संभागायुक्त के निर्देशों के बाद भी दूसरे जिले से रैफर होकर आ रहे कोविड मरीजों को नहीं मिल रहे बेड

- भोपाल का लोड कम करने के लिए राजगढ़ में 150 कोविड के बेड हैं, विदिशा में 200 बेड का कोविड सेंटर शुरू होगा

भोपाल. कोरोना के बढ़ते केसों के बीच अब अस्पतालों में मरीजों को बेड नहीं मिल रहे। स्थानीय मरीजों को अस्पताल में कम ही भर्ती किया जा रहा है। सोर्स सिफारिश के बाद ही बेड नसीब हो पाता है। बाहर जिलों से आने वाले कोविड के गंभीर मरीजों की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। उनको एक अस्पताल से दूसरे में भेजा जा रहा है। इसके बाद काफी प्रयास करने पर भर्ती भी कर लिया जाता है तो इलाज नहीं मिल रहा। हमीदिया अस्पताल को छोड़कर कहीं भी मरीज से वीडियो कॉल कराने की व्यवस्था नहीं है। जबकि 17 अगस्त को संभागायुक्त ने बैठक कर आस-पास 11 जिलों से रैफर होकर आ रहे कोविड के गंभीर मरीजों को लेकर कई निर्देश दिए हैं, जिन पर अधिकारी अमल नहीं कर रहे।

केस एक-

होशंगाबाद से रैफर होकर आए कोविड के गंभीर पेशेंट को पहले निजी अस्पताल फिर हमीदिया लेकर गए, इसके बाद रात को ही उन्हें चिरायु भेजा। वहां उन्हें एम्स रैफर कर दिया। एम्स में रात तीन बजे तक कोई एंट्री नहीं मिली। मरीज की हालत गंभीर बनी रही। एम्बुलेंस में भी ऑक्सीजन की कमी के चलते परिजनों की सांसे ऊपर नीचे होने लगी। किसी तरह फोन कराने के बाद सुबह उनको भर्ती किया गया, अब उनकी रिपोर्ट के बारे में कोई बताने तैयार नहीं है।

केस दो-

इसी प्रकार सीहोर से रैफर होकर आए एक महिला मरीज को पहले चिरायु ले गए। उसके बाद उन्हें हमीदिया भेजा। एम्स के चक्कर काटे, इसके बाद उन्होंने निजी अस्पताल तक का रुख कर लिया, लेकिन कोई एडमिट करने को तैयार नहीं। यहां भी सोर्स सिफारिश के बाद उनको आठ घंटे बाद हमीदिया में पलंग मिला। कोविड मरीजों को ही अब एडमिट करने में समस्या हो रही है।

17 अगस्त को ये दिए थे निर्देश

संभागायुक्त कवींद्र कियावत ने प्रदेश के अन्य जिलों से भोपाल रेफर होकर आने वाले कोरोना मरीजों के संबंध में उन जिलों के सीएमएचओ और भोपाल के डॉक्टरों का नेटवर्क बनाने के निर्देश दिए थे। जिसमें एक नोडल अधिकारी बनाने की बात कही है। ये निर्देश थे

- भोपाल में आस-पास के 11 जिलों के मरीज रैफर होकर आते हैं, इसके लिए यहां नोडल अधिकारी तैनात किया जाए। जो संबंधित जिले के सीएमएचओ से रैफर होकर आ रहे मरीज के लक्षण पर पहले से बातचीत कर ले।

- मरीज के भोपाल पहुंचने से पहले नोडल अधिकारी को सूचना दी जाएगी, यहां टीम, एम्बुलेंस तैयार रहेंगी।

- रेफरल प्रोटोकाल का पालन किया जाए। जिससे डेथ रेट में कमी लाई जा सके। जबकि बाहर के मरीज ज्यादा मर रहे हैं।

- केस शीट की स्टडी की जाए ताकि मरीज की पूरी कोविड हिस्ट्री पता कर बेहतर उपचार किया जा सके।

लोड कम करने राजगढ़ में 150 बिस्तरों का कोविड सेंटर

आस-पास जिलों से आ रहे कोविड के गंभीर मरीजों का लोड कम करने के लिए राजगढ़ जिला चिकित्सालय में 150 बेड का कोविड केयर सेंटर तैयार है। मरीजों को यहां भर्ती किया जा रहा है। लेकिन जैसे ही कोई मामला गंभीर दिखा तो उसे तत्काल भोपाल रैफर कर देते हैं। इसी प्रकार विदिशा में 200 बेड का कोविड केयर सेंटर जल्द शुरू किया जाएगा। संभागायुक्त ने बताया कि इसकी तैयारियां अंतिम चरण में है। इससे भोपाल का लोड कम होगा।

वर्जन

बाहर जिलों से आ रहे मरीजों को भर्ती करने में कोई परेशानी है तो मैं इसकी मॉनीटरिंग करूंगा, भोपाल पर लोड कम करने के लिए राजगढ़ में कोविड सेंटर चल रहा है। विदिशा में 200 बिस्तर का एक और कोविड सेंटर तैयार किया जा रहा है।

कवींद्र कियावत, संभागायुक्त

प्रवेंद्र तोमर Reporting
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