कहानी में ड्रामेटिक एलीमेंट और इंटेसिटी दोनों ही चाहिए

- रचना समय-11 के दूसरे दिन कथेतर गद्य और कहानी पर हुआ विमर्श

By: hitesh sharma

Published: 20 Jul 2018, 10:56 AM IST

भोपाल। बने-बनाए नुस्खों या शैलियों की नकल कर लेने से ही कहानी नहीं बनती हैं। कहानी हमारे पास एक संवेदना के साथ आती है। आज की कहानी नैतिकता की बहुत अधिक चिंता न कर त्वरित जीवन मूल्यों को अधिक महत्व दे रही है।

आधुनिकता और परंपरा में लिपटे दुविधाग्रस्त चरित्रों ने आज की कहानी में एक खरखराहट पैदा कर दी है। तकनीक ने स्मृति और ज्ञान का संबंध बदल दिया है। कहानी में आज पारंपरिक संरचना को तोडऩा जरूरी है। कहानी में ड्रामेटिक एलीमेंट और इंटेसिटी दोनों ही भरपूर होना चाहिए।

कुछ इसी तरह के विचारों और सवालों से जूझते देशभर से आए शीर्ष रचनाकार, आलोचक रबिन्द्रनाथ टैगोर विवि के शारदा ऑडिटोरियम में नजर आए। वनमाली सृजनपीठ के आयोजन रचना समय-11 लोकार्पण समारोह के दूसरे दिन का सुबह का सत्र 'कथेतर गद्य और कहानी पर विमर्श के नाम रहा। जिसमें कवि राजेश जोशी की अध्यक्षता में विनोद तिवारी, वंदना राग, राकेश मिश्र, जयप्रकाश, वैभव सिंह ने शिरकत की।

कवि राजेश जोशी ने कहा कि तकनीक ने स्मृति और ज्ञान का संबंध बदल दिया है। जिसने सृजनात्मकता को भी प्रभावित किया है और इन सबके बीच ही कथेतर गद्य को देखा जाना चाहिए। आलोचक विनोद तिवारी ने कई सवाल भी खड़े किए, उन्होंने कहा कि आज फिक्शान की जगह नॉन- फिक्शान ज्यादा पसंद किया जा रहा है इसके पीछे क्या वजह ये जानना बहुत जरूरी है। हमेशा वहीं रचनाकार महत्वपूर्ण होगा जो खुद की भाषा में नवाचार लेकर आएगा।

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जलेबीबाई डॉट कॉम में दिखाया टेली कॉलर्स का शोषण

वहीं शाम के सत्र में राज्य संग्रहालय में बाहर से आए कहानीकारों ने सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं के बिंब प्रस्तुत करती कहानियों का पाठ किया। डॉ. अल्पना मिश्र ने कहानी बेदखल का पाठ किया। जिसमें उन्होंने भूमंडलीकरण से मनुष्य के जीवन में आए बदलावों का बारीक चित्रण प्रस्तुत किया।

उनकी कहानी में श्रम, समय और संवेदनषीलता के आस-पास बुनी गई कॉरपोरेट सेक्टर के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करती नजर आई। कथाकार मनोज पांडे ने अपनी कहानी 'तितलियांÓ में एक जेबकतरे के भीतर होने वाले परिवर्तन को बहुत ही सूक्ष्मता के साथ दिखाया। पंकज मित्र ने अपनी कहानी 'जलेबीबाई डॉट कॉमÓ में टेली कॉलर्स के शोषण को प्रस्तुत किया।

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