ब्रेन डेड मां के अंग दान किए, ताकि किसी दूसरे के शरीर से उसे निहारती रहे मां

दस साल के बेटे ने दुर्घटना में मां की मृत्यु के बाद लिया अंगदान का फैसला

भोपाल. तीन साल की उम्र में मासूम ने पिता को खोया... जब वह दस साल का हुआ तो मां सड़क हादसे का शिकार हो गई। वेंटीलेटर पर मां को दो दिन हो चुके हैं और डॉक्टरों के अनुसार वे ब्रेनडेड हैं। ऐसे में 10 वर्षीय बच्चे मयंक ने मिसाल पेश की। मां को वह दूसरों में देखना चाहता है, इसलिए उसने इस बात पर रजामंदी जाहिर कि मां के अंग दान कर दिए जाएं। मयंक का कहना है कि उसकी मां की वजह से कई लोगों को नया जीवन मिलेगा, वहीं मां दूसरे शरीर से ही उसे निहारती रहेगी।
अंगों को गंभीर क्षति, नेत्रदान हो सकेगा
गांधी मेडिकल कॉलेज से मिली जानकारी के मुताबिक दुर्घटना में दिशा छवानी के लिवर किडनी सहित अन्य अंगों को क्षति पहुंची है। ऐसे में उन्हें डोनेट करना संभव नहीं है। हालांकि डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हृदय गति रुकने के बाद दोनों आंखों को दान किया जा सकेगा।
डॉक्टरों ने दी थी अंगदान की सलाह
जानकारी के मुताबिक मयंक के पिता के चचेरे भाई जगदीश छवानी को डॉक्टरों ने बताया था कि वह दिशा के अंगदान कर सकते हैं। उन्होंने मयंक को पूरी स्थिति समझाई। मयंक ने मामा-मामी की सहमति से मां के अंगदान के लिए सहमति दे दी।
शनिवार सुबह डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित किया
लालघाटी हलालपुर निवासी मयंक के पिता भीष्म छवानी की मृत्यु सात साल पहले 8 जनवरी 2013 को हार्ट अटैक के कारण हुई थी। मयंक की मां दिशा छवानी एक बुटीक पर काम करती थीं। गुरुवार को वे हलालपुर, बीरआरटीएस बस स्टैंड पर बस से उतरते समय दिशा सड़क दुर्घटना का शिकार हुईं। तत्काल उन्हें हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया। शनिवार सुबह डॉक्टरों ने बताया कि उनका ब्रेन डेड हो चुका है।

Pushpam Kumar Desk
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