साधु-संतों के साथ कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर की राजनीति में एंट्री, 230 सीटों पर उतारेंगे प्रत्याशी

साधु-संतों के साथ कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर की राजनीति में एंट्री, 230 सीटों पर उतारेंगे प्रत्याशी

Manish Geete | Publish: Oct, 25 2018 05:23:00 PM (IST) | Updated: Oct, 25 2018 05:23:01 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

साधु-संतों के साथ कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर की राजनीति में एंट्री, 230 सीटों पर उतारेंगे प्रत्याशी

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इस बार नेताओं की तरह साधु-संत भी वोट मांगते नजर आएंगे। यह किसी नेता के प्रचार के लिए नहीं, खुद के लिए या अपनी पार्टी के लिए वोट मांगते नजर आने वाले हैं।

एससीएसटी एक्ट में संशोधन का विरोध करने के बाद सुर्खियों में आए कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी अब मध्यप्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी को उतार रहे हैं। वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन उनकी पार्टी प्रदेश की पूरी 230 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने वाली है।

ठाकुर ने इसके लिए अखंड भारत मिशन संगठन की स्थापना की है। बुधवार को भोपाल में इसके कार्यालय का उद्घाटन भी कर दिया गया।

मिशन के सचिव और ठाकुर के छोटे भाई विजय शर्मा ने मिशन की रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि 29 अक्टूबर को देवकीनंदन भोपाल पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे पार्टी के नाम का ऐलान भी कर देंगे और पार्टी का एजेंडा भी बताएंगे।

यह भी बताया गया है कि देवकीनंदन ठाकुर खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। शर्मा ने कहा कि हमारे साथ बड़ी संख्या में दलित भी जुड़ गए हैं।जो समय आने पर नजर आएंगे। शर्मा ने बताया कि हम समाज को तोड़ने नहीं, जोड़ने आए हैं।

 

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पहले ही मिल गए थे संकेत
गौरतलब है कि पिछले दिनों एससीएसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में रैली निकालने पर आगरा में देवकीनंदन ठाकुर को हिरासत में ले लिया गया था। तभी से उनके इन प्रयासों को राजनीति की दृष्टि से देखा जाने लगा था। एक कथावाचक को राजनीति में उतरने की अटकलों के बाद काफी बहस हुई थी। जल्द ही मध्यप्रदेश के कई शहरों में देवकीनंदन के प्रत्याशी भी नजर आने वाले हैं।

 

 

कौन है देवकीनंदन
देवकीनंदन महाराज का जन्म उत्तरप्रदेश मथुरा के थाना सुरीरक्षेत्र के गांव ओहावा में हुआ था।
-40 वर्षीय देवकीनंदन ने अपना करियर रासमंडली से शुरू किया था।
-8 ससालों तक वे रासमंडली में रहे।
-इसके बाद वृन्दावन में भागवत कथा का अध्ययन शुरू किया। फिर भागवत कथा वाचक के रूप में पहचान बढ़ी।
-उनके पिता का नाम राजवीर शर्मा है। उनके परिवार में 6 भाई-बहन हैं।
-देवकी भारत के अलावा विदेशों में भी प्रवचन करने जाते हैं।

 

कंप्यूटर बाबा उतरे चुनाव मैदान में
मध्यप्रदेश में अगले माह होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले कई साधु-संत भी नेताओं के अंदाज में आ गए हैं। कई साधु-संत भी चुनाव लड़ने के मूड में है। हाल ही में कंप्यूटर बाबा ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। भाजपा की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिलने के बाद वे बागी हो गए। कंप्यूटर बाबा को कुछ समय पहले नर्मदा नदी के किनारे पेड़-पौधों और अवैध खनन घोटाले उजागर करने जैसी धमकी सरकार को दी थी। इसी के बाद कंप्यूटर बाबा समेत पांच साधु-संतों को मध्यप्रदेश सरकार ने राज्यमंत्री का दर्ज दिया था। इसके बाद कंप्यूटर बाबा ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि वे भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ेंगे। यदि टिकट नही मिलेगी तो वे निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकते हैं।

 

इन्हें मिल चुका है राज्यमंत्री का दर्ज
-मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने अप्रैल में 5 हिन्दू बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। इनमें नर्मदानंद महाराज, हरिहरनंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भय्यूजी महाराज और पंडित योगेन्द्र महंत शामिल हैं। इनमें से इंदौर निवासी भय्यूजी महाराज का निधन हो चुका है।


बीजेपी नहीं देगी टिकट तो निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव
मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले से भाजपा के टिकट पर अवधेशपुरी भी चुनाव लड़ना चाहते हैं। 47 वर्षीय बाबा अवधेशपुरी रामचरित मानस में डाक्टरेट हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उज्जैन निवासी अवधेशपुरी का दावा है कि उनका विश्व हिन्दू परिषद और आरएसएस से करीबी नाता रहा है। वे भाजपा के लिए तब से काम कर रहे हैं, जब वह वेंटीलेटर पर थी। महाराजजी का दावा है कि वे भी भारतीय जनता पार्टी पर टिकट के लिए दबाव नहीं बनाएंगे। उनके अनुयायी चाहते हैं कि वे चुनाव लड़ें, जिससे सिंहस्थ कुंभ मेला की साइट पर हुए अतिक्रमण को हटा सकें। वे भाजपा का टिकट न मिलने की स्थिति में निर्दलीय चुनाव लड़ने को भी तैयार हैं।

 

 

केवलारी से चुनाव लड़ना चाहते हैं खड़ेश्वरी महाराज
-सिवनी जिले की केवलारी विधानसभा सीट पर भी यदि किसी साधु को टिकट दी जाती है तो वे संत मदन मोहन खड़ेश्वरी महाराज हो सकते हैं। खड़ेश्वरी महाराज भी कई बार दावा कर चुके हैं कि वे 30 सालों से लोगों की सेवा कर रहे हैं। उनकी जीत तय है। इसलिए बीजेपी यदि टिकट नहीं भी देती है तो वे निर्दलीय चुनाव लड़कर जनता के लिए काम करेंगे।

बीजेपी टिकट नहीं देगी तो कांग्रेस से लेंगे टिकट
इधर, रायसेन जेले में भी संत रविनाथ महीवाले राजनीति के अखाड़े में उतरने के लिए बेताब हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव में उतरने के लिए एक प्रकार से अभियान तक छेड़ दिया है। वे भी कहते हैं कि नर्मदा को बचाने के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं। यदि भाजपा टिकट नहीं भी देती है तो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ूंगा।

तो बीजेपी से कर जाएंगे बगावत
रायसेन जिले में ही एक और संत हैं महेंद्र प्रताप गिरी महाराज। जो सिलवानी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। प्रताप गिरी की मंशा है कि यदि उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय ही चुनाव लड़ने के लिए राजनीति के अखाड़े में कूद पड़ेंगे।


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