सारी दुनिया का बोझ उठाने वाले कुलियों के सामने अब अपने परिवार को भुखमरी से बचाने का संकट

रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले कुलियों के सामने अब परिवार के पेट पालने का संकट, कोरोना के चलते ट्रेनें बंद, अब कैसे कटेंगे 21 दिन, भोपाल-हबीबगंज स्टेशनों पर हैं 128 कुली

विकास वर्मा, भोपाल। देश भर में ट्रेनों का संचालन 14 अप्रेल तक बंद है। ऐसे में भोपाल, हबीबगंज समेत देश भर के स्टेशनों पर लाल रंग का कुर्ता पहने और बांह में बिल्ला लगाने वाले कुली अब दो जून की रोटी के लिए मोहताज हैं। सारी दुनिया का बोझ उठाने वाले यह कुली अब रोजाना के राशन तक के लिए उधारी पर जी रहे हैं। किसी कुली की माली हालत देख दुकानदार ने राशन तक देने से मना कर दिया है तो कुछ कुली अपने दोस्त-रिश्तेदारों से उधारी लेकर काम चला रहे हैं।

रेलवे सिर्फ बैच देता है, यात्रियों का सामान उठाकर करते हैं कमाई

जानकारी के मुताबिक रेलवे की ओर से कुलियों को सिर्फ बिल्ला (बैच) मुहैया कराया जाता है और कुली स्टेशन पर यात्रियों को सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाकर रोजाना 500 से 600 रुपए तक की कमाई करते हैं। रोज कमाई करके परिवार का पेट पालने वाले कुलियों के हालात पहले से ही खराब थे, जनता कफ्र्यू और ट्रेनबंदी की घोषणा के बाद हालात और भी ज्यादा बिगड़ गए। रेलवे से प्राप्त जानकारी के मुताबिक भोपाल रेलवे स्टेशन पर 122 और हबीबगंज स्टेशन पर 36 कुली कार्यरत हैं। जबकि भोपाल रेल मंडल के सभी स्टेशनों के कुलियों की संख्या करीब 820 है।

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12 घंटे मेहनत के बाद कमाते थे 600 रुपए

हबीबगंज स्टेशन पर काम करने वाले कुली श्रीराम सिसोदिया ने बताया कि घर का खर्च चलाने और कमाने की चाह लेकर हम रोज लाल कुर्ता पहनकर बाजू में बिल्ला लगाकर तय समय पर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाते थे। हम कई सालों से रेल यात्रियों की मदद करके उनका सामान एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर पहुंचाने का काम कर रहे हैं।प्लेटफॉर्म पर 12 घंटे बिताने पर हम रोजाना 500 से 600 रुपए तक कमाकर अपने परिवार को भरण—पोषण कर रहे थे लेकिन कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए रेलवे ने ट्रेनें भी बंद कर दीं। रेलवे द्वारा यात्री हित में लिए गए इस निर्णय का हम स्वागत करते हैं लेकिन रेलवे को हमारे बारे में कुछ सोचना चाहिए कि आखिर ऐसे वक्त में हम अपने परिवारों का पेट कैसे भरेंगे।

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मजदूरों की तरह हमारी भी मदद करे शासन और रेलवे

हबीबगंज रेलवे स्टेशन के कुली मुकदृदम राकेश शाक्य ने बताया कि हमारी मांग है कि कि जिस तरह मजदूरों की आर्थिक मदद करने की बात की गई है। उसी तर्ज पर मप्र शासन या रेलवे हम कुलियों को भी आर्थिक मदद व नि:शुल्क राशन की सुविधा देकर हमें भुखमरी से बचाने में मदद करें।

कुलियों की हरसंभव मदद करने को तैयार हैं : डीआरएम

भोपाल डिवीजन के डीआरएम उदय बोरवणकर ने कहा कि कुलियों का मामला हमारे संज्ञान में है, फिलहाल सभी कुली स्टेशनों से अपने-अपने घर चले गए हैं। राज्य शासन द्वारा जो मजदूरों के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान है उसके तहत कुलियों को भी सहायता मिल सकेगी। अगर फिर भी उन्हें किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत आएगी तो हम उनकी हरसंभव मदद करने को तैयार हैं, वह भी रेलवे का ही अभिन्न अंग हैं।

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विकास वर्मा Incharge
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