बुंदेलखंड के लोक गायक देशराज पटेरिया का निधन, सीएम ने जाताया दुख

पूर्व मंत्री पी सी शर्मा ने कहा कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति

By: Hitendra Sharma

Published: 05 Sep 2020, 11:34 AM IST

भोपाल. बुंदेलखंड के मशहूर लोकगायक देशराज पटेरिया का निधन हो गया। पटेरिया का निधन दिल का दौरा पड़ाने से हुआ है। पटेरिया ने बुंदेलखंड लोकगीतों को नये मुकाम तक पहुंचाया । उन्होंने आल्हा उदल और हरदौल की कथा सहित बुंदेली लोकगीतों को पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। देशराज पटेरिया के निधन के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ट्वीट कर दुख जताया है। और पटेरिया को दुनियाभर में चाहने वालों में शोक की लहर है।

एक सितारा खो दिया

सीएम शिवराज ने पटेरिया के निधन पर कहा कि अपनी अनूठी गायकी से बुंदेली लोकगीतों में नये प्राण फूंक देने वाले श्री देशराज पटेरिया जी के रूप में आज संगीत जगत ने अपना एक सितारा खो दिया। वो किसान की लली... मगरे पर बोल रहा था...जैसे आपके सैकड़ों गीत संगीत की अमूल्य निधि हैं। आप हम सबकी स्मृतियों में सदैव बने रहेंगे।

एक अपूरणीय क्षति

पूर्व मंत्री पी सी शर्मा ने कहा कला बुंदेलखंड के मशहूर , लोकगीतों के सम्राट , गायक देशराज पटेरिया जी का दिल का दौरा पड़ने से आकस्मिक निधन होने की खबर से आज मन व्यथित हो गया है। यह प्रदेश के कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। स्वर्गीय श्री पटैरिया जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।

 

कीर्तन गायक से बने लोकगीत गायक
पटैरिया का जन्म छतरपुर जिले नौगांव कस्बे के पास तिटानी गांव में हुआ था। वे जब 18 साल के थे तब से तो कीर्तन मंडलियों में भाग लेकर गांव-गांव गायन करने जाते थे। गायन कला के साथ-साथ साइंस के छात्र में प्रथम श्रेणी हायर सेकंडरी पास की। गायन कला में उनकी रूचि जागती गई और वे कीर्तनकार से लोक गीतकार सबसे पहले 1976 में उन्होंने लोकगीत गाना शुरू किया।

बताते है कि तब लोगों के मनोरंजन के लिए लाउण्ड स्पीकर भी आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे। लोग चौपाल बनाकर बैठते थे, तब लोकगीत की प्रस्तुति दी जाती थी। उनका कहना है कि अमरदान मेरे गुरू थे उन्ही से मैंने लोकगीत की गायन कला सीखी।

श्रृंगार एवं भक्ति रस से किया दिलों पर राज
लोक गीतकार पटैरिया का कहना है कि मैंने अपने गायन में कभी अश्लीलता नहीं आने दी। हमेशा श्रृंगार, भक्ति एवं वीर रस को प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त जीजा-साली के गीतों को भी गाया। पटैरिया का सबसे पसंदीदा लोकगीत है--वो किसान की लली, खेत खलियान को चली... मगरे पर बोल रहा था कऊआ लगत तेरे मायके से आ गए लिबऊआ.. एसे सैकंडो गीत है जो आज भी लोगों को मुंह जुवानी याद है। लंबे लोकगीत गायन का अनुभव को वे अपने साथ अपने वाली पीढ़ी को गुरू के रूप में दे दे दिया। फिल्मीगीत गायक में उनके आदर्श मुकेश कुमार थे ।

Hitendra Sharma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned