कोरोना के बाद बढ़ी मछली की डिमांड, स्व सहायता समूह की 36 हजार महिलाओं को रोजगार देने पंचायतों के 20 तालाबों में पाली जाएंगी मछलियां

- जिल पंचायत इसके लिए स्व सहायता समूहों का चयन कर ट्रेनिंग दिला रहा है, फंदा और बैरसिया ब्लॉक के 12 तालाब मछली पालन और 8 सिंघाड़े और मखाने क लिए चिन्हित

भोपाल. कोरोना के दौरान में मछली पालन और खपत अचानक काफी बढ़ गई है। इससे आय भी अच्छी होने लगी है। इसे देखते हुए जिले की 187 पंचायतों के 12 तालाबों में मछली पालन शुरू किया जा रहा है। वहीं 8 तालाबों में सिंघाड़े की खेती होगी। जहां उथले तालाब हैं वहां मखाने की खेती भी की जाएगी। जिला पंचायत विभाग ने अपने 3600 स्व सहायता समूहों से जुड़ी 36 हजार महिलाओं को रोजगार और उनकी आय बढ़ाने के लिए ये योजना बनाई है। जिला प्रशासन के नेतृत्व में जिला पंचायत इस काम को कर रहे हैं। इससे होने वाली आय का हिस्सा स्व सहायता समूह औश्र जिला पंचायत को जाएगा। इसमें भोई समाज की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जो वर्षों से इस काम को करती चली आ रही हैं। पंचायतों में इस कदम से अवैध मछली पालन और अवैध ठेकेदारी प्रथा भी खत्म हो जाएगी। अभी पंचायतों के तालाबों आए दिन मछली पकडऩे को लेकर ठेकेदारों के बीच विवाद की स्थिति बनती है।

मछली पालन के साथ बैरसिया के 8 तालाबों में सिंघाड़े और मखाने की खेती होगी। ये काम भी इसी के साथ शुरू होगा। मछली, सिंघाड़ा और मखाने को यहां की खपत के अनुसार बाजार में बेचकर बाहर भी भेजा जाएगा। दरअसल कोरोना के दौरान मछली की खपत में एक दम से तेजी आई है। वर्तमान में ही शहर के अलग-अलग इलाकों में 700 से 800 छोटे बड़े मछली विक्रेता भारी मात्रा में मछली बेच लेते हैं। जिसका हिसाब लगाना संभव नहीं है। इसके अलावा बाहर से कुछ वैरायटी यहां आती हैं तो काफी मछली बाहर जाती है। बड़ा तालाब में ही मत्स विभाग केज लगवाकर मछली पालन करा रहा है।

वर्षों से चले आ रहे विवाद की स्थिति होगी खत्म
जिन तालाबों को लिया जा रहा है वर्तमान में उन तालाबों में अवैध रूप से मछली पकड़ी जाती हैं। इसमें आपसी विवाद भी होते हैं। इधर शहर के तालाबों में मछली पालन के दौरान उसमें कई प्रकार की दवाएं और उन्हें पकडऩे के लिए खतरनाक केमिकल के लड्डू डाले जाते हैं। ऐसे एक नहीं कई मामले संज्ञान में आ चुके हैं। दो केस एनजीटी में भी चल रहे हैं। रामसर साइट की धरोहर छोटा तालाब को बचाने के लिए आज नहीं तो भविष्य में एनजीटी या प्रशासन को यहां या तो केमिकल डालने पर रोक लगानी होगी, वर्ना मछली पालन ही बंद करना होगा।

इस प्रक्रिया के तहत होगा काम
- सबसे पहले फंदा के 3 तालाब और बैरसिया के 9 तालाबों में मछली पालन शुरू होगा।

- तालाबों का रेनोबेशन और मछली पालन के लिए जरूरी इंतजाम जिला पंचायत को करना है।
- स्व सहायता समूहों को मछली पालन की ट्रेनिंग भी मत्स्य विभाग देगा, दाना और किस वैरायटी मछली की डिमांड

ज्यादा है।
- ट्रेनिंग के बाद क्विंटल के हिसाब से मछली बाजार में बिक्री के लिए जाया करेगी। इससे समूहों की आमंदनी अच्छी हो जाएगी।

धीरे-धीरे मत्स्य हब विकसित करने की प्लानिंग

आने वाले समय में गांव भी नगर निगम सीमा में शामिल हो जाएंगे। ऐसे में यहां के छोटे बड़े 80 तालाब और छोटे स्थानों में मछली पालन को ही बढ़ावा दिया जाएगा। वर्तमान में कई लोगों ने खेती बंद कर खेत में बडे टब लगाकर उनमें मछली पालन शुरू करा दिया है।
वर्जन--

मछली पालन को बढ़ावा देने के साथ स्व सहायता समूहों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पंचायतों के तालाबों में मछली पालन शुरू किया जाएगा। इसके लिए समूहों को ट्रेनिंग दी जाएगी। तालाब का चयन विभाग कर रहे हैं।
अविनाश लवानिया, कलेक्टर

प्रवेंद्र तोमर Reporting
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