ई-टेंडर घोटाले के आरोपी के खिलाफ गृह मंत्रालय ने जारी किया लुक-आउट-सर्कूलर

- 2 अक्टूबर, 2020 तक जारी रहेगा, देश के किसी भी एयरपोर्ट पर एंट्री होते ही पकड़ में आएगा सोरठिया

By: Radhyshyam dangi

Updated: 08 Dec 2019, 08:32 AM IST

भोपाल/ भाजपा सरकार में हुए अस्सी हजार करोड़ रुपए के ई-टेंडर घोटाले में गुजरात की मुख्य आरोपी कंपनी सोरठिया वेल्जी एंड रत्ना के संचालक हरेश वेल्जी सोरठिया के खिलाफ केंद्र की भाजपा सरकार के गृह मंत्रालय ने लुक आउट सर्कूलर (एलओसी) जारी किया है। ई-टेंडर घोटाले में पहला मामला है जब देशभर की 9 आरोपी कंपनियों में से किसी कंपनी के संचालक के खिलाफ यह सर्कूलर जारी किया गया है। यह सर्कूलर 2 अक्टूबर 2020 तक लागू रहेगा। अब हरेश सोरठिया देश छोडकऱ विदेश नहीं जा सकते हैं।

आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने हाल ही में केंद्र सरकार गृह मंत्रालय को सोरठिया का वीजा निरस्त करवाने की अनुशंसा की थी। यह भी मांग की गई थी कि हरेश सोरठिया अरबों रुपए ई-टेंडर घोटाले में आरोपी हैं और जिला अदालत भोपाल ने हरेश को फरार घोषित कर रखा है। सोरठिया के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी अदालत ने जारी कर रखा है। इसके बाद गृह मंत्रालय (ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन) ने सोरठिया के खिलाफ एलओसी जारी कर दिया है। अब वे देश के किसी भी एयरपोर्ट पर एंट्री करता है तो इसकी सूचना जांच एजेंसी को मिल जाएगी और उसे विदेश यात्रा की अनुमति नहीं होगी। ई-टेंडर घोटाले में पहली बार इस तरह की कार्रवाई हुई हैं।

9 महीने से हैं ईओडब्ल्यू को तलाश

ईओडब्ल्यू ने 10 अप्रेल, 2019 में ई-टेंडर घोटाले में 9 कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इनमें एक कंपनी हरेश सोरठिया की भी है। इसके 10 पदाधिकारियों की ईओडब्ल्यू को तलाश है। इनसे पूछताछ की जाना है। कई प्रश्न पूछे जाना है। कई बार गुजरात में दबिश दी गई, लेकिन सोरठिया पकड़ में नहीं आया। जब ईओडब्ल्यू को सोरठिया नहीं मिला तो ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने केंद्रीय एजेंसी की मदद ली।

ईओडब्ल्यू को कंपनी के 10 पदाधिकारियों की है तलाश

दर्ज केस में ईओडब्ल्यू को मेघजी वेल्जी सोरठिया, अशोक वेल्जी भंभानिया, दिवालीबेन सोरठिया, भरत सोरठिया, चंद्रेश सोरठिया, महेश सोरठिया, हरेश सोरठिया, परेश सोरठिया, मनोज वासवा और राजू गेहानी से भी पूछताछ की जाना है। लेकिन कोई भी बयान देने नहीं पहुंचा। हरेश सोरठिया, कंपनी और ई-टेंडरों में टेंपरिंग के एवज में दलाल की भूमिका में काम करने वाले मनीष खरे के खातों में लेनदेन के सबूत मिलने के बाद से ही सभी पदाधिकारियों ने जांच में सहयोग से दूरी बना रखी है।

टेंपर कर लिया था टेंडर

मनीष खरे को दिए थे 1.23 करोड़ कमीशन ज्ञात हो कि जल संसाधन विभाग के 116 करोड़ रुपए के टेंडर में टेंपरिंग की गई थी। यह टेंडर सोरठिया कंपनी को 113 करोड़ रुपए में मिला था, इसके लिए मनीष को यह रकम दी गई थी। इसी तरह दो अन्य ई-टेंडर में भी टेंपरिंग कर हासिल किए गए। इनमें भी मनीष ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई।

Radhyshyam dangi Reporting
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