scripteyesight lost in accident these stalwart play for country working hard | बचपन के हादसों में गई आंखों की रोशनी, मेहनत कर अब देश के लिए खेलते हैं ये धुरंधर | Patrika News

बचपन के हादसों में गई आंखों की रोशनी, मेहनत कर अब देश के लिए खेलते हैं ये धुरंधर

-भारत और बांग्लादेश की ब्लाइंड क्रिकेट टीमों के बीच सीरीज का पहला टी-20 मैच आज
-भारतीय टीम के कप्तान और सदस्यों ने पत्रिका से शेयर किए अपने अनुभव

भोपाल

Updated: December 23, 2021 10:16:59 pm

मुकेश विश्वकर्मा

भोपाल. भारतीय ब्लाइंड क्रिकेट टीम शुक्रवार को बांग्लादेश से टी-20 मैच खेलकर क्रिकेट का अभियन शुरू करेगी। भारतीय टीम में ऐसे धुरधंर हैं, जिनकी आंखों की रोशनी बचपन में हुए हादसे में खो गई थी। किसी का पूरा परिवार ही इस दुनिया को नहीं देख सकता। लेकिन, क्रिकेट के जुनून ने उन्हें देश के लिए खेलने के लिए तैयार किया और वे आज विश्व विजेता भारतीय टीम के लिए सालों के खेलते आ रहे हैं। भारतीय टीम के खिलाड़ियों ने पत्रिका से अपने अनुभव शेयर किए। आइये जानें उन खास अनुभवों के बारे में...।

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बचपन के हादसों में गई आंखों की रोशनी, मेहनत कर अब देश के लिए खेलते हैं ये धुरंधर


प्रकाश जयरामैया (कर्नाटक) बी-3

राइट हैंड विकेटकीपर

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प्रकाश जयरामैया ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि, 'मैं ओपन करता हूं। दस साल से भारतीय टीम का हिस्सा हूं। मेरा क्रिकेट कॅरियर 1998 से शुरू हुआ। मेरे पिता ट्रक चालक हैं। मां घर में टेलरिंग करती हैं। पिता का एक्सीडेंट होने से वे अब घर में ही रहते हैं। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर ही है। मेरे दो बच्चे हैं। मैंने 2012 वर्ल्डकप में पाकिस्तान के विरुद्ध 24 गेंदों में शतक बनाकर रेकॉर्ड कायम किया। ब्लाइंड क्रिकेट में पूरी रणनीति विकेटकीपर पर रहती है और मैं इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाने का प्रयास करता हूं।


दीपक मलिक, उपकप्तान (हरियाणा) बी-3

हरफनमौला

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पत्रिका से बातचीत में उपकप्तान दीपक मलिक ने बताया कि, मैं सात साल से इंडिया के लिए खेल रहा हूं। 2014 में पाकिस्तान टूर में डेब्यू किया था। 9 साल की उम्र में दीपावली के दिन आंख में रॉकेट लगने से मेरी एक आंख पूरी खराब हो गई थी। दूसरी से कम दिखाई देता है। परिवार में एकलौता था तो माता-पिता ने बहुत परेशानी भी झेली। फिर मुझे ब्लाइंड स्कूल में प्रवेश दिलाया, जहां मैंने ब्लाइंड क्रिकेट सीखी। शुरुआत में बहुत परेशानी हुई, क्योंकि ब्लाइंड क्रिकेट के लिए ज्यादा सुविधाएं नहीं होतीं।

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सुनील रमेश कप्तान (कनार्टक), बी-3

हरफनमौला

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टीम इंडिया के कप्तान सुनील रमेश ने बातचीत के दौरान बताया कि, मेरी फैमिली में सभी लोग किसानी करते हैं। छह साल की उम्र में घर के पास खेलते समय मेरी आंखों में रॉड लग गई थी, जिसके बाद मेरी दोनों आंखे चली गई। परिवार ने बहुत दिक्कतें झेलीं। मुझे पढ़ाई के लिए सामान्य स्कूल में भेजा, लेकिन वहां काफी परेशानियां हुईं। फिर मेरा एडमिशन ब्लाइंड स्कूल में कराया गया, जहां मैंने पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट भी सीखा। स्कूल और जोनल लेवल पर बेस्ट देने के बाद मुझे 2016 में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम से एशिया कप में खेलने का मौका मिला।

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ए वेंकटेश्वर राव (आंध्र प्रदेश) बी-1

ऑलराउंडर

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टीम इंडिया के ऑलराउंडर खिलाड़ी ए वेंकटेश्वर राव ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि, मैं पिछले 11 साल से टीम के साथ जुड़ा हूं। 2011 में लाहौर में हुए पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू किया था। इसके बाद लगातार टीम का हिस्सा रहा। मैं बहुत पिछड़े क्षेत्र से आता हूं, वहां सुविधाएं भी नहीं हैं। 8 साल की उम्र में नॉर्मल क्रिकेट खेलते समय मेरी आंख में गेंद से चोट लग गई थी, जिसके बाद मुझे दोनों आंखों से दिखाई देना बंद हो गया था। ब्लाइंड स्कूल में पढ़ाई के दौरान 2003 में हुए नॉर्मल वर्ल्डकप की कॉमेंट्री सुनकर मुझे क्रिकेट का रूझान आया। मैंने अपने कॅरियर में 11 शतक लगाए, जिसमें से 5 शतक तो सिर्फ पाकिस्तान के खिलाफ ही हैं।

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ओमप्रकाश (मध्यप्रदेश) बी-1

हरफनमौला

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भारतीय टी के एक और खिलाड़ी ओमप्रकाश मूल रूप से मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के कोटा गांव के रहने वाले हैं। पत्रिका से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि, फिलहाल वो इंदौर से पीजी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि, 'मैं जन्म से ही देख नहीं सकता। पिता को छोड़कर मेरी मां और भाई भी देख नहीं सकते। पिता किसानी करते हैं। परिवार में सिर्फ एक भाई ही देखने में समर्थ है। मैंने 2005 में इंदौर से ब्लाइंड स्कूल से पढ़ाई कर रहा हूं। मुझे पहले नॉर्मल क्रिकेट के बारे में ही जानकारी थी, लेकिन स्कूल जाकर मालूम चला कि, ब्लाइंड क्रिकेट भी होता है। पहले मुझे खेलने का मौका भी नहीं मिलता था। लेकिन, टीचर्स को डर लगता था। फिर मैने कड़ी मेहनत की और इंडिया टीम तक जा पहुंचा। मैंने 2018 में वर्ल्डकप सिलेक्शन ट्रायल में चयनित हुआ था। एक साल बाद 2019 में इंग्लैंड के खिलाफ पर्दापण किया था। भोपाल में मेरी यह दूसरी सीरीज होगी।

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