सिर्फ 7 सेकंड में आपके खाते से पैसा निकाल लेता है ये साइबर ठग, जरा बचके...

झारखंड में बैठे हाईटेक  ठग मोबाइल नंबर पर फोन कर ओटीपी हासिल कर खाते से पैसे निकाल लते हैं। इसमें पूरा गिरोह लिप्त है। 

भोपाल. राजधानी भोपाल की पुलिस के साइबर सेल ने ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) पूछकर ठगी करने वालों से दो युवकों के पैसे वापस दिलवाए हैं। जांच करते हुए संबंधित एप्लीकेशन तक पहुंची पुलिस ने करीब 50 हजार रु दो फरियादियों के बैंक खातों में वापस डलवा दिए। झारखंड में बैठा गिरोह इस तरह की हाईटेक ठगी कर रहा है। यह जानकारी एआईजी साइबर सेल शैलेन्द्र सिंह चौहान ने दी। चौहान ने बताया कि राजीव नगर, नारियल खेड़ा निवासी मोहम्मद नदीम से पिछले दिनों फोन पर खुद को बैंक अधिकारी बताकर एक व्यक्ति ने ओटीपी ले लिया। इसके बाद नदीम के खाते से 33,416 रुपए निकल गए। ठगी का पता लगते ही नदीम ने साइबर पुलिस को सूचना दी। ऐसा ही कुछ नया बसेरा कोटरा सुल्तानाबाद निवासी मुकेश लोंगरे के साथ हुआ। लोंगरे अकाउंट से बदमाशों ने 15,500 रुपए निकाल लिए थे।


यह भी पढ़ें: इस शिवलिंग की हिंदू-मुस्लिम दोनों करते हैं पूजा, अनोखी है यहां आस्था


ऑनलाइन खरीदी
एआईजी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि एम-पैसा और पेयू मनी नाम की एप्लीकेशन के माध्यम से अकाउंट से पैसे निकालने गए थे। पुलिस ने संबंधित कंपनियों से संपर्क कर दोनों के खातों में पैसे वापस डलवाए। झारखंड में बैठे हाईटेक  ठग मोबाइल नंबर पर फोन कर ओटीपी हासिल कर खाते से पैसे निकाल लते हैं। इसमें पूरा गिरोह लिप्त है। वे ऑनलाइन खरीदारी करते हैं।


यह भी पढ़ें: पैसे खर्च करने में इतने कंजूस क्यों हैं CM शिवराज और उनके मंत्री? पढ़ें ये रिपोर्ट


ठगी की शिकायत तुरंत करें, बच जाएंगे पैसे
यदि ठग आपका वन टाइम पासवर्ड पूछकर ठगी की वारदात करता है तो तुरंत इसकी शिकायत साइबर सेल में करें। सेल संबंधित कंपनी के जरिए बुकिंग को कैसिंल करा देगी। दो से तीन दिन में रकम वापस खाते में आ जाएगी। साइबर सेल हर साल करीब 15 लाख रुपए वापस करवाती है। लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती। ऐसे में वे अपनी रकम गवां बैठते हैं। बैंक अधिकारी बनकर फोन पर ठगी के प्रदेश में हर साल तीन हजार से ज्यादा मामले सामने आते हैं। ये रकम करीब तीन करोड़ रुपए तक होती है। ठग अपने शिकार से एटीएम कार्ड नम्बर, पिन नम्बर पूछ लेते हैं। फिर पीडि़त को झांसे में लेकर मोबाइल पर आने वाला ओटीपी नम्बर भी हासिल कर लेते हैं। चूंकि रकम सीधे बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने में पकड़े जाने का खतरा रहता है। इसलिए ठगी की नब्बे प्रतिशत घटनाओं में सायबर ठग ऑनलाइन खरीदी और वॉलेट रिचार्ज करते हैं।


यह भी पढ़ें: 158 साल पहले यहां मारे गए थे 7 अंग्रेज सैन्य अफसर, आज भी बनी हैं उनकी कब्रें


इस तरह करें बचाव
ठगी होने पर सायबर सेल में शिकायत करने पर सेल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के जरिए ये पता कर लेती है कि किस कंपनी के जरिए ऑनलाइन खरीदी हुई है। उस कंपनी को खरीदी को संदिग्ध वारदात बताकर ट्रांजेक्शन पर रोक लगा दी जाती है। कंपनी डिलेवरी कैसिंल कर रकम वापस जिस एकाउंट से पैसा डिडेक्ट हुआ है, उस खाते में ट्रांसफर कर देती है। सिर्फ दिल्ली व मुंबई जैसे शहर जहां कुछ ही घंटों में डिलेवरी हो जाती है। वहां ठगों को रोक पाना मुश्किल होता है। अधिकांश वारदातों पीडि़त सेल जाने की बजाए बैंक जाता है। बैंक इन मामलों में सीधे अपने ग्राहक की कोई मदद नहीं कर पाते। दो या तीन बाद पीडि़त जब सेल पहुंचता है तब तक ट्रांजेक्शन हो चुका होता है।


यह भी पढ़ें: LIVE मर्डर: भीड़ देखती रही और जेबकतरों ने किसान को चाकुओं से गोद डाला


वॉलेट से रोकना मुश्किल
ई-वॉलेट में दस हजार से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर ग्राहक को केवायसी फॉर्म जमा करना होता है। इसलिए ठग वॉलेट में 9999 रुपए तक ई-वॉलेट में ट्रांसफर कर इसे खातों में डाल लेते हैं। यदि रकम वॉलेट से ट्रांसफर नहीं होती है तो पुलिस इसे भी पीडि़त के खाते में डलवा देती है।
Show More
Brajendra Sarvariya
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned