नुकसान की मार झेल रहे किसान, कलेक्टर के निर्देश के बाद भी नहीं पहुंचे सर्वे दल

फसल नुकसान: दो बार किसान आंदोलन, कटाई भी शुरू, लेकिन देखने नहीं पहुंच रहा कोई

By: Bharat pandey

Published: 16 Sep 2020, 07:00 AM IST

अशोकनगर। जुलाई में पूरे माह बारिश न होने से फसलों में नुकसान हुआ और अगस्त के अंतिम सप्ताह में हुई ज्यादा बारिश ने फसलों को बर्बाद कर दिया। फसल नुकसान पर किसानों ने दो बार आंदोलन कर सर्वे कराकर मुआवजा दिए जाने की मांग की। इस पर कलेक्टर ने भी सर्वे के निर्देश दिए, लेकिन जहां फसलों की कटाई शुरु हो गई है और अब तक खेतों पर नुकसान की हकीकत देखने कोई भी नहीं पहुंच रहा है। कृषि विभाग के मुताबिक फसल गिरदावरी की रिपोर्ट अनुसार जिले में इस बार 2.8 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन व 16 हजार हेक्टेयर में उड़द की फसल है।

किसानों का कहना है कि जहां पिछले वर्ष जिलेभर में उड़द की पूरी फसल बर्बाद हो गई थी और इस बार भी उड़द में 60 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है। वहीं सोयाबीन की जल्दी पकने वाली किस्म के सोयाबीन में जहां फलियां कम लगी हैं और दाना छोटा रह गया है, तो वहीं देरी से पकने वाली किस्म के सोयाबीन में बारिश न होने से फलियों में दाने नहीं बन पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि देरी से पकने वाली सोयाबीन पूरी तरह से से खराब हो चुका है।


सवाल: फसल कटने के बाद होगा सर्वे?
किसानों द्वारा दो बार आंदोलन करने पर कलेक्टर अभय वर्मा ने फसलों में नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जहां उड़द की फसल कट चुकी हैं, वहीं सोयाबीन की कटाई चल रही है। इसके बाद भी सर्वे टीमें गांव में नहीं पहुंच रही हैं और न ही राजस्व, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी खेतों में पहुंच रहे हैं। सर्वे टीमों के न आने से किसानों में नाराजगी है।

अन्नदाता ने बताई नुकसान की हालत
सोयाबीन में 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान और उड़द पूरी तरह खराब हो गया। कटाई शुरू हो गई है, लेकिन सर्वे करने कोई भी नहीं आया।
धनीराम कुशवाह, आमखेड़ा तूमैन


फलियां चिपककर सूख गई हैं और 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान फसलों में हुआ है। कोई भी खेतों तक नहीं पहुंचा और ना हीं गांव में।
हरवीरसिंह जोगी, किसान लखेरी


बारिश रुकने से सोयाबीन में दो-चार फलियां ही लगी हैं, फसल की कटाई शुरू हो गई है और यदि सर्वे के इंतजार में कटाई रोकते हैं तो शेष दाने भी टपक जाएंगे।
कल्यानसिंह कुशवाह, जुगया

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