स्टेंट मामले में केंद्र सरकार के फैसले से डॉक्टर्स नाराज, डॉ. त्रेहान ने उठाए सवाल

विशेष बातचीतः स्टेंट की कीमत घटाए जाने पर देश के जाने माने डाक्टरों से mp.patrika.com की विशेष बातचीत, मेदांता के डाक्टर नरेश त्रेहान बोले- फैसला स्वागतयोग्य लेकिन, उलझा हुआ, वहीं मध्यप्रदेश के ख्यात डा. स्कंद त्रिवेदी बोले- फैसले में विरोधाभास...।


भोपाल। केंद्र सरकार ने वेलेंटाइन डे पर दिल के मरीजों को बड़ी राहत देते हुए कॉरनरी स्टेंट की कीमतों में 85 फीसदी तक की कमी कर दी है। अब मेटल के स्टेंट 7,260 रुपए में और ड्रग इल्यूट स्टेंट 29,600 रुपए में उपलब्ध होंगे। जो की अब तक 1 से 2.5 लाख तक कीमत पर मिलते थे।

सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू होगीं और ये कीमत न केवल नए, बल्कि बाज़ार में पहले से स्टॉक किए गए स्टेंट पर भी लागू होंगी। PM मोदी की सरकार का ये फैसला भले ही हार्ट के मरीजों के लिए राहत भरा है, पर देश के जाने-माने डॉक्टर्स इस फैसले को मोदी सरकार का वाहवाही लूटने वाला कदम बता रहे हैं। आईए हम बताते हैं कि आखिर स्टेंट की कीमत कम होने से किसे फायदा है और किसे नुकसान.....




मेदांता अस्पताल दिल्ली के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नरेश त्रेहान का कहना है कि सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन अभी यह कुछ उलझा हुआ है। इस फैसले को साफ होना बेहद जरूरी है। सरकार एक स्टैंडर्ड बनाना चाहती है, यह बेहद अच्छी बात है। वे गरीब दिल के रोगी जो अफोर्ड नहीं कर सकते उन्हें सरकार के इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन, यह फिर भी पूर्ण फैसला नहीं है। अभी हर तरह के स्टेंट की बात नहीं हुई है। स्पेशल बायफर्गेशन वाले स्टेंट पर विचार नहीं किया गया है। मार्केट में अभी कई फॉरेन स्टेंट आते हैं, जो टाइम टेस्टेड हैं और जिन्हें लगाने से अलग-अलग फायदे होते हैं। किसी खास स्टेंट को लगाने के बाद ब्लड थिनिंग नहीं करनी पड़ती, तो किसी के लिए मॉनेटरिंग नहीं करनी होती।

विदेशी कंपनी बोली- इतने कम में नहीं दे पाएंगे स्टेंट
डा. त्रेहान ने कहा कि फिलहाल फारेन के स्टेंट पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्टेंट बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी एबोड ने सभी बड़े कार्डियालॉजिस्ट सेंटर्स को एक नोटिस भेजा है, जिसमें कहा गया है कि वे इस दर पर स्टेंट प्रोवाइड नहीं कर पाएंगे,इसलिए उनके स्टेंट न लगाए जाएं। डॉ. त्रेहान का कहना है कि सरकार का यह निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन यह सोचना होगा कि इंडिया मेडिकल टूरिज्म का हब बन रहा है। यहां लोग बेहतरीन इलाज के लिए आते हैं, इसलिए एक मिनिमम दर को तय करना आवश्यक है, लेकिन फॉरेन स्टेंट के लिए भी निर्णय लेना ही होगा। आप 1 लाख 50 हजार के स्टेंट को आप 30 हजार तक नहीं ला सकते। वे कंपनियां हमें स्टेंट देना ही बंद कर देंगी। इसलिए सरकार को इस पूरे निर्णय को अभी वृहद स्तर पर देखना होगा।


फॉरेन कंपनी के लिए भी बने एक बोर्ड
हॉ, फॉरेन कंपनी के लिए भी एक रैग्युलेरिटी बोर्ड बनाना चाहिए। इससे यहां कीमतों के मानक तय हों, साथ ही इंडियन स्टेंट के लिए स्टेंडर्ड नॉम्स बनने चाहिए। मेडिकल की अन्य फील्ड में भी यूनिफार्मिटी लानी चाहिए। जिससे मस्तक देखकर चंदन न लगाया जाए या गरीब लोग ठगने से बचें, लेकिन यह रैग्युलेशन हम लंबे समय से चल रही दवाइयों पर लगा सकते हैं नई दवाइयों पर नहीं।




