अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान, सूख गए पौधे

अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान, सूख गए पौधे

Amit Mishra | Publish: Apr, 17 2019 04:38:53 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 04:38:54 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

राजधानी के कोलार में सीपीए ने एक हजार पौधे रोपने का किया था दावा...

भोपाल. शहर को हराभरा बनाने के लिए हरियाली महोत्सव एवं मानसून सत्र में हजारों पौधे रोपे जाने की बात विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा की जाती है, पर जितने पौधे रोपने का दावा किया जाता है उतने धरातल पर नजर नहीं आते हैं, वहीं पौधरोपण के बाद बरती गई लापरवाही भी शहर को हराभरा बनाने के सपने को तोड़ रही है। मामला कोलार स्थित अकबरपुर का है। यहां सीपीए वर्ष 2009 में एक हजार से अधिक पौधे रोपे थे, पर देखरेख नहीं होने से इसमें से महज कुछ पौधे ही बचे हैं। ये स्थिति तब है जब पौधों की सुरक्षा के लिए यहां फैंसिंग पर भी मोटी राशि खर्च की गई थी।

 

 

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जालियां तोड़ी, मवेशियों की एंट्री...
वार्ड 80 स्थित बंजारी दशहरा मैदान के पास खसरा नंबर तीन में वर्ष 2009 में सीपीए द्वारा एक हजार पौधे रोपे गए थे, पर इस जमीन पर पौधे दूर-दूर तक देखने को नहीं मिलते। कहीं कहीं कुछ पौधे जरूर हैं। यहां सुरक्षा के लिए लगाई गई फैंसिंग को असामाजिक तत्वों ने उखाड़ दिया है, जिसके कारण यहां मवेशियों की बेरोकटोक एंट्री बनी रहती है।

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पौधों को नहीं मिला पानी...
स्थानीय रहवासियों के मुताबिक सीपीए ने यहां पौधरोपण कर फैंसिंग तो की थी, पर पौधों के लिए पानी की व्यवस्था नहीं की गई, नतीजतन अधिकतर पौधे तो पानी नहीं मिलने के कारण सूख गए, वहीं शेष मवेशी चट कर गए। फिलहाल इस स्थान का उपयोग कचराघर के रूप में किया जा रहा है। यहां जगह-जगह लगे कचरे के ढेर गंदगी और बदबू की मुख्य वजह बने हुए हैं।

 



अनदेखी से पौधों न तोड़ा दम
इसी तरह सीपीए द्वारा कोलार क्षेत्र में सेंट्रल व्रज पर हजारों पौधे रोपे गए। लेकिन अधिकारियों के द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने से कुछ पौधे सुख गए और बचे हुए पौधों पर किसी का ध्यान नहीं जाता। जानकारी के अनुसार सीपीए द्वारा रोपे गए प्रत्येक पौधों पर 1450 रुपए खर्च किए जाने का प्रावधान है। इसके तहत पौधों की रोपाइ से लेकर मिट्टी खाद एवं पानी की व्यवस्था की जाती है। सीपीए द्वारा जनवरी से मई महीने तक महीने में दो बार इन पौधों में पानी दिया जाता है, जबकि मानसून सत्र में पानी की आवश्यकता नहीं होती। इस हिसाब से सीपीए हजारों रूपए से अधिक की राशि खर्च करता है। इसके बावजूद पौधों ने दम तोड़ दिया है।

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