आदिवासियों के नाम पर डकारे करोड़ों

ऑडिट रिपोर्ट : करोड़ों एडवांस देकर भूल गए अफसर

By: anil chaudhary

Published: 01 Jul 2019, 05:18 AM IST

गड़बड़ी एक नजर में
- 1.40 करोड़ एक ही नाम पर दो-दो बार जारी
- 33.07 करोड़ एडवांस देकर भूल गए अफसर
- 10.27 करोड़ का हिसाब ढूंढने से नहीं मिला
- 22.29 करोड़ का भुगतान गड़बडिय़ों से रुका

जितेन्द्र चौरसिया, भोपाल. प्रदेश में पिछली भाजपा सरकार में आदिवासियों की योजनाओं में रुपयों की जमकर बंदरबांट हुई। इसका खुलासा धीरे-धीरे हो रहा है। एक ही बिल पर दो-दो बार करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं, एडवांस राशि का समायोजन किए बिना ही भुगतान कर दिए गए। कमलनाथ सरकार के आने के बाद ऑडिट में मिली गड़बड़ी पर पिछले हफ्ते करीब 50 अफसरों को नोटिस थमाए गए हैं। पढि़ए, भुगतान में गड़बड़ी पर विशेष रिपोट...र्
- यूं समझिए खेल
1- बड़वानी में जनजातीय कार्यालय सहायक आयुक्त के यहां से अजजा विद्यार्थियों को आवास के लिए दी जाने वाली राशि एक ही नाम पर दो-दो बार निकली गई। ई-ट्रेजरी के मिलान में 1.40 करोड़ की यह गड़बड़ी पकड़ में आई तो हड़कंप मच गया। ऐसी ही गड़बड़ी की आशंका पर अब दूसरे जिलों में पड़ताल की जा रही है। बड़वानी में दोषी अधिकारियों को नोटिस दिया गया, लेकिन जो राशि दो-दो बार जारी हुई उसकी वसूली मुश्किल हो गई है। साथ ही आवास सहायता के लिए किरायेनामे पर स्टॉम्प लगता है, लेकिन जांच में पाया गया कि 28447 विद्यार्थियों के किरायेनामे में ऐसा नहीं किया गया। पिछले हफ्ते अफसरों को चेतावनी पत्र दिया है।
2- वित्त संहिता के मुताबिक तीन महीने के भीतर सरकारी मदों में एडवांस को समायोजित करना होता है, लेकिन अलीराजपुर, भोपाल, अनूपपुर और सीधी में 33.07 करोड़ रुपए का समायोजन वर्षों से नहीं किया गया। बिना समायोजन के आगे के बिलों का भुगतान होता रहा। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे बिल भी रहे, जो निजी संस्थाओं या एनजीओ को दिए गए थे। वहीं, अलीराजपुर के विभागीय रेकॉर्ड में 10.27 करोड़ रुपए का हिसाब नहीं मिला। इस पर अफसरों को नोटिस दिए गए हैं।
3- इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के कारण भारत सरकार ने 22.79 करोड़ का भुगतान रोक लिया है। इसमें प्रोजेक्ट वर्क होने की रिपोट्र्स ही केंद्र को नहीं दी गई। इसका कारण जिलों में बिना काम कराए अग्रिम भुगतान कर देना रहा। इसके अलावा 18.22 करोड़ रुपए ऐसे मिले हैं, जो बैंकों में गलत तरीके से रखे गए। इस राशि को खर्च किया बताया गया, लेकिन बैंकों से राशि ही जारी नहीं हुई।

- जांच में पकड़ी गड़बड़ी
महालेखाकार कार्यालय ग्वालियर हर साल विभागों का इंटरनल ऑडिट करता है। इसी के तहत ऑडिट टीम ने आदिवासी विभाग के कार्यालयों की बीते तीन महीनों में जांच की है। इसमें आदिम जाति कल्याण विभाग के 50 से ज्यादा कार्यालयों में पैसे की हेरा-फेरी पकड़ी गई। यह ऐसी गड़बड़ी है, जो पूर्व में भी ऑडिट आपत्ति में उठाई गई, लेकिन विभाग ने इसे दरकिनार कर दिया। इस बार जब आदिम जाति कल्याण मंत्री ओमकार सिंह मरकाम आदिवासी बच्चों के होस्टलों का निरीक्षण करने निकले, तो उन्होंने होस्टलों की बदहाली पर नाराजगी जताई थी। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के कारण आदिम जाति कल्याण विभाग में गड़बडिय़ों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए गए। इस बीच ऑडिट टीम ने होस्टलों सहित आदिम जाति कल्याण विभाग के कार्यालयों में जांच की। इसमें उन मामलों को भी देखा गया, जिनमें पिछली बार संबंधित अफसरों ने दस्तावेज नहीं दिए थे। महालेखाकार कार्यालय ने पिछले हफ्ते इसकी इंटरनल रिपोर्ट बनाकर विभाग को भेजी है। इस पर विभाग ने सभी 50 कार्यालय प्रमुखों को नोटिस दिए गए हैं।

पिछली भाजपा सरकार के समय आदिवासियों की योजनाओं में केवल भ्रष्टाचार हुआ है। हम उनकी गड़बडिय़ों को दूर करके सिस्टम सुधार रहे हैं। होस्टल के निरीक्षणों में कई जगह कमियां मिली थीं, उनको दूर करने के लिए कहा था।
- ओमकार सिंह मरकाम, मंत्री, आदिम जाति कल्याण विभाग

 

anil chaudhary Desk
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