारंटी संबंधी कागजात की जांच की प्रक्रिया का पता लगाया जाएगा, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े का खुलासा हो सके।

सुनील मिश्रा
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