खाता ही खाली नहीं कर रहे, बल्कि कर्जदार भी बना रहे साइबर ठग

बैंक खाते में जमा 10 लाख रुपए, ओवरड्रॉफ्ट कर निकाल लिए 50 लाख, मध्यम उद्योगों का डाटा चोरी कर बना रहे शिकार

 

By: Sumeet Pandey

Published: 04 Apr 2019, 06:06 AM IST

केस - एक
सोयाबीन कारोबारी पंकज शाह की फर्म महाकाली के दो खातों में यूं तो कम राशि ही जमा थी, लेकिन उनकी सीसी लिमिट करीब 10 करोड़ रुपए थी। ठगों ने लिमिट का पता कर दोनों खातों से कुल एक करोड़ 50 लाख की राशि पार कर दी। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से एक करोड़ की लिमिट बंधी होने के कारण पूरी लिमिट नहीं निकली।

केस- दो
पुराने शहर के फर्नीचर व्यवसायी आरएस चौहान केबैंक एकाउंट से 49 लाख रुपए अवैध तरीके से आरटीजीएस करके निकाल लिए गए। चौहान के खाते में 50 लाख के ओवरड्रॉफ्ट की सुविधा थी। ठगों न केवल चौहान के खातों के डिटेल और खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर पता किया, बल्कि लिमिट की राशि भी पता कर ठगी की।

भोपाल. साइबर ठग सिर्फ आपका एकाउंट ही साफ नहीं कर सकते, बल्कि उससे ज्यादा रकम उड़ाकर आपको वर्षों के लिए कर्जदार भी बना सकते हैं। चौंकिए मत, शातिर ठगों ने इसे अंजाम भी देना शुरू कर दिया है। साइबर ठगों का नया निशाना नए और मध्यम दर्जे के उद्योगपति हैं, जिनके एकाउंट में जमा राशि कुछ लाख रुपए की हो, लेकिन एकाउंट की लिमिट (ओवरड्रॉफ्ट सीमा) करोड़ों में होती है। उद्योगों के विस्तार के आधार पर मिली इस सुविधा की ओर ध्यान हटने से कई शिकार मेहनत की कमाई के लाखों गंवाने के साथ भविष्य के लिए लाखों के कर्जदार बन रहे हैं।

कैसे मिल रही गोपनीय जानकारी

अक्सर देखने में आता है कि बैंक खातों से रुपए उड़ाने वाले शातिर ठगों तक एकाउंट और उससे जुड़े मोबाइल नंबर की डिटेल होती है, जिसके आधार पर डुप्लीकेट सिम जारी कराकर रुपए निकाल लेते हैं, लेकिन बड़ी ठगी के नए तरीकों में ठगों को न केवल एकाउंट में जमा राशि का पता होता है, बल्कि उन्हें खाताधारक को बैंक की ओर से उपलब्ध कराई गई लिमिट की जानकारी भी होती है। ओवरड्रॉफ्ट लिमिट का पता करके ठग न केवल उद्योगपतियों के खातों में जमा राशि बल्कि निकाली जाने वाली अधिकतम सीमा तक के रुपए साफ कर देते हैं।

 

ऐसे करें बचाव

- यदि बैंक एकाउंट में जमा राशि से अधिक की लिमिट है, तो खाताधारक तय कर सकता है कि इस लिमिट में से कितने रुपयों का ट्रांजेक्शन ऑनलाइन हो सकता है।

- ऑनलाइन लिमिट सेट करके खतरे को कम किया जा सकता है। एकाउंट में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए रजिस्टर्ड सिम का भी विशेष ध्यान रखें। सिम अचानक बंद हो तो एकाउंट ब्लॉक करा दें।

 

साइबर ठगों ने कुछ हजार रुपयों के बजाए उसी प्रक्रिया से लाखों से करोड़ों रुपए तक उड़ा लेने का रास्ता अपनाना शुरू कर दिया है। ठग स्टार्टअप और एमएसएमई इंडस्ट्री को निशाना बना रहे हैं। बड़ी कम्पनियां जहां अपने बैंकिंग सिस्टम को कई स्तर पर सुरक्षित करती हैं, वहीं नए कारोबारी युवा एवं मध्यम दर्जे के उद्योग के संचालकों का सुरक्षा पर कम ध्यान होता है, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। सभी को कई स्तर की सुविधा और सर्तकता की जरूरत है।

यशदीप चतुर्वेदी, साइबर लॉ एक्सपर्ट

Sumeet Pandey Desk
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