पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में आई उमा भारती कहा, छवि खराब करने का प्रयास कर रही कमलनाथ सरकार

  • ई—टेंडर के बहाने नरोत्तम मिश्रा को निशाने पर ले रही प्रदेश सरकार, गिरफ्तार करने की बना रही भूमिका
  • भाजपा के भीतर से समर्थन की पहली आवाज आई, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने भी पूरे मामले पर खामोशी साधी
  • गिरफ्तार कर्मचारियों ने लगाया आरोप, जबरन बुलवाना चाहते हैं नरोत्तम का नाम

By: shailendra tiwari

Updated: 04 Aug 2019, 06:44 PM IST

भोपाल

प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और प्रदेश के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में भाजपा के भीतर से पहली आवाज आई है। आवाज उठाई है प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और फायर ब्रांड नेता उमा भारती ने। उमा भारती ने एक के बाद एक लगातार चार ट्वीट कर कहा कि कमलनाथ सरकार जानबूझकर कार्रवाई कर रही है। उसकी कोशिश नरोत्तम मिश्रा का मनोबल गिराना है। यह उनकी छवि को गिराने का कुत्सित प्रयास है।

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दरअसल, भाजपा सरकार के समय में हुए ई—टेंडर घोटाले की जांच चल रही है। जिसमें प्रदेश सरकार ने नरोत्तम मिश्रा के स्टाफ में रहे दो कर्मचारी वीरेंद्र पांडे और निर्मल अवस्थी की गिरफ्तारी की है। इन दोनों कर्मचारियों के जरिए नरोत्तम मिश्रा को भी आरोपी बनाने की कोशिश ईओडब्ल्यू की ओर से की जा रही है। वहीं, नरोत्तम को घेरने के लिए उनके पुराने मामलों को भी खंगाला जा रहा है और यही वजह है कि उनके करीबी रहे मुकेश शर्मा को भी ईओडब्ल्यू ने जांच के नाम पर दो दिन बैठाए रखा।

 

 

कर्मचारियों ने लगाया आरोप, जबरन बुलवाना चाहते हैं नरोत्तम का नाम
ई—टेंडर मामले में गिरफ्तार दोनों कर्मचारियों ने कोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा है कि ईओडब्ल्यू जबरन नरोत्तम मिश्रा का नाम बुलवाना चाहते हैं। इतना ही नहीं, दोनों कर्मचारियों के परिजनों ने हाईकोर्ट के भीतर अपील की है, जिसमें आरोप लगाया है कि सरकार साजिशन फंसाने की कोशिश कर रही है। जांच सही तरीके से नहीं हो रही है, ऐसे में पूरे मामले की जांच सीबीआई को दी जाए। प्रदेश सरकार की जांच पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए।

 

 

नरोत्तम मिश्रा उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी भी हैं और पिछले दिनों उन्हें एक्स कैटेगरी की सुरक्षा पूरे देश में दी गई है। दोनों कर्मचारियों की आज रविवार को कोर्ट में एक बार फिर पेशी की गई थी। जहां पर एक बार फिर ईओडब्ल्यू ने उन्हें चार दिन की रिमांड पर ले लिया।

 

 

चरित्र हत्या की साजिश है
नरोत्तम मिश्रा ने अपने बयान में कहा था कि यह प्रदेश सरकार की कोशिश मेरी चरित्र हत्या की है। उनके पास कोई साक्ष्य नहीं हैं, अगर हैं तो मैं चुनौती देता हूं कि मीडिया के माध्यम से सामने रखें। यूं मीडिया ट्रायल के जरिए मुझे बदनाम क्यों किया जा रहा है। मेरे कर्मचारियों के पास से बहुत कुछ बरामद होने की बातें की जा रही हैं, जबकि हकीकत यह है कि सिर्फ एक मोबाइल उनके यहां से बरामद किया गया है। इसके सिवा अगर कुछ मिला है तो सामने आकर जांच एजेंसी बताती क्यों नहीं है। यह पूरी कोशिश मेरे चरित्र को बदनाम करने की है। मैं चाहता हूं कि मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच हो।

 

 

सवालों में भाजपा की चुप्पी
ई—टेंडर की जांच तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की थी। लेकिन इस घोटाले को मुद्दा कांग्रेस ने बनाया था। इस पर कांग्रेस के भीतर भी हंगामा होता रहा कि आखिर सरकार इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। लेकिन आयकर विभाग का कमलनाथ के करीबियों पर शिकंजा कसने के बाद प्रदेश सरकार ने भाजपा नेताओं पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। उसी क्रम में निशाना नरोत्तम मिश्रा को बनाया गया है।

 

 

अफसर पर खामोश क्यों है सरकार
ई—टेंडर में सरकारी एजेंसी नरोत्तम मिश्रा को आरोपी बनाने की जल्दी में नजर आ रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अब तक उन अफसरों से पूछताछ भी नहीं कर रही है, जिनकी सीधी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी। ई—टेंडर कमेटी के चेयरमेन मुख्य सचिव होते हैं, ऐसे में तत्कालीन मुख्य सचिव एंटोनी डिसा और बीपी सिंह से कोई पूछताछ नहीं हो रही है। उलटा कांग्रेस सरकार ने दोनों को रिटायर होने के बाद महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया हुआ है। तत्कालीन आईटी सचिव हरिरंजन राव से कोई पूछताछ नहीं हो रही है। इसके साथ ही ई—टेंडर करने वाले विभागों के प्रमुख सचिवों से भी पूछताछ नहीं हो रही है। जिसमें नरोत्तम मिश्रा के विभाग के राधेश्याम जुलानिया भी प्रमुख हैं। जुलानिया पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने परिचित कंपनी को ई—टेंडर के जरिए लाभ पहुंचाया है।

 

 

Kamal Nath
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