बैंकों के सोशल मीडिया अकाउंट के उपयोग में चूक पड़ सकती है भारी

थोड़ी सी सावधानी से बच सकती है आपकी पसीने का कमाई। फर्जी वेबसाइट और मोबाइल से बचें, अचानक सिम बंद तो हो जाएं सावधान।

By: Hitendra Sharma

Published: 13 Sep 2021, 01:30 PM IST

भोपाल. ऑनलाइन बैंकिंग का चलन तेजी से बढ़ने में ठगी के लिए धोखेबाज नए-नए तरीके आजमा रहे हैं, जिसमें लोगों के खातों से बढ़ी रकम उड़ाई जा रही है। बैंकिंग फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए धोखेबाज फर्जी ऐप, हेल्पलाइन नंबर, सिम स्वैप आदि का सहारा ले रहे हैं। बैंकों के फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट ' बनाकर ग्राहकों से जानकारियां !

लेकर पैसा निकालने की घटनाएं,सामने आई हैं। अगर आप भी किसी बैंक या वित्तीय कंपनी के खाते का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो सतर्क हो जाएं। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप बोलचाल के दौरान ही अनुमान लगा सकते हैं कि कॉल कोई ठग कर रहा है, न कि बैंक कमी ।

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कोई भी बैंक कस्टमर को फोन कर मोबाइल पर आया ओटीपी नहीं पूछता। इसके ठीक उलट फ्रॉड करने वाली गैंग किसी न किसी बहाने से आपके मोबाइल पर आया ओटीपी पूछती है। शहर में इस साल अभी तक ऐसे 200 से ज्यादा मामले दर्ज हुए है।

आप फर्जी वेबसाइट से ऐसे बचें
बैंकिंग फ्रॉड करने वाले फर्जी मोबाइल ऐप का सहारा लेकर धोखेधाड़ी को अंजाम दे रहे हैं। बैंकों के मूल ऐप से मिलते जुलते ऐप बनाकर वो गूगल प्ले-स्टौर पर डाल रहे हैं। अगर कोई ग्राहक गलती से वह ऐप डाइनलोड कर अपने मोबाइल पर इंस्टॉल कर ले रहा है तो उसके जरिए वो डाटा चोरी कर उसके खाते से पैसा निकाल रहे हैं।किसी भी मोबाइल ऐप को गूगल प्ले-स्टोर से डाउनलोड करने से पहले उसके बारे में जांच करें कि उस ऐप को किसने तैयार किया है।

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अगर आपको अपने बैंक का ऐप डाउनलोड करना है, तो सबसे पहले उसे गूगल प्ले-स्टोर पर सर्च करें। इसके बाद ऐप पर क्लिक करें। उस पर क्लिक करें और उसके बाद ऑफर्ड बाय और डेवलप बाय की जांच करें। अगर ऑफर्ड बाय में आपके बैंक और डेवलपर में भी आपके ही बैंक का नाम है तो ही ऐप को डाउनलोड करें, अन्यथा नहीं। बैंक की वेबसाइट से सीधे ऐप डाउनलोड करने का लिंक प्राप्त कर सकते हैं।

अचानक सिम बंद तो हो जाएं सावधान
बैंक खाते में फर्जीवाड़ा करने के लिए इन दिनों सिम स्वैप काभी इस्तेमाल हो रहा है। इसमें बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को हैक करने के बाद बंद कर दिया जाता है। सिम क्लोनिंग के जरिए आपके नंबर के मैसेज फ्रॉड के पास आने लगते हैं और आपके खाते की रकम स्वैप कर लेते हैं।

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पूर्व एडीजी शैलेंद्र श्रीवास्तव के अनुसार आपकी सिम पर आया ओटीपी किसी को बताना ही अपराध का पहला चरण है। ओटीपी सबसे सुरक्षित तरीका होता है ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का, इसलिए इसे गोपनीय रखना चाहिए। यदि बैंक संबंधित प्रोसेस के नाम पर इसे मांगा जा रहा है, तो समझ जाएं कि आप निशाने पर आ चुके हैं। ऐसा होने पर घबराएं नहीं बल्कि कॉलर को ब्लॉक लिस्ट में डालकर सायबर सेल में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

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