कई मिन्नतों के बाद भी नहीं माना 108 का ड्राइवर! रातभर तड़पती रही प्रसूता- आखिरकार हार गई जिंदगी की जंग

कई मिन्नतों के बाद भी नहीं माना 108 का ड्राइवर! रातभर तड़पती रही प्रसूता- आखिरकार हार गई जिंदगी की जंग

Deepesh Tiwari | Publish: Aug, 13 2019 05:15:14 PM (IST) | Updated: Aug, 13 2019 05:21:10 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

आरोप है कि भोपाल रेफर किए जाने के बावजूद 108 का चालक ...

भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार गर्त में जाती दिख रही हैं। कहीं किसी गलती से किसी की मौत तो कभी मौत के बाद भी व्यवस्थाओं का रोना... मध्यप्रदेश की ये तस्वीर पूरे देश में बनती जा रही है।

सरकार की ओर से तमाम बातें कहे जाने के बावजूद जमीन पर तस्वीर बदलती नहीं दिख रही है, ऐसा ही एक शर्मसार कर देने वाला मामला राजगढ़ के ब्यावरा से सामने आया है।

जहां मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रख दिए जाने के चलते एक नवविवाहिता प्रसूता की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार महिला की डिलीवरी होने के बार अचानक ब्लीडिंग शुरू हो गई, लेकिन इस संबंध में जानकारी मिलने के बावजूद 108 के चालक की मानवीयता नहीं जागी। जिसके चलते प्रसूता घंटों तड़पती रही। वहीं आरोप है कि 108 का चालक भोपाल रेफर किए जाने के बावजूद प्रसूता व उनके परिजनों को ब्यावरा में ही घुमाता रहा।

ऐसे समझें पूरा मामला...
दरअसल, संगीतबाई पति हेमराज प्रजापति (24) निवासी लसूल्डिया महाराजा को सबसे पहले आमल्या हाट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था, वहां दो दिन रखने के बाद सोमवार रात करीब 8.20 बजे उसे ब्यावरा लाया गया। यहां डिलीवरी के बाद बच्चे का वजन कम होने से बच्चे को राजगढ़ भेज दिया गया।

वहीं रात में प्रसूता को भी ब्लीडिंग होने लगी और तबीयत बिगड़ गई। इस पर डॉक्टर्स ने फिर उसे रेफर भोपाल कर दिया। लेकिन लापरवाही का आलम यह रहा कि काफी देर तक तो प्रसूता को ले जाने वाली 108 ही मौके पर नहीं पहुंची, कई बार कॉल करने के बाद जब 108 आई तब कहीं जाकर, पीड़िता भोपाल के लिए रवाना हो सकी, आरोप है कि इसके बावजूद 108 का ड्रायवर चालक उन्हें ब्यावरा के ही निजी अस्पातलों के आस-पास ले जाता रहा।

जानकारों का मानना है कि यदि आरोप सही है तो ड्राइवर की ओर से निजी अस्पतालों में ही लेकर घुमना ये भी दर्शाता है कि वह पीडिता की तकलीफ को नजरंदाज कर खुद के लिए कुछ पैसा जिसे शुद्ध भाषा में कमिशन कहते है बनाना चाह रहा था।

प्रसूता के परिजनों ने आरोप लगाया कि चालक ने हमारी एक न सुनी और रात करीब 3.20 बजे तक वह हमें घुमाता रहा, इसके बाद भोपाल की ओर ले गया, लेकिन उसमें भी धीमी रफ्तार से गाड़ी ले गया। परिजनों ने बोला तो चालक ने कहा कि इतनी ही रफ्तार से चलेगी गाड़ी? सुबह छह बजे गाड़ी नरसिंगढ़ पहुंची, वहां पहुंचते-पहुंचते ही प्रसूता ने दम तोड़ दिया। नरसिंहगढ़ अस्पताल ले जाने पर उसे डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया।

इधर, नव-विवाहिता मृतका का बच्चा एनबीएसयू में...
जानकारी के अनुसार एक साल पहले ही संगीता की शादी हुई थी वह नवविवाहिता थी। उसका पहला बच्चा है जो कि वर्तमान में एनबीएसयू राजगढ़ में भर्ती है। मंगलवार सुबह डॉक्टर्स की पैनल द्वारा पोस्टमॉर्टम किया जाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

इससे पहले प्रभारी तहसीलदार सौरभ वर्मा मौके पर पहुंचे और पंचनामा तैयार किया। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की है। हालांकि मामला मलावर थाने का होने से केस जोरी पर कायमी कर वहां भेज दिया गया।

परिजनों का आरोप- 108 समय पर पहुंचा देती तो बच जाती-
नवविवाहिता प्रसूता संगीताबाई के पति हेमराज ने आरोप लगाया कि पहले हमें अस्पताल वालों ने मदद नहीं की, ब्यावरा से भेजे जाने के बाद राजगढ़ में किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।

फिर आधी रात को दोबारा ब्लीडिंग हुई तो उन्होंने फिर भोपाल रेफर कर दिया गया। 108 वाला फोन करने के 40 से 50 मिनट बाद आया, इसके बाद हमें ब्यावरा ले जाकर प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाने लगा, बोला कि यहीं दिखा लो ठीक हो जाएगा? हमने खूब मन्नतें की लेकिन उसने नहीं मानी, फिर हमारे परिजन आए तब वह भोपाल की ओर बढ़ा लेकिन रफ्तार धीमी रखी।

हमने बोला तो कहने लगा कि इससे ज्यादा नहीं चलेगी गाड़ी। चालक यदि समय पर पहुंचा देता तो प्रसूता की जान बच जाती। उसे इमरजेंसी मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत थी।

rajgarh

अजब फरमान: फिर भी किया रेफर
वहीं इसके अलावा एक चौंका देने वाले फरमान इन दिनों जिला चिकित्सालय में दिया गया है, जिसमें कोई भी कॉम्प्लिकेटेड केस राजगढ़ न भेजने के निर्देश सिविल सर्जन ने दिए हैं।

यानी जिले के किसी भी अस्पताल में कितनी ही इमरजेंसी हो, लेकिन उन्हें राजगढ़ न भेजा जाए? इसके पीछे प्रबंधन का तर्क है कि स्टॉफ की दिकक्त है? और हर विवादित केस को भोपाल, इंदौर भेजा जाना भी संभव नहीं है।

इस मामले में भी यही हुआ रेफर का मना करने के बावजूद ब्यावरा से उसे राजगढ़ भेज दिया गया और केस बिगड़ गया। इधर, ड्यूटी डॉक्टर्स का कहना है कि प्रसूता का पूरा उपचार करने के बाद हमने बच्चे के पास भेजा था न की क्रिटिकल कंडिशन में।

प्रसूता को ट्रीटमेंट के बाद ही भेजा था
पूरे ट्रीटमेंट के बाद ही उसे रेफर किया गया था। डिलीवरी कॉम्प्लिकेटेड थी, परिजन दो दिन से उसे आमाल्या में भर्ती किए हुए थे। यहां आने पर हमने डिलवरी करवाई। बच्चे में वजन कम था तो हमने राजगढ़ रेफर किया था, बाद में प्रसूता को भी हमने स्टेबल करके ही भेजा, यहां केस नहीं बिगड़ा।
-डॉ. आर. के. जैन, महिला रोग विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल, ब्यावरा

हमारी गलती नहीं है
केस की शिकायत के बाद मैंने पूरा ब्यौरा निकलवाया है, हमारे स्टॉफ की कोई गलती नहीं है। समय पर गाड़़ी पहुंच गई थी, उल्टा उनके परिजनों ने पहले राजगढ़ और फिर ब्यावरा में गाड़ी रोके रखी। ईएमटी ने खख्ती से बोला तब वे ब्यावरा से बढ़े।
- राघवेंद्र शर्मा, जिला अधिकारी, संजीवनी-108, राजगढ़

जिसकी गलती होगी कार्रवाई करेंगे
पहले प्रसूता को ब्यावरा में स्टेबल किया गया, फिर जिला चिकित्सालय में। डॉक्टर्स ने पूरे प्रयास किए, ब्लड भी चढ़ाया। यदि 108 वाले की गलती है तो मैं दिखवाता हूं कार्रवाई होगी। जहां तक रेफर केस नहीं भेजने की बात है तो हम वह आदेश निरस्त कर देंगे।
-डॉ. केके श्रीवास्तव, सीएमएचओ, राजगढ़

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