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मंदिर में काहे का पर्दा, प्रशासक को जुर्माने का नोटिस

मैहर की मां शारदा देवी मंदिर (Sharda devi temple) का मामला

भोपाल

Updated: April 27, 2022 10:35:41 pm

भोपाल। मंदिर (temple) में वैसे तो किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं होता, जो होता है सभी की जानकारी में रहता है। जब प्रबंधन सरकार के अधीन हो तो फिर पारदर्शिता और बढ़ जाती है। ऐसा ही मामला मैहर की मां शारदा देवी मंदिर (Sharda devi temple) में सामने आया है। आरटीआई (RTI) के तहत यहां की जानकारी मांगी गई तो सतना के एसडीएम (SDM) एवं मंदिर के प्रशासक धर्मेन्द्र मिश्रा ने जानकारी देने से इंकार कर दिया। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि मंदिर आरटीआई कानून के दायरे से बाहर है, क्योंकि देवी की मूर्ति को अवयस्क माना गया है कलेक्टर उसका संरक्षक होता है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि शासन इसके नियंत्रक हैं। राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए एसडीएम के आदेश को अवैध बताते हुए स्पष्ट किया कि मां शारदा देवी मंदिर अधिनियम 2002 के अधीन होने से मंदिर प्रबंध समिति आरटीआई एक्ट के दायरे में आती है। साथ ही एसडीएम पर 25 हजार रुपए के जुर्माना का नोटिस थमाते हुए निर्देश दिया है कि आरटीआई में जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
मंदिर में काहे का पर्दा, प्रशासक पर सूचना आयुक्त ने दिया जुर्माना का नोटिस
मंदिर में काहे का पर्दा, प्रशासक पर सूचना आयुक्त ने दिया जुर्माना का नोटिस
राज्य सूचना आयुक्त सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश महाकाल अधिनियम 2002 एवं खजराना गणेश मंदिर अधिनियम 2003 के लागू होने से भी इन मंदिरों की जानकारी भी आरटीआई एक्ट के तहत दी जाती रही है। सूचना आयुक्त ने इस बात पर नाराजगी जताई की एसडीएम मंदिर प्रबंध समिति को एक निजी संपत्ति के रूप में संचालित कर रहे हैं जबकि प्रशासक के रूप में एसडीएम का दायित्व शासन प्रशासन के हितों को सर्वोपरि रखते हुए प्रबंध समिति के कार्यों में विधि सम्मत पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने की है।
आयुक्त सिंह ने यह भी साफ किया कि मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था होने के चलते इसे किसी एक निजी संस्था या व्यक्ति विशेष की निजी संस्था के रूप में नहीं देखा जा सकता है मंदिर में स्थापित सभी देवी देवताओं पर सभी श्रद्धालुओं का समान अधिकार है और जो विषय आम जन की आस्था का हो वहां भ्रष्टाचार या नियमों की अवहेलना करते हुए गैरकानूनी कार्यो की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए ऐसी स्थिति में मंदिर के संचालन से संबंधित जानकारी व्यापक लोकहित में पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखनी चाहिए ताकि मंदिर प्रबंध समिति की कार्यप्रणाली पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार निरोधी बन सके।

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