रोजगार देने वाले लाइब्रेरी साइंस कोर्स को स्नातक में वैकल्पिक विषय में नहीं किया शामिल

पुस्तकालय संघ ने खड़े किए सवाल, मंत्री से मिल दर्ज कराई आपत्ति

भोपाल. राज्य सरकार ने प्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू कर दिया है। अभी इसके कॅरिकलम और सिलेबस से जुड़ी पूरी जानकारी अधिकृत रूप में सामने नहीं आई है। वहीं सवाल खड़े होने लगे हैं। मध्य प्रदेश पुस्तकालय संघ ने सवाल खड़े किए हैं कि रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम उच्च शिक्षा विभाग की अनदेखी का शिकार हो रहा है। इसको लेकर संघ के प्रतिनिधि मंडल ने हाल ही में उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई है। मंत्री को बताया है कि लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस यानी पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विषय का है। ये व्यावसायिक विषय सबसे अधिक रोजगारोन्मुखी है, लेकिन अभी तक इसे वैकल्पिक विषय की सूची में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में एडमिशन लेने वाले छात्र-छात्राएं चाहकर भी इसे पढऩे के लिए चुन नहीं पा रहे हैं।

बताया गया कि पुस्तकालय अध्यक्ष पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान ऐसा विषय है, जिसके 1 साल का कोर्स करने के बाद भी विद्यार्थी रोजगार के लिए प्रयास कर सकते हैं। इस विषय में प्लेसमेंट बहुत अच्छा है। इतना ही नहीं विषय को पढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग के पास पहले से सेवारत अकादमिक योग्यता वाले पुस्तकालय अध्यक्ष कार्यरत हैं।

पद नाम परिवर्तित करने की रखी मांग...
संघ ने प्रदेश में ग्रंथपाल का पदनाम परिवर्तन कर सहायक प्राध्यापक पुस्तकालय करने की मांग भी उठाई है। इस संबंध में मंत्री यादव को जानकारी दी गई कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में ग्रंथपाल का पदनाम परिवर्तित किया जा चुका है। प्रतिनिधि मंडल में डॉ. प्रज्ञा गुप्ता, डॉ. विजी नायर, सुभाष रायपुरिया समेत अन्य शामिल थे। संघ द्वारा यह मांगें विभागीय प्रमुख सचिव अनुपम राजन और आयुक्त चंद्रशेखर वालिम्बे के संज्ञान में भी लाई जा चुकी हैं।

सुनील मिश्रा
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