तीन श्रेणी में होंगे शराब के ई-टेंडर: ए श्रेणी में केवल चार प्रमुख शहर, 25 से 75 करोड़ रुपए तक की दुकानों के बनेंगे क्लस्टर

प्राइज फॉर्मूले पर दिए जाएंगे ठेके, छोटे कारोबारी होंगे बाहर...

भोपाल। प्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी अब नए फॉर्मूले से होगी। इसके तहत ठेके दुकानों की बजाए 'मेगा-क्लस्टरÓ में प्राइज फॉर्मूले पर होंगे। प्रदेश को प्राइज के आधार पर तीन श्रेणी में बांटकर ई-टेंडर निकाले जाएंगे।

दुकानों के बड़े क्लस्टर बनेंगे, जिससे छोटे कारोबारी बाहर हो जाएंगे। केवल 350 से 400 बड़े कारोबारी ही इस प्रक्रिया में बच पाएंगे। कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति कीमत के आधार पर दुकानों के क्लस्टर बनाएगी। वाणिज्य कर विभाग ने नई आबकारी नीति के तहत इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे जल्द ही कैबिनेट बैठक में रखा जा सकता है।

ऐसे होंगे मेगा क्लस्टर
वर्तमान में 1242 से ज्यादा शराब व्यावसायी हैं, लेकिन नए सिस्टम में ये सिमटकर 340 से 400 रह जाएंगे। अभी दो-तीन दुकानों को मिलाकर क्लस्टर बनता है, जबकि प्रस्तावित नीति में बड़े शहरों में औसत आठ से दस और छोटे शहरों में औसत 20 से 25 दुकानों का क्लस्टर बनेगा।

ऐसे की जाएगी क्लस्टर की ग्रेडिंग
ए- 50 से 75 करोड़ तक : भोपाल, इंदौर, ग्वालियर व जबलपुर नगर-निगम क्षेत्र आएंगे।
बी- 25 से 50 करोड़ तक : इसमें सागर, रीवा, उज्जैन, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, देवास, सिंगरौली, कटनी, सतना, छिंदवाड़ा और मुरैना नगर निगम शामिल हैं।
सी- 25 करोड़ तक : बाकी बची सभी नगर पालिकाएं व नगर परिषद सहित जिला पंचायत, ग्राम पंचायत और ग्रामीण क्षेत्र शामिल रहेंगे।


उप-दुकानों के लिए सात फीसदी मूल्य
श राब के लिए प्रस्तावित नई नीति में उप-दुकानों के लिए भी प्रावधान किया है। इसके तहत मौजूदा ठेके का सात प्रतिशत मूल्य उप दुकान के लिए देना होगा। सरकार हाल ही में उप दुकान खोलने की नीति लाई है। इसके तहत शहर में पांच किलोमीटर और ग्रामीण क्षेत्र में दस किलोमीटर में यदि शराब की दुकान नहीं है, तो लाइसेंसधारी उप दुकान खोल सकता है। इस नियम से अब प्रदेश में 1800 उप दुकानें खोली जा सकती हैं।


यह है स्थिति
2015-16 में दुकानों की नीलामी हुई थी। इसके बाद नवीनीकरण।
2544 देसी शराब दुकानें।
1061 विदेशी शराब की दुकानें।
9000 करोड़ राजस्व था 2018-19 में।
11500 करोड़ मौजूदा वित्तीय का लक्ष्य।
7840 करोड़ रुपए दिसंबर 2019 तक वसूले ।
15000 करोड़ का लक्ष्य 2020-21 के लिए करने की तैयार।

ऐसे बाहर हो जाएंगे सैकड़ों ठेकेदार
इंदौर में करीब 900 करोड़ के ठेके हैं। प्राइज फॉर्मूले पर उदाहरण के लिए औसत एक दुकान 10 करोड़ की है। इस हिसाब से क्लस्टर बनेगा। क्लस्टर औसत 50 करोड़ के आधार पर बनता है, तो इसमें 18 ठेकेदार आएंगे, जबकि अभी करीब 300 ठेकेदार हैं।

भोपाल में 700 करोड़ का ठेका है। उदाहरण के लिए दुकानों का नया क्लस्टर बनने पर इसमें 50 करोड़ के औसत ठेके के हिसाब से 14 ठेकेदार रहेंगे। अभी करीब 233 ठेकेदार हैं। यानी करीब 219 ठेकेदार बाहर हो जाएंगे।

जबलपुर और ग्वालियर में 450-450 करोड़ रुपए के ठेके हैं। उदाहरण के लिए यदि 50 करोड़ का एक ठेका है, तो इसमें नौ ठेकेदार आएंगे। वर्तमान में तीन से पांच करोड़ के ठेकेदार हैं। यानी करीब 150 ठेकेदार हैं। नई व्यवस्था में 141 ठेकेदार बाहर हो जाएंगे।

यह है वजह : छोटे ठेकेदार अपना मार्जिन घटाकर शराब बेचते हैं, तो दूसरे ठेकेदारों का नुकसान होता है। इसलिए सरकार ने बड़े ठेकेदारों पर फोकस किया है। बड़े ठेकेदार सामान्यत: प्राइज वार में नहीं उलझते। उस पर सरकार एकमुश्त ज्यादा राजस्व पा सकेगी।

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दीपेश तिवारी
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