scriptFarming will be done in air in MP | मिट्टी नहीं, अब हवा में होगी खेती, 12 फीसदी पैदावार भी बढ़ेगी, जानें कैसे उठाएं इस तकनीक का लाभ | Patrika News

मिट्टी नहीं, अब हवा में होगी खेती, 12 फीसदी पैदावार भी बढ़ेगी, जानें कैसे उठाएं इस तकनीक का लाभ

तकनीक से खेती होगी

 

भोपाल

Published: May 04, 2022 03:28:54 pm

भोपाल। खेती—किसानी के लिए अब जमीन या मिट्टी की जरूरत नहीं। नए जमाने में अब हवा में खेती होगी। इतना ही नहीं इससे करीब 12 फीसदी पैदावार भी बढ़ जाएगी। ये कारनामा होगा मध्यप्रदेश की पहली एराेपाेनिक तकनीक यूनिट में जोकि ग्वालियर में स्थापित हाेगी। यहां इस तकनीक से आलू उगाए जाएंगे। इस तकनीक का फायदा ये है कि इसके लिए जमीन और मिट्टी की जरूरत नहीं हाेगी। आलू की खेती हवा में की जाएगी और इसके बीज भी तैयार किए जाएंगे।
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एराेपाेनिक तकनीक से खेती होगी
इसके लिए प्रक्रिया प्रारंभ हाे चुकी है। प्रदेश के उद्यानिकी विभाग और इसे तैयार करने वाली एग्रीनाेवेट इंडिया लिमिटेड के बीच नई दिल्ली के कृषि भवन में बुधवार को इसके लिए करार हाेगा। ग्वालियर में यूनिट स्थापित हाेने के बाद प्रदेशभर के किसानाें काे यहां से अलग-अलग किस्म के आलू, इसके बीज और एराेपाेनिक तकनीक की जानकारी साझा की जाएगी।
कृषि अधिकारियों के अनुसार एराेपाेनिक तकनीक का उपयाेग आलू बीज ट्यूबर उत्पादन के लिए किया जाएगा। इस तकनीक से बनने वाले पाैधाें को किसान बिना मिट्टी के भी फसल में उपयाेग कर सकते हैं। इस तकनीक से आलू के उत्पादन में भी करीब 12 फीसदी तक बढाेत्तरी हाेगी। इससे किसानाें काे कम लागत में अधिक फायदा हाेगा।
दरअसल देश में आलू की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है पर इसके अनुपात में आलू का उत्पादन नहीं हाे रहा है। गाैरतलब है कि इससे पहले भी ग्वालियर में आलू अनुसंधान केंद्र में आलू की कई प्रकार की प्रजातियाें के बीजाें की वैरायटियां तैयार की गई जिसका किसानाें काे काफी लाभ भी मिला है।
उल्टे लगेंगे पौधे
परंपरागत तरीके से ही खेती करने पर अब नतीजे उम्मीद के अनुसार नहीं मिलते हैं। नई तकनीक से किसानाें की कई समस्याएं काफी हद तक खत्म हाे जाएंगी। इस तकनीक में आलू के पाैधे ऊपर की तरफ हाेते हैं जबकि उनकी जड़ें जमीन की तरफ लटकी रहती हैं। इससे ऊपर जहां पाैधाें काे धूप मिलती है, वहीं नीचे से पाेषक तत्व प्राप्त हाेते हैं। इसमें पानी देने के लिए फुव्वारे नीचे लगाए जाते हैं और इस पानी में न्यूट्रिएटंस भी मिलाये जाते हैं। इस तकनीक में पाली हाउस में खेती हाेती है।

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