Election polls: सिंधिया खानदान के इलाके में उप चुनाव और भाजपा को दूसरे सिंधिया से इतना ज्यादा परहेज क्यों?

shailendra tiwari

Publish: Nov, 15 2017 04:35:15 (IST) | Updated: Nov, 15 2017 05:13:44 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
Election polls: सिंधिया खानदान के इलाके में उप चुनाव और भाजपा को दूसरे सिंधिया से इतना ज्यादा परहेज क्यों?

आखिर क्यों किया यशोधरा राजे से किनारा, भरोसे की कमी या फिर वजह कुछ और

भोपाल. चित्रकूट चुनावों में मिली हार के बाद प्रदेश भाजपा ने अभी से मुंगावली और कोलारस विधानसभा उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल, यह दोनों ही सीटें कांग्रेस के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव क्षेत्र वाली हैं। और जब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से संभावित चेहरा हो सकते हैं, उस दौर में भाजपा के लिए यह दोनों ही सीटें जीतना प्रतिष्ठा का प्रश्न भी बन गया है। भाजपा चाहती है कि वह दोनों सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों को पराजित कर ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीतिक दमदारी को खत्म कर दे।

गुना, शिवपुरी और अशोकनगर का यह पूरा इलाका सिंधिया घराने के प्रभाव क्षेत्र में आता है और यहीं से सिंधिया खानदान की दूसरी राजनीतिक विरासत को यशोधरा राजे सिंधिया आगे लेकर चल रही हैं। लेकिन मजेदार बात यह है कि भाजपा ने ज्योतिरादित्य से मुकाबला करने का फैसला लिया है, लेकिन भाजपा संगठन ने इस लड़ाई का नेतृत्व संभालने के लिए जिन चेहरों को आगे किया है, उनमें यशोधरा राजे सिंधिया को शामिल नहीं किया है। भाजपा ने यशोधरा के इलाके में उनसे ही परहेज कर लिया है। सवाल यहीं पर खड़ा हुआ है कि आखिर भाजपा का यशोधरा से इतना परहेज क्यों है, वह भी तब जब ज्योतिरादित्य सिंधिया से भाजपा की लड़ाई शुरुआती दौर में ही कठिन मानी जा रही है। आखिर क्यों भाजपा ने इस लड़ाई में ज्योतिरादित्य की बुआ और प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को साथ लेने की जहमत नहीं उठाई है।

Jyotiraditya Scindia and Yashodhra raje

दरअसल, भाजपा के भीतर सिंधिया खानदान को लेकर एक अलग ही राजनीति चल रही है। अटेर उप चुनाव के दौरान शुरू हुई सिंधिया परिवार को घेरने की रणनीति पर भले ही भाजपा दो कदम आगे और एक कदम पीछे कर रही हो, लेकिन यशोधरा राजे सिंधिया को लेकर उसकी मंशा साफ नजर आ रही है। यही वजह है कि जब भी मौका आता है भाजपा उन्हें हाशिए पर ही रखने की कोशिश करती है। यही वजह है कि अब जब भाजपा उनके ही इलाके में उप चुनाव की तैयारियों में जुटी हो तो बाहर के मंत्रियों को चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन यशोधरा को पूरी तरह से दूर रखा है।

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एक विधानसभा पर चार मंत्री, एक उपाध्यक्ष

भाजपा के अंदरखाने की मानें तो भाजपा दोनों विधानसभा में 4-4 मंत्रियों को प्रदेश संगठन के पदाधिकारी के नेतृत्व में काम का जिम्मा सौंपा जा रहा है। जिसमें मुंगावली में प्रदेश उपाध्यक्ष अरविन्द भदौरिया के साथ 4 मंत्री नरोत्तम मिश्र, भूपेंद्र सिंह, जयभान सिंह पवैया, पारस जैन को लगाया जा रहा है। जबकि कोलारस में प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा के साथ चार मंत्री उमाशंकर गुप्ता, लालसिंह आर्य, विश्वास सारंग, रुस्तम सिंह की ड्यूटी लगाई जा रही है। महत्वपूर्ण यह है कि कोलारस विधानसभा शिवपुरी जिले में आती है। जहां से खुद यशोधरा राजे सिंधिया मंत्री हैं, लेकिन भाजपा ने उन्हें इन दोनों ही सीटों पर काम करने के लिए शामिल नहीं किया।

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क्या भरोसेमंद नहीं हैं यशोधरा?
एक सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि यशोधरा राजे भाजपा संगठन के लिए भरोसेमंद नहीं हैं? क्योंकि जिस तरह से उन्हें दरकिनार किया जा रहा है, वह भाजपा के भीतर भी चर्चा में है। जिस इलाके में सिंधिया नाम का प्रभाव हो और मुकाबला सिंधिया के खिलाफ हो तो कहीं न कहीं दूसरे सिंधिया को आगे करने की कोशिश होती है, लेकिन यहां भाजपा ने दूसरे सिंधिया को भी नेपथ्य में ही रख दिया है। जानकारों का कहना है कि भाजपा को मालूम है कि यशोधरा राजे पब्लिक के बीच में जाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमलावर नहीं होंगी। ऐसे में भाजपा के लिए विचित्र स्थिति खड़ी हो जाएगी। वैसे, कहा जाता है कि बुआ—भतीजे राजनीति में भले ही धुर विरोधी हों, लेकिन अंदरखाने एक हैं। यही वो वजह बताई जा रही है जिसके कारण यशोधरा को इस कोर टीम में जगह नहीं दी गई है।

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सिंधिया पर हमले से भड़की थीं यशोधरा
यशोधरा राजे सिंधिया मध्यप्रदेश में राजामाता सिंधिया की राजनीतिक विरासत को आगे लेकर चलने का दावा करती हैं। यही वजह है कि वह सत्ता और संगठन की पसंद न होने के बाद भी मंत्री पद पर बनी हुई हैं। लेकिन उनके विरोधी उन्हें धीरे—धीरे खत्म करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। अटेर में जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता खूब लड़ी मर्दानी का जिक्र कर सिंधिया खानदान पर हमला बोला था तो जवाब देने के लिए यशोधरा ही सामने आकर खड़ी हो गई थीं। बाद में शिवराज सिंह चौहान ने भी बीच का रास्ता निकाला था और राजमाता को लोकमाता कहकर विवाद को थामने की कोशिश की थी। ऐसे में भाजपा को मालूम है कि जब ज्योतिरादित्य पर सिंधिया खानदान के बहाने हमले होंगे, उस समय यशोधरा फिर भड़क सकती हैं। इसलिए उन्हें किनारे कर पूरी रणनीति बनाई जा रही है।

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सिंधिया को छोड़कर बढ़ पाएगी भाजपा
गुना— अशोकनगर और शिवपुरी का इलाका कहीं न कहीं सिंधिया खानदान की पहली पसंद रहा है। तभी तो राजामाता, फिर माधवराव सिंधिया और अब ज्योतिरादित्य सिंधिया यहां से राजनीतिक पारी खेल रहे हैं। यशोधरा यहीं से विधायक हैं और मंत्री भी। कुल मिलाकर इन जिलों में राजनीति की धुरी में सिंधिया खानदान ही है। अब सवाल यही है कि क्या सिंधिया को छोड़कर भाजपा यहां पर फायदा उठा पाएगी। या फिर उसे चित्रकूट जैसा भितरघात का सामना करना पड़ सकता है।

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