300 करोड़ रुपए से जुड़े दस्तावेज दबाए, नोटिस के बाद भी नहीं दे रहे जानकारी

स्मार्ट सिटी टेंडर घोटाला-

भोपाल. मप्र के 7 शहरों की स्मार्ट सिटी के क्लाउड बेस्ड कॉमन इंटीग्रेटेड डाटा एंड डिजास्टर रिकवरी सेंटर एंड इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के 300 करोड़ रुपए के टेंडर के दस्तावेज छिपाए जा रहे हैं। इस टेंडर से तत्कालीन आयुक्त व प्रमुख सचिव व नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग और केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ आईएएस अफसर विवेक अग्रवाल और उनका बेटा वैभव अग्रवाल जुड़े हैं।

ईओडब्ल्यू ने 15 अक्टूबर को इस टेंडर में हुई आर्थिक गड़बडिय़ों और टेंडर प्रक्रिया में अपनाई गई अनियमितताओं को जांच में लिया है। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन और नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग को नोटिस देकर टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज मांगे थे, लेकिन ईओडब्ल्यू को इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है। गौरतलब है कि प्राथमिक जांच पंजीबद्ध करने के बाद ईओडब्ल्यू ने जिम्मेदारों और टेंडर प्रक्रिया में शामिल प्रबंधन को नोटिस देकर दस्तावेज मांगे थे। लेकिन अफसर, इसे बार-बार टाल रहे और कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। ईओडब्ल्यू के सूत्रों का कहना है कि गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद दस्तावेज छिपाए जा रहे हैं और इस टेंडर से जुड़े सीनियर अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। दस्तावेज नहीं मिलने के कारण जांच भी धीमी पड़ गई। यदि समय पर दस्तावेज नहीं

दिए जाते हैं तो वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर छापा भी मारा जा सकता है। हालांकि ईओडब्ल्यू को उम्मीद है कि छापे की जरुरत नहीं पड़ेगी। ईओडब्ल्यू ने स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन प्रबंधन को जांच से जुड़े दस्तावेजों की सूची सौंपकर एक सप्ताह में पेश करने के लिए कहा था, लेकिन तीन सप्ताह बाद भी कागज नहीं दिए।
बॉक्स

जांच में नहीं कर रहे सहयोग

स्मार्ट सिटी आईसीसीसी का 300 करोड़ रुपए का टेंडर जारी हुआ था। आरोप है कि अग्रवाल ने प्राइस वॉटर हाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) की सहयोगी कंपनी हेवलेट पैकर्ड इंटरप्राइजेस (एचपीई) को मप्र के 7 स्मार्ट सिटी आईसीसीसी का काम दिलवाया है। इसलिए ईओडब्ल्यू ने ''कंफ्ल्क्टि ऑफ इंट्रेस्टÓÓ मानकर प्राथमिक जांच पंजीबद्ध की है। अब ईओडब्ल्यू इस टेंडर की फाइल और टेंडर प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिकाओं की जांच कर रही है। उन्होंने आखिर कैसे इस टेंडर के लिए शर्तें में तोड़मरोड़ की गई और कैसे जिस कंपनी में वैभव अग्रवाल काम करता है, उसकी सहयोगी कंपनी को यह टेंडर दिया गया है, इसके दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, लेकिन नगरीय प्रशासन और स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन के अधिकारी इसमें सहयोग नहीं कर रहे हैं।
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हमने नगरीय प्रशासन और स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को नोटिस देकर दस्तावेज मांगे हैं, अभी तक दस्तावेज नहीं मिले हैं। यदि दस्तावेज नहीं मिलते हैं तो आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
- सुशोभन बनर्जी, डीजी ईओडब्ल्यू

जांच में नहीं कर रहे सहयोग

स्मार्ट सिटी आईसीसीसी का 300 करोड़ रुपए का टेंडर जारी हुआ था। आरोप है कि अग्रवाल ने प्राइस वॉटर हाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) की सहयोगी कंपनी हेवलेट पैकर्ड इंटरप्राइजेस (एचपीई) को मप्र के 7 स्मार्ट सिटी आईसीसीसी का काम दिलवाया है। इसलिए ईओडब्ल्यू ने ''कंफ्ल्क्टि ऑफ इंट्रेस्टÓÓ मानकर प्राथमिक जांच पंजीबद्ध की है। अब ईओडब्ल्यू इस टेंडर की फाइल और टेंडर प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिकाओं की जांच कर रही है। उन्होंने आखिर कैसे इस टेंडर के लिए शर्तें में तोड़मरोड़ की गई और कैसे जिस कंपनी में वैभव अग्रवाल काम करता है, उसकी सहयोगी कंपनी को यह टेंडर दिया गया है, इसके दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, लेकिन नगरीय प्रशासन और स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन के अधिकारी इसमें सहयोग नहीं कर रहे हैं।

 हमने नगरीय प्रशासन और स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को नोटिस देकर दस्तावेज मांगे हैं, अभी तक दस्तावेज नहीं मिले हैं। यदि दस्तावेज नहीं मिलते हैं तो आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
- सुशोभन बनर्जी, डीजी ईओडब्ल्यू

Sumeet Pandey
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