एबीडी प्रोजेक्ट में 90 एकड़ पर विवाद, तीन साल बाद भी दिक्कत बरकरार

स्मार्टसिटी: प्रोजेक्ट तैयार कराने वाले तत्कालीन विधायक-मंत्री उमाशंकर गुप्ता, अब इसे डि-नोटिफाई कराना चाहते हैं

By: Rohit verma

Published: 11 Oct 2020, 11:17 PM IST

भोपाल. स्मार्टसिटी टीटी नगर एरिया बेस्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की 342 एकड़ जमीन में 90 एकड़ निजी जमीन रही है और यही विवाद की वजह बन रही। तीन साल बाद भी इस विवाद को सुलझाया नहीं जा सका है। प्रोजेक्ट तैयार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तत्कालीन विधायक-मंत्री उमाशंकर गुप्ता अब इसे रद्द कराने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने पांच अक्टूबर को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट डि-नोटिफाई करने की मांग की है।

राजस्व विभाग की नहीं मानी तो विवादित हुआ प्रोजेक्ट
11 अप्रेल 2017 को स्मार्टसिटी के एबीडी एरिया नाथ व साउथ टीटी नगर भोपाल की 342 एकड़ जमीन स्मार्टसिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन के नाम की गई। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा मंत्री परिषद संक्षेपिका में राजस्व विभाग का मत था कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रस्तावित जमीन के खसरों का भौतिक सत्यापन किया जाए, ताकि किसी निजी जमीन पर असर न हो। 30 अगस्त 2018 को कलेक्टर को ये बात राजस्व विभाग ने कही। लेकिन इसे अनसुना कर दिया और अब विवाद बन रहा है।

प्रोजेक्ट तैयार किया, इनपर नहीं दिया ध्यान
गुरुद्वारा, आर्य समान मंदिर, एमपी/एमएलए क्वार्टर, काटजू अस्पताल, मॉडल स्कूल परिसर, जैन मंदिर टीटी नगर, हनुमान मंदिर जवाहर चौक, बंगाली मंदिर, कौरव समाज भवन, स्टैंडर्ड पब्लिक स्कूल, प्रियदर्शिनी भवन व नगर निगम की पहले से विकसित विभिन्न बाजार के साथ जमीन आवंटन हुआ। स्मार्टसिटी का प्लान इन जमीनों पर कब्जा दर्शाते हुए तैयार हुआ।

ये सुझाव भी ताकि बचें दुकान और मकान
रोशनपुरा-रंगमहल से जवाहर चौक-डिपो चौराहा मार्ग की चौड़ाई 45 मीटर से घटाकर 30 मीटर करना।
ओल्ड एमएलए से न्यू एमएलए क्वार्टर की समानांतर रोड 12 मीटर से बढ़ाकर 30 मीटर प्लान करें।
बुलेवार्ड स्ट्रीट के समानांतर 30 मीटर सड़क को गुरुद्वारे के पास तक ही तय किया जाए, ताकि ओल्ड एमएलए क्वार्टर प्रभावित न हों।
स्टेडियम, हाट बाजार व सिग्रेचर टॉवर के लिए काटजू अस्पताल की सड़क 30 मीटर चौड़ी प्लान की जाए।
जवाहर चौक से गुमठी व्यापारियों को मार्केट के पास प्लॉट देकर विस्थापित किया जाए।

अब ये सवाल भी
यदि शुरुआत में भौतिक सत्यापन हो जाता तो दिक्कत नहीं आती।
तत्कालीन अफसरों पर प्लान छुपाने की आरोप है, लेकिन तत्कालीन नेताओं-विधायक ने प्लान पूरी तरह समझा क्यों नहीं?
जमीन पर काम शुरू होने के तीन साल बाद अचानक निजी जमीन का मामला कैसे सामने आया?
दुकानदारों के विस्थापन की योजना पहले तैयार क्यों नहीं की?
संबंधित अफसरों पर प्लान छुपाने का आरोप लगा रहे हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं कराई जाती?
नोट- एबीडी निर्माण में इस तरह के तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।

ये प्रभावित अब क्या बोल रहे
एबीडी एरिया क्षेत्र के तत्कालीन पार्षद सरोज राकेश जैन का कहना है कि तत्कालीन अफसरों ने पूरा प्लान नहीं बताया, जिससे ये स्थिति बनी। भाजपा नेता राकेश अनुपम जैन का सीधा आरोप है कि अफसरों ने अंधेरे में रखा है।

हमने शासन से प्लान को डि-नोटिफाई करने की मांग की है। प्लान के शुरुआत में जो तय था, बाद में उसमें काफी बदलाव हुए। निजी खसरों का सत्यापन और उसके अनुसार प्लानिंग जरूरी है।
उमाशंकर गुप्ता, तत्कालीन विधायक-मंत्री

हमने पहले ही स्पष्ट किया हुआ है कि यहां पर्यावरण से लेकर प्लानिंग तक जो भी दिक्कतें हैं निराकरण किया जाएगा। हम लगातार इसपर चर्चा कर रहे हैं और जो भी तथ्य सामन आएंगे, उसके अनुसार ही काम करेंगे।
भूपेंद्र सिंह, मंत्री शहरी आवास एवं विकास

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