सूर्यदेव बदल रहे हैं राशि, इन राशियों वालों पर आएगा भारी संकट तो इनकी बदल जाएगी किस्मत

7 मार्च को मंगल द्वारा स्थान परिवर्तन के बाद अब सूर्य 14 मार्च को मीन राशि में करने जा रहा हैं प्रवेश...

By: दीपेश तिवारी

Published: 12 Mar 2018, 06:57 PM IST

भोपाल। सूर्य को नवग्रहों का राजा माना जाता है। वहीं वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह आत्मा, पिता और सरकारी सेवा का कारक ग्रह माना जाता है। यानि यह आत्मा का स्वामित्व करता है। ज्योतिष में सूर्य को सिंह राशि का स्वामी माना गया है।

इसके अलावा ज्योतिष में हर ग्रह के कुछ मित्र, कुछ अधिमित्र तो कुछ शत्रु माने गए है। उसी के तहत यह माना जाता है कि सूर्य मेष राशि में उच्च भाव का जबकि तुला राशि में नीच भाव में रहता है।

ग्रहों के बदलाव के संबंध में पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि 7 मार्च को मंगल द्वारा स्थान परिवर्तन के बाद अब 14 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। यह दिन चैत्र कृष्ण द्वादशी है।

14 मार्च 2018 यानि बुधवार को सूर्य रात्रि 11 बजकर 42 मिनट से मीन राशि में गोचर प्रारंभ करेगा, जिसके साथ ही मलमास की शुरूआत हो जाएगी। यह मलमास वैशाख कृष्ण त्रयोदशी, शनिवार दिनांक 14 अप्रैल 2018 को प्रातः 8 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगा।

पं. शर्मा के अनुसार जैसा कि हम जानते ही हैं कि किसी भी ग्रह का स्थान परिवर्तन हर राशि को प्रभावित करता है वैसे ही सूर्य का यह गोचर भी सभी राशियों पर अपना प्रभाव डालेगा...

इन राशि वालो पर ये पड़ेगा असर...
1. मेष- इसके प्रभाव के चलते आपको कार्यों में सफलता मिलने के साथ ही आपके रुके कार्य भी पूरे होंगे। आपको प्रॉपर्टी से लाभ प्राप्त होने की संभावना है। इसके अलावा कार्य स्थल पर आपके वरिष्ठ अधिकारियों से भी आप लाभान्वित होंगे।

2. वृषभ- इस दौरान आपको सावधानी रखनी होगी। क्योंकि जरा सी गलती से आपको कष्टपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। किसी चीज को सीखने में आप अपना पैसा और समय दोनों ख़र्च कर सकते हैं। दोस्तों के साथ समय अच्छा बीतेगा।

3. मिथुन- इस दौरान घर-परिवार में शुभ कार्य होंगे साथ ही सुख-शांति भी बनी रहेगी। इसके चलते कार्य क्षेत्र में आप बेहतर प्रदर्शन करेंगे। जिसके कारण आपके काम से प्रभावित होकर सीनियर्स या बॉस भी आपकी तारीफ करेंगे। आपको ऑफ़िस में प्रमोशन भी मिल सकता है। वहीं पारिवारिक जीवन में थोड़ी परेशानियां भी आ सकती हैं।

4. कर्क- इस दौरान आर्थिक उन्नति के साथ ही आपकी मान-प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होगी। यह समय आपकी आय में बढ़ोतरी कराने वाले संभव हो सकता है। भाग्य आपका साथ देगा और समाज में आपका रुतबा भी बढ़ेगा।

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5. सिंह- इस दौरान आपके जमीन-जायदाद संबंधित कार्य बनने से आपको भूमि-भवन से लाभ रहेगा।

6. कन्या- नौकरीपेशा जातकों के लिए इस दौरान स्थान परिवर्तन की स्थिति बन सकती है। किसी भी मुद्दे पर बेवजह विवाद करने से बचना चाहिए। इस समय कार्य क्षेत्र में आपकी कड़ी मेहनत रंग लाएगी। ग़स्से पर क़ाबू रखें और किसी से बहस से बचें।

