शहर छोड़कर जिस जगह रह रहा है बदमाश, वहां थाने में हाजिरी लगाने का प्रावधान नहीं

जिला बदर का फरमान कागजों में, शहर में ही अपराध कर रहे गुंडे

भोपाल. शहर में जिला बदर किए जाने के बाद भी बदमाश जिले की सीमा में घूमते हुए वारदातों को अंजाम देते हैं। इसका कारण इनकी मॉनिटरिंग का सिस्टम नहीं होना है। पुलिस को भी यह पता नहीं होता कि जिला बदर आदेश के बाद गुंडा शहर छोड़कर गया या नहीं। वह किस शहर में रह रहा है, क्या कर रहा है, वहां की पुलिस को भी इसकी जानकारी देने का प्रावधान नहीं है। हाल ही में अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में जिला बदर बदमाश के सट्टा चलाने का मामला सामने आया था। 2019 में जिला बदर के 27 मामले आए हैं।

2019 में 184 जिला बदर, 44 एनएसए
वर्ष 2019 में जनवरी से दिसंबर के बीच 184 बदमाशों के खिलाफ जिला बदर आदेश जारी हुए। वहीं, 44 के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की गई। इनमें अधिकतर बदमाश खूंखार हैं। जिला बदर के अधिकतर बदमाश आदेश की अवधि के दौरान शहर में ही पकड़े गए।

बदमाशों को पुलिस का अप्रत्यक्ष संरक्षण
जिला बदर बदमाशों का शहर में रहने के दौरान अप्रत्यक्ष तरीके से पुलिस का संरक्षण मिलता है। इससे लुक छिपकर अपराध को भी अंजाम देते हैं। पकड़े जाने पर पुलिस जिला बदर का उल्लंघन का केस दर्ज कर उसे जेल भेज देती है। उसे संरक्षण देने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

मॉनिटरिंग का यह सिस्टम होना चाहिए
आदेश के बाद जिला बदर किस शहर में गया है, इसकी सूचना वह संबंधित इलाके के थाने को दी जाना चाहिए।
जिला बदर के दौरान खर्च के लिए क्या कर रहा है, इसकी जानकारी देना अनिवार्य किया जाए।
संबंधित क्षेत्र के बीट प्रभारी को उसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी जाए। लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान हो।
हर रोज या सप्ताह में वह संबंधित थाने में हाजिरी लगाए।
अपने गृह थाना पुलिस को पत्र लिखकर बताए कि वह वर्तमान में इस जगह पर है।

जिला बदर बदमाशों की मॉनिटरिंग के लिए ट्रैकिंग सिस्टम डवलप किया गया है। जिससे कि बदमाश की लोकेशन की जानकारी पुलिस को मिलती रहे। आदेश के बाद जहां जिला बदर रह रहा है, उस थाने को जानकारी देने का प्रावधान नहीं है।
इरशाद वली, डीआईजी

Sumeet Pandey Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned