नोटिस जारी कर भूला प्रशासन, शहर से बाहर नहीं हो पाए कबाड़ गोदाम

नोटिस जारी कर भूला प्रशासन, शहर से बाहर नहीं हो पाए कबाड़ गोदाम

Sunil Mishra | Publish: Mar, 14 2019 08:48:59 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

कबाड गोदाम में फिर लगी आग, दहशत