MP के डा. स्कंद त्रिवेदी बोले फैसला सही, लेकिन विरोधाभासी

मध्यप्रदेश के ख्यात कार्डियोलाजिस्ट डॉ. स्कंद त्रिवेदी ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कहा कि फैसला विरोधाभासी है। इसमें एक निगेटिव और पॉजीटिव दोनों ही साइन हैं। सरकार को यह करना चाहिए कि एक बेस प्राइज रखना चाहिए था। बेहतर और नई टेक्नालोजी इस कीमत पर इंडिया में नहीं आ पाएंगी।

डॉ. त्रिवेदी ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि विदेश में एक हजार डालर का स्टेंट है तो वह कंपनी यहां नहीं बेचेगी। इसलिए यहां से एक्सपोर्ट होने लगेंगे अथवा स्मगलिंग होने की आशंका है। इसके अलावा जो लोग अफोर्ड कर सकते हैं उनके लिए विकल्प खुले रहना चाहिए। जब किसी बड़े ओहदे वाले व्यक्ति को स्टेंट की जरूरत पडे़गी तो उनके लिए विदेशों से इंपोर्ट करवाएंगे। तो इसमें बात उठेगी कि दूसरों के लिए भी मंगवाओ।


मेडिकल से जुड़े लोगों की भी राय जरूरी
डा. त्रेहान ने कहा कि मुझे लगता है सरकार को ऐसे निर्णय लेते समय ब्यूरोक्रेट्स के साथ-साथ मेडिकल फील्ड के लोगों से भी पूरी चर्चा करनी चाहिए, जिससे आनन-फानन में निर्णय की जगह ठोस धरातल पर नियम बने। आम लोगों को फायदा हो, साथ ही मेडिकल टूरिज्म का भी विकास हो।

मध्यप्रदेश के ख्यात कार्डियोलाजिस्ट डॉ. स्कंद त्रिवेदी ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कहा कि फैसला विरोधाभासी है। इसमें एक निगेटिव और पॉजीटिव दोनों ही साइन हैं। सरकार को यह करना चाहिए कि एक बेस प्राइज रखना चाहिए था। बेहतर और नई टेक्नालोजी इस कीमत पर इंडिया में नहीं आ पाएंगी।

डॉ. त्रिवेदी ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि विदेश में एक हजार डालर का स्टेंट है तो वह कंपनी यहां नहीं बेचेगी। इसलिए यहां से एक्सपोर्ट होने लगेंगे अथवा स्मगलिंग होने लगेगी। इसके अलावा जो लोग अफोर्ड कर सकते हैं उनके लिए विकल्प खुले रहना चाहिए। जब किसी बड़े ओहदे वाले व्यक्ति को स्टेंट की जरूरत पडे़गी तो उनके लिए विदेशों से इंपोर्ट करवाएंगे। तो इसमें बात उठेगी कि दूसरों के लिए भी मंगवाओ।


तो विदेशों से नहीं आ पाएंगे मरीज
डा. त्रिवेदी ने कहा कि भारत में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ा दिया जा रहा है। विदेशों से भी लोग भारत में इलाज करने आते हैं। ऐसे में जब उन्हें कम पैसों में आउट डेटेड टेक्नोलाजी मिलेगी तो वे क्यों इलाज कराने आएंगे।


दो तरह की होती है दवा
दवाएं दो प्रकार की होती है। एक होती है जेनरिक और एक होती हैं ब्रांडेड। जो लोग अफोर्ड कर सकते हैं उनके लिए तो ब्रांडेड दवा लेने की छूट होना चाहिए।

डा. त्रिवेदी बोले- सुप्रीम कोर्ट का फैसला
1. सुप्रीम कोर्ट ने किया सरकार का काम। सरकार तो ले रही है वाहवाही।
2. पहले अस्पतालों में होने वाली गड़बड़ियों को कंट्रोल करना था।
3. विदेशों से लोग इलाज के लिए नहीं आ पाएंगे।
4. अच्छी और नई-टेक्नोलाजी से लोगों को दूर नहीं करना था।
5. यदि प्राफिट नहीं होगा तो उद्योग नहीं खुलेंगे और न ही किसी को रोजगार मिलेगा।
6. 5-10 की कैंसर की दवाए पांच हजार रुपए तक बिकती है।


dr skand trivedi

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