ईओडब्ल्यू को पीएचई के रिटायर्ड एसडीओ के पास मिली 252 एकड़ जमीन

जबलपुर के आसपास अलग-अलग जगहों पर सुरेश, सचिन व अनुराधा के नाम पर 139 एकड़ जमीन मिली है।

भोपाल. पीएचई के रिटायर्ड एसडीओ सुरेश उपाध्याय के घर ईओडब्ल्यू ने 25 जून को जबलपुर स्थित निवासों पर छापा ( EOW raid ) मारा था। ईओडब्ल्यू ने छापे के दौरान जप्त कागजातों की छानबीन की तो सुरेश के नाम पर, बेटे सचिन और पत्नी अनुराधा के नाम पर 252 बेशकीमती जमीन मिली है।

जबलपुर के आसपास अलग-अलग जगहों पर सुरेश, सचिन व अनुराधा के नाम पर 139 एकड़ जमीन मिली है। इस जमीन से जुड़े 78 दस्तावेज मिले हैं, जिनकी छानबीन की जा रही है। सबसे अधिक जमीन कजरवारा में मिली। अलग-अलग तिथियों में यह जमीन खरीदने का पता चला है।

ईओडब्ल्यू जांच ( eow raid ) के दौरान रजिस्ट्रियों और जमीन की कीमत का मूल्यांकन कर रहा है। प्राथमिक आंकलन के अनुसार 100 करोड़ से अधिक की इसकी कीमत आंकी गई है। उपाध्याय के बेटे सचिन के साथ पार्टनर धीरज और आदर्श अग्रवाल सहित अन्य के नाम दो कंपनियां भी मिली है।

दो कंपनियां, 68 एकड़ बेनामी जमीन का भी खुलासा
सचिन के नाम पर चेतन्य प्रमोटर्स नामक फर्म भी मिली है, जिसके नाम पर 26 एकड़ जमीन से संबंधित 9 कागजात मिले। वहीं, डॉल्फिन इंडिया प्रालि कंपनी में भी सचिन की पार्टनरशिप है, जिसके नाम 19 एकड़ जमीन से जुड़े 19 दस्तावेज मिले। वहीं, सुरेश ने 68 एकड़ जमीन दूसरे लोगों के (बेनामी) नाम खरीदी की गई है।

जिसमें जबलपुर के एक भाजपा नेता का नाम सामने आ रहा है, लेकिन दस्तावेजों में अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। अब ईओडब्ल्यू 68 एकड़ जमीन के बेनामी ट्रांजेक्शन का पता लगाने के लिए आयकर विभाग को पत्र लिख रहा है। ताकि जांच में आय के विवरण पता लगाया जा सके।

ईओडब्ल्यू छानबीन कर रहा है कि जमीन खरीदी में सुरेश उपाध्याय के ही पैसे लगे हैं अथवा अन्य लोगों का पैसा निवेश किया गया है। ईओडब्ल्यू को भाजपा नेता द्वारा तबादलों व अन्य काम को लेकर की गई अनुशंसाओं की नोटशीट व पत्र भी उपाध्याय के घर से मिले हैं। इनकी भी पड़ताल की जा रही हैं कि रिटायर्ड अधिकारी के घर से नेताओं की नोटशीट का क्या काम है। अब तक की जांच में पता चला है कि उपाध्याय भाजपा नेता का बेहद करीबी हैं और उनके पैसे निवेश करता था।

भाजपा नेता के संरक्षण के कारण उपाध्याय ने भी आय से अधिक खूब संपत्ति बनाई। ईओडब्ल्यू के डीजी केएन तिवारी ने बताया कि आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच की जा रही है। आयकर विभाग से संपर्क कर बेनामी लेनदेन का पता लगाकर जांच में तथ्य शामिल किए जाएंगे।

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दीपेश तिवारी
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