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dussehra 2021: कई परिवारों का पेट पालता है, रोजगार भी देता है 'रावण'

कुछ परिवारों के लिए रोजगार का साधन है रावण के पुतलों का निर्माण करना...। देखें एक रिपोर्ट...।

भोपाल

Updated: October 14, 2021 07:18:44 pm

भोपाल। रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए रावण आजीविका का साधन भी हैं। राजधानी में करीब एक दर्जन स्थानों पर रावण का पुतला बनाने वाले श्रमिकों के लिए दशहरा किसी सौगात से कम नहीं होता है। रावण हर साल उनके लिए सालभर का राशन दे जाता है।

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भोपाल। राजधानी के सैकड़ों परिवार रावण निर्माण कर अपने परिवारों का पेट पालते हैं।

राजधानी में सैकड़ों परिवार ऐसे हैं जो दशहरे पर ही दिवाली का अहसास करते हैं। क्योंकि यह लोग रावण का पुतला बनाकर बेचते हैं और इसी कमाई से उनके सालभर का व्यवसाय हो जाता है। कुछ परिवार ऐसे भी हैं जो छह माह तक का पैसा जोड़ पाते हैं। कुछ कारीगरों ने तो कर्ज लेकर रावण के पुतले बनाए हैं। पिछले 10 दिनों से यह लोग रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बना रहे हैं। आसपास के शहरों से भी यह लोग पुतले खरीदने भोपाल आते हैं।

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भोपाल में करीब एक दर्जन स्थानों पर रावण निर्माण होता है। नए भोपाल के अर्जुन नगर के संजय बंसल अपने भाई राजू बंसल के साथ कई वर्षों से रावण का निर्माण कर रहे हैं। संजय का कहना है कि अब लोग अपने मोहल्ले में रावण नहीं बना पाते तो रेडिमेड रावण खरीदते हैं। हमारे यहां 500 रुपए से लेकर एक लाख रुपए से भी अधिक कीमत के रावण तैयार किया जाते हैं। यह आर्डर पर बनाए जाते हैं। इसी कमाई से हमारे घर सालभर का इंतजाम हो जाता है। हमारे यहां दो फीट से लेकर 21 फीट तक के पुतले तैयार किए जाते हैं। इसमें पूरे परिवार की मदद लगती है। इसमें परिवार की महिलाएं और बच्चे भी सहयोग करते हैं। कई लोगों को रोजगार मिलता है।

चक्की चौराहे के ओमप्रकाश साहू से ही शहर के ज्यादातर श्रमिक रावण के पुतला बनाना सीखे हैं। उन्हीं के एक शिष्य का कहना है कि महंगाई के कारण रावण का कद छोटा होता जा रहा है, लेकिन लोगों में जोश आज भी बरकरार है। रावण कई लोगों के लिए रोजगार भी लेकर आता है।

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कोरोनाकाल में आया था संकट

विशाल वंशकार कहते हैं कि कोरोनाकाल में हमारे जीवन में संकट आया था, अब स्थिति थोड़ी ठीक है इसलिए उम्मीद है कि इस बार ज्यादा से ज्यादा रावण के पुतले बिक जाएंगे और हमारे घर का राशन मिल जाएगा।

संजू बघेल कहते हैं कि अब बढ़ों में ज्यादा क्रेज नहीं रहा, छोटे बच्चे रावण बना नहीं पाते, इसलिए रेडीमेड पुतले खरीदकर ले जाते हैं। हमारे पास भी छोटे-बड़े सभी प्रकार के रावण के आर्डर आते हैं। यहां दशहरे तक करीब 50-60 पुतले बिक जाते थे। कोरोनाकाल में संकट में रहे, इस बार उम्मीद है कि अच्छी बिक्री होगी।

अरेरा कॉलोनी स्थित बांसखेड़ी पर भी सैकड़ों पुतले बिक्री के लिए रखे हुए हैं। यह श्रमिक वर्ग है जो यहां मजदूरी के साथ ही अतिरिक्त कमाई के लिए पुतले बनाता है। यहां के परिवार के लोग कहते हैं कि हमारे लिए तो यही पुतले भगवान का रूप है, जो साल-छह माह के खाने का इंतजाम कर जाता है। जब रावण के पुतले की बिक्री होती है तो हम इस काम के लिए माफी भी मांगते हैं, क्योंकि रावण एक विद्वान और ब्राह्मण था।

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यहां लगती है दुकानें

राजधानी भोपाल के लिंक रोड नंबर स्थित अर्जुन नगर, अरेरा कालोनी स्थित बांस खेड़ी समेत भोपाल के करीब एक दर्जन स्थानों पर रावण के पुतले बनाए जा रहे हैं। यहीं पर उन्होंने सड़क किनारे सजाकर भी रखे हैं।

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रावण खरीदी में रुचि कम

राजू वंशकार ने बताया कि पिछले दस दिनों से हम लोग रावण बना रहे हैं, लेकिन लोगों का रावण खरीदने के प्रति रुझान इस बार कम नजर आ रहा है। वंशकार इसके पीछे महंगाई को अहम कारण बता रहे हैं। राजू कहते हैं कि पिछले दो साल पहले तक हमें दस दिनों पहले से ही आर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं, लेकिन इस बार ज्यादातर लोग कीमत पूछकर चले जाते हैं।

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