चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारियां, 18 जिलों की 27 सीटों पर इस तरह लगेगी आचार संहिता

मध्यप्रदेश में इस समय 28 विधानसभा सीटें रिक्त हैं.

By: Pawan Tiwari

Published: 17 Sep 2020, 10:37 AM IST

भोपाल. भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मध्यप्रदेश के 18 जिलों के 27 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उप निर्वाचन के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला निर्वाचन अधिकारियों के दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। बुधवार को आयोग के वरिष्ठ प्रधान सचिव एनएन बुटोलिया ने आदर्श आचरण संहिता के संबंध में विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में आदर्श आचरण संहिता का पालन सख्ती से करवाने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को समझाइश दी।

उन्होंने कहा कि ऐसे जिले जिनमें नगर पालिक निगम है तो उनमें आचार संहिता सिर्फ उसी विधानसभा क्षेत्र तक ही सीमित रहेगी। इसी तरह ऐसे जिले जिनमें नगर पालिक निगम नहीं है उनमें आचार संहिता पूरे जिले में लागू रहेगी। इस संबंध में देवास जिले के बारे में आयोग द्वारा स्पष्ट किया गया कि हाटपिपलिया विधानसभा क्षेत्र में देवास नगर पालिक निगम का भी क्षेत्र सम्मिलित है इस अनुसार केवल हाटपिपलिया विधानसभा क्षेत्र की सीमा में ही आदर्श आचार संहिता प्रभावशील होगी।

प्रधान सचिव बुटोलिया द्वारा मंत्रियों के दौरे के संबंध में स्पष्ट किया गया कि कोई भी मंत्री उप निर्वाचन की घोषणा के पश्चात अपने आधिकारिक दौरों को किसी भी रूप में निर्वाचन कार्य के साथ संयुक्त नहीं कर सकेंगे। उन्होंने नई योजनाओं एवं परियोजनाओं के कार्यों के संबंध में स्पष्ट किया कि निर्वाचन की घोषणा के पूर्व यदि कार्य आरंभ हो चुके हैं तो उन्हें जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आदर्श आचरण संहिता लागू होने के बाद अधिकारियों-कर्मचारियों को संबंधित क्षेत्र में आयोग की गाइडलाइन के अनुसार उसका पालन करना अनिवार्य होगा।

आयोग के डायरेक्टर शरदचंद्र ने मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी के विषय पर प्रशिक्षण देते हुए कहा कि आयोग द्वारा पेड न्यूज़ पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए जिला एवं राज्य स्तर पर पृथक-पृथक एमसीएमसी टीमों का गठन किया जाएगा। एमसीएमसी के माध्यम से अभ्यर्थियों को राजनीतिक विज्ञापनों का प्री सर्टिफिकेशन कराना होगा। एमसीएमसी द्वारा विज्ञापनों के खर्च एवं पेड न्यूज की जानकारी निर्धारित फॉर्मेट में आयोग को भेजी जाएगी। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले चुनाव प्रचार के संबंध में स्पष्ट करते हुए कहा कि फेसबुक एवं गूगल के ट्रांसपेरेंसी पोर्टल बने हुए हैं जिन पर प्रदर्शित होने वाली जानकारी का उपयोग अभ्यर्थियों द्वारा किए गए चुनाव खर्च के संबंध में किया जाएगा।

Pawan Tiwari
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