7. तुला- ये समय आपके लिए नवीन व्यवसाय की स्थिति बनाएगा साथ ही आपके शत्रु भी परास्त होंगे। स्वास्थ्य की दृष्टि से गोचर आपके लिए अनुकूल नहीं दिख रहा है।

8. वृश्चिक- यह समय आपके लिए प्रसन्नतादायक रहेगा। रुकावटें दूर होने से प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। ऐसे में आपके जीवन में कुछ बढ़े परिवर्तन भी हो सकते हैं। साथ ही आपकी नौकरी में भी बदलाव हो सकता है। वहीं जो जातक सरकारी नौकरी से जुड़े हुए हैं उन्हें भी लाभ प्राप्त होना संभावना है। आपको कठिन परिश्रम से निश्चित ही सफलता मिलेगी। आय में बढ़ोत्तरी होने के साथ ही समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा।

9. धनु- इस दौरान पारिवारिक कार्यों में आपका व्यय होगा, इसके अलावा नवीन संपत्ति की खरीददारी भी संभव है। वे जातक जो सरकारी नौकरी से जुड़े हुए हैं उनको लाभ मिलेगा। इसके साथ ही आपकी छोटी यात्रा के योग में बन रहे हैं। सूर्य के प्रभाव से समाज में आपका मान सम्मान भी बढ़ेगा।

10. मकर- इस दौरान समय आपके पक्ष में होने से मन खुश रहेगा। लेकिन फिर भी सोच-विचारकर ही कदम आगे बढ़ाएं।

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11. कुंभ- इस दौरान परिवार में शुभ मांगलिक कार्य होंगे। वहीं सूर्य के प्रभाव की वजह से आपको क्रोध अधिक आएगा। परिवार के लोगों के साथ आपकी नाराजगी या झगड़ा भी संभव है। लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें कि बेवजह के विवादों से दूर रहेंगे, तो ही आपके लिए अच्छा होगा।

12. मीन- आपके लिए ये आर्थिक प्रगति के योग हैं। नौकरीपेशाओं के लिए उन्नति के अवसर देगा। सूर्य आपकी राशि में ही गोचर करेंगे। इस अवधि में सूर्य के प्रभाव से आपके अंदर क्रोध की प्रवृत्ति बढ़ेगी। वहीं वे जातक जो सरकारी जॉब से जुड़े हैं, उन्हें गोचर का पूर्ण लाभ मिलेगा। हां आपकी सेहत में थोड़ी गिरावट जरूर आ सकती है, जैसे-बुखार, सिरदर्द आदि का प्रभाव रह सकता है। जीवन साथी आपके प्रति समर्पण का भाव रखेगा, लेकिन आपके उग्र स्वभाव की वजह से रिश्तों में कड़वाहट बढ़ सकती है। इस दौरान रिश्तेदारों से मिलने का मौक़ा मिल सकता है। वहीं लक्ष्य को पाने के लिए आपको कठिन परिश्रम करना पड़ सकता है।

ऐसे करें सूर्य देव को प्रसन्न...
सूर्य की शांति के लिए सुबह स्नान करने के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान, जप, होम मंत्र धारण व सूर्य की वस्तुओं से जल स्नान करना भी सूर्य के उपायों में आता है। सूर्य की शांति करने के लिए इन पांच विधियों में से किसी भी एक विधि का प्रयोग किया जाता है। गोचर में सूर्य के अनिष्ट प्रभाव को दूर करने में ये उपाय विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं।

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1. स्नान द्वारा उपाय :
जब गोचर में सूर्य अनिष्टकारक हों तो व्यक्ति को स्नान करते समय जल में खसखस या लाल फूल या केसर डालकर स्नान करना शुभ रहता है। खसखस, लाल फूल या केसर ये सभी वस्तुएं सूर्य की कारक वस्तुएं हैं तथा सूर्य के उपाय करने पर अन्य अनिष्टों से बचाव करने के साथ-साथ व्यक्ति में रोगों से लड़ने की शक्ति का विकास होता है।

सूर्य के उपाय करने पर उसके पिता के स्वास्‍थ्य में सुधार की संभावनाओं को सहयोग प्राप्त होता है। सूर्य की वस्तुओं से स्नान करने पर सूर्य की वस्तुओं के गुण व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करते हैं तथा उसके शरीर में सूर्य के गुणों में वृद्धि करते हैं।

2. सूर्य की वस्तुओं का दान:
सूर्य की वस्तुओं से स्नान करने के अतिरिक्त सूर्य की वस्तुओं का दान करने से भी सूर्य के अनिष्ट से बचा जा सकता है। सूर्य की दान देने वाली वस्तुओं में तांबा, गुड़, गेहूं, मसूर दाल दान की जा सकती है। यह दान प्रत्येक रविवार या सूर्य संक्रांति के दिन किया जा सकता है। सूर्य ग्रहण के दिन भी सूर्य की वस्तुओं का दान करना लाभकारी रहता है।
इस उपाय के अंतर्गत सभी वस्तुओं का एकसाथ भी दान किया जा सकता है। दान करते समय वस्तुओं का वजन अपने सामर्थ्य के अनुसार लिया जा सकता है। दान की जाने वाली वस्तुओं को व्यक्ति अपने संचित धन से दान करे तो अच्‍छा रहता है।

3. मंत्र जाप :
सूर्य के उपायों में मंत्र जाप भी किया जा सकता है। सूर्य के मंत्रों में 'ॐ घूणि: सूर्य आदित्य: मंत्र' का जाप किया जा सकता है। इस मंत्र का जाप प्रतिदिन भी किया जा सकता है तथा प्रत्येक रविवार के दिन यह जाप करना विशेष रूप से शुभ फल देता है। प्रतिदिन जाप करने पर मंत्रों की संख्या 10, 20 या 108 हो सकती है। मंत्रों की संख्या को बढ़ाया भी जा सकता है तथा सूर्य से संबंधित अन्य कार्य जैसे हवन इत्यादि में भी इसी मंत्र का जाप करना अनुकूल रहता है। इसके साथ ही आदित्यह्दय स्त्रोतं भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

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4. सूर्य यंत्र की स्‍थापना :
सूर्य यंत्र की स्‍थापना करने के लिए सबसे पहले तांबे के पत्र या भोजपत्र पर विशेष परिस्थितियों में कागज पर ही सूर्य यंत्र का निर्माण कराया जाता है। सूर्य यंत्र में समान आकार के 9 खाने बनाए जाते हैं। इनमें निर्धारित संख्याएं लिखी जाती हैं।

ऊपर के 3 खानों में 6, 1, 8 संख्याएं क्रमश: अलग-अलग खानों में होना चाहिए। मध्य के खानों में 7, 5, 3 संख्याएं लिखी जाती हैं तथा अंतिम लाइन के खानों में 2, 9, 4 लिखा जाता है। इस यंत्र की संख्याओं की यह विशेषता है कि इनका सम किसी ओर भी किया जाए उसका योगफल 15 ही आता है। संख्याओं को निश्चित खाने में ही लिखना चाहिए।
तांबे के पत्र पर ये खाने बनवाकर इनमें संख्याएं लिखवा लेनी चाहिए या फिर भोजपत्र या कागज पर लाल चंदन, केसर, कस्तूरी से इन्हें स्वयं ही बना लेना चाहिए। अनार की कलम से इस यंत्र के खाने बनाना उत्तम होता है। सभी ग्रहों के यंत्र बनाने के लिए इन वस्तुओं व पदार्थों से लेखन किया जा सकता है।

5. सूर्य हवन कराना:
सूर्य का मंत्र हवन में प्रयोग किया जा सकता है। हवन करने के लिए किसी जानकार पंडित की सहायता ली जा सकती है।
सूर्य कुंडली में आरोग्य शक्ति व पिता के कारक ग्रह होते हैं। जब जन्म कुंडली में सूर्य के दुष्प्रभाव प्राप्त हो रहे हों या फिर सूर्य राहु-केतु से पीड़ित हों तो सूर्य से संबंधित उपाय करना
लाभकारी रहता है, विशेषकर ये उपाय सूर्य गोचर में जब शुभ फल न दे रहा हों तो इनमें से कोई भी उपाय किया जा सकता है।

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दीपेश तिवारी
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