बैंकों में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदलकर निकाले लाखों रुपए, सायबर पुलिस ने किया गिरफ्तार

बैंकों में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदलकर निकाले लाखों रुपए, सायबर पुलिस ने किया गिरफ्तार

Radheshyam Dangi | Publish: Jun, 25 2019 07:44:32 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

रजिस्टर्ड सिम बंद करके फर्जी तरीके से नई सिम निकाल ली गई थी

भोपाल। सायबर पुलिस ( cyber police ) ने व्यापारिक फर्मों के बैंक खातों को हैक (bank hackers) कर , बैंकों में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की सिम स्वेप करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। दरअसल, गुलमोहर निवासी, फरियादी मुकेश कावरे पिता रमाकांत कावरे ने सायबर पुलिस (cyber police ) में शिकायत की थी कि उनकी फर्म के बैंक खाते (bank account ) में रजिस्टर्ड सिम बंद करके फर्जी तरीके से नई सिम निकाल ली गई। और फर्म के बैंक खाते हैक कर करीब 16.50 लाख रूपये निकाल लिये गये।

 

हैक कर पैसे ट्रांसफर करते थे
सायबर पुलिस ने इसकी विवेचना की तो पता चला विभिन्न संदिग्ध खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया है। विशेष पुलिस महानिदेशक, सायबर पुरुषोत्तम शर्मा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, सायबर राजेश गुप्ता ने बताया कि नाइजीरियन हैकर्स, ट्रोजन तकनीक की मदद से खाते हैक कर पैसे ट्रांसफर करते थे।


मोटा लेनदेन होने से विभिन्न फर्म के बैंक खातो को बनाया जाता है निशाना। गिरोह के सदस्य एवं संदिग्ध खाताधारक अनुराग प्रकाश सालवेकर पिता प्रकाश सालवेकर के ईस्‍ट मुंबई स्थित से गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक पूछताछ पर पता चला कि ठग गिरोह का अन्य सदस्य विनोद मिश्रा पिता सोभनाथ मिश्रा भी इसमें लिप्त है। वह विनोद मिश्रा के अंडर काम करता है जो ठगी की रकम डालने के लिये फर्जी बैंक खाता गिरोह को उपलब्ध कराता है।

 

news

आधी रकम कमीशन के रुप में मिलते है
बैंक खाते में जितने पैसे आयेगे उसमें से आधी रकम कमीशन के रुप में मिलते है आरोपी के सभी फर्जी पतों पर खोले गये विभिन्न खातों को फ्रीज कराया गया तथा सभी इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों को आरोपी के कब्जे से जप्त किया गया है ।

 

ऐसे करते थे वारदात

- फर्म का बैंक खाता हैक कर, बैंक में रजिस्टर्ड सिम बंद करवाते थे। फर्जी दस्तावेज से नई सिम निकालते थे।

- नाइजीरियन हैकर्स द्वारा ट्रोजन की मदद से हैक किये जाते है खाते ।
- मिलते जुलते फेक पेज पर करा लेते है लॉगिन।

- फर्जी नाम/पता वाले बैंक खातों में ट्रांस्फर की जाती है राशि ।
- हैकर टारगेट किये जाने वाले खाते की सतत निगरानी रखते थे और बैंलेंस की भी जानकारी रखते थे।

- बीएसएनएल के अधिकारियों की सिम आंबटन में गडबडी आयी सामने।

 

तीन चरणो में करते थे ठगी


- हैकर्स द्वारा फिशिंक या ट्रोजन के द्वारा आवेदक के बैंक खाते के लॉगिन पासवार्ड आदि जानकारी चोरी की जाती है यह कार्य नाइजीरियन हैकर्स द्वारा किया जाता है ।

- आवेदक के हैक्ड बैक खाते की गोपनीय जानकारी भारत के एजेन्ट को दी जाती है जिससे मिलते जुलते के फेक पेज हेतु बैक खाते पर रजिस्टर्ड लॉगिन को फर्जी दस्तावेज के आधार पर जारी कराई जा सके ।

- भारतीय एजेंट टीम द्वारा आवेदक के हैक्ड बैक खाते की जानकारी के आधार पर रजिस्टर्ड सिम को फर्जी दस्तावेज के आधार पर कंपनी से
दूसरी सिम जारी कराते थे।

 

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned