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पचास से सीधे ढाई सौ रूपए धान मिलिंग करने प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के बाद भी नहीं हुई पूरी मिलिंग

- मिलिंग करने की तारीख बढ़ाने केन्द्र सरकार के पास फिर भेजा प्रस्ताव, अक्टूबर आखिरी डेड लाइन

- वर्तमान में आठ से दस लाख मीट्रिक टन धान की अभी भी मिलिंग नहीं हो पाई है। अब नए धान की भी खरीदी पूरे प्रदेश में फिर शुरू हो गई

भोपाल

Published: October 16, 2021 09:38:49 pm

पचास से सीधे ढाई सौ रूपए धान मिलिंग करने प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के बाद भी नहीं हुई पूरी मिलिंग
- मिलिंग करने की तारीख बढ़ाने केन्द्र सरकार के पास फिर भेजा प्रस्ताव, अक्टूबर आखिरी डेड लाइन
भोपाल। धान की मिलिंग पचास रूपए से सीधे ढाई सौ रूपए बढ़ाने के बाद भी मिलरों ने समय पर धान की मिलिंग नहीं की। वर्तमान में आठ से दस लाख मीट्रिक टन धान की अभी भी मिलिंग नहीं हो पाई है। अब नए धान की भी खरीदी पूरे प्रदेश में फिर शुरू हो गई है।
राज्य सरकार ने केन्द्र के पास धान मिलिंग की तारीख बढ़ाने फिर से प्रस्ताव भेजा है। इसके पहले केन्द्र सरकार दो बार तरीख बढ़ा चुकी है। धान मिलिंग की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर है। केन्द्र सरकार अगर मिलिंग की तारीख नहीं बढ़ाती है तो गेहूं की तरहयह धान भी सरकार के गले पड़ जाएगी। इससे सरकार को करोड़ों रूपए की चपत पड़ सकती है। प्रदेश में पिछले वर्ष 30 लाख मिट्रिक टन से अधिक धान समर्थन मूल्य में खरीदी गई थी। इसके बाद से मिलर एकजुट होकर प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के लिए सरकार पर दबाव डालने लगे, इससे तीन माह तक मिलिंग नहीं हुई।
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इसके बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम ने प्रोत्साहन राशि 25 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए प्रति क्विंटल कर दी। इसके बाद भी मिलरों ने मिलिंग शुरू नहीं की। प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के लिए सरकार ने मंत्री समिति गठित कर मिलरों से बात की, जिसमें 250 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि कर दी गई। हालत यह है कि अभी भी धान की मिलिंग पूरी नहीं हो पाई है। विशेष तौर पर चावल का जो कोटा एफसीआई को दिया जाना है उसे और मिलिंग नहीं किया जा रहा है।

गोदामों की दिक्कत
मिलिंग नहीं होने से गोदाम की सबसे बड़ी दिक्कत आ रही है। धान की खरीदी 15 दिन पहले से शुरू हो गई है, अब धान भंडारण के लिए दिक्कत हो रही है। क्योंकि प्रदेश के गोदामों में करीब 200 लाख मीट्रिक टन अनाज का भंडारण है। एफसीआई ने केन्द्रीय पूल का गेहूं अभी तक नहीं उठाया है, इससे भंडारण की समस्या के साथ गेहूं, धान खराब होने की संभावनाएं और ज्यादा बढ़ गई हैं।

सख्ती के बाद मिलरों ने पैदा की समस्या
पहले मिलर अपने हिसाब से धान की मिलिंग कर सरकार को चावल दे देते थे। दो वर्ष पहले बैतूल, मंडला सहित कई जिलों में केन्द्र सरकार की टीम पीडीएम में सप्लाई हो रहे चावल की जांच करने आई, तो पता चला कि पीडीएस में घटिया चावल सप्लाई किया जा रहा है। इस संबंध में सरकार से जवाब मांगा गया। सरकार ने चावल वितरण के संबंध में ईओडब्ल्यू से जांच कराकर प्रदेशभर में एक दर्जन से अधिक मिलरों और अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है । इसके बाद से मिलर धान मिलिंग करने से न नुकूर करने लगे हैं।

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