इशारों में बताती हैं कोविड से बचाव के तरीके, वायरल हो रहे दीप्ति पटवा के वीडियो

dipti patwa Sign language videos: मूक बधिक बच्चों को साइन लैग्वेंज की मदद से दीप्ति सिखा रहीं कोरोना से बचाव के तरीके...।

By: Manish Gite

Updated: 09 Jun 2021, 11:31 AM IST

शकील खान

भोपाल। जो बच्चे सुन और बोल नहीं सकते है उन तक कोरोना से बचाव के तरीके को पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। शहर की दीप्ति साइन लैग्वेंज (sign language) के जरिए ऐसे बच्चों का सहारा बन रही हैं। कोरोना से बचाव के तरीकों से लेकर वैक्सीनेशन के बारे में बताने इन्होंने कई वीडियो ऐसे बच्चों के लिए इन्होंने तैयार किए हैं।

प्रदेश में करीब 35 हजार ऐसे बच्चे हैं जो सुन और बोल नहीं सकते हैं। साइन लैग्वेंज की मदद से इन तक वैक्सीनेशन का संदेश पहुंचाया जा रहा है। इसमें महारत रखने वाली दीप्ति पटवा इन बच्चों के लिए काम कर रही हैं। कोविड से बचाव को लेकर इनके बनाए वीडियो सोशल मीडिया पर हैं।

दीप्ति (dipti patwa) ने बताया कि ने 16 साल पहले साइन लैग्वेंज (Sign language videos) की शुरुआत की थी। ये बताती हैं कि परिवार में भाई को परेशानी थी। वह सुन और बोल नहीं सकता। ऐसे में उसकी बात समझना और अपनी बात समझाना मुश्किल होता था। तभी से स्पेशल एजुकेटर के कोर्स शुरू किया। घर में बाकी लोगों को यह लैग्वेंज सिखाई। ऐसे कई और बच्चों की परेशानी को देखते हुए मूक बधिक बच्चों के लिए क्लासेस भी इन्होंने शुरू कर रखी हैं। इनकी मदद के लिए निशुल्क क्लास लेती थी। एक्सपर्ट के तौर पर कई आयोजनों में मूक बधिक (deaf and dumb) बच्चों और लोगों के बीच एक कम्युनिकेटर की भूमिका निभा रही हैं।

 

आयोजनों में कम्युनिकेटर के रूप में भागीदारी

इन्होंने बताया कि कई ऐसे आयोजनों में भागीदारी रहती है। मूक बधिर बच्चों को कोई भी बताने के लिए उन्हें बुलाया जाता है। बीते कई सालों से काउंसलिंग में भी मदद कर रही हैं। पुलिस में कई मामले पर ऐसे लोगों की मदद के लिए वे जाती हैं। उमंग संस्था के जरिए ये भागीदार बनती हैं। इन्होंने बताया कि जिले में करीब आठ हजार ऐसे बच्चे हैं जो सुन और बोल नहीं सकते हैं।

 

मिल चुके कई अवार्ड

दीप्ति बताती हैं कि वे पिछले सोलह सालों से इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। किसी विवाद को सुलझाने में कम्यूनीकेटर के तौर पर काम करती हैं। यह एक अहम भूमिका होती है। बिना भाषा के किसी को केवल हावभाव से बात समझाना मुख्य काम होता है। शासन की ओर से इन्हें गुरूनानक अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा कई संस्थाओं के जरिए पुरस्कृत भी किया गया।

Manish Gite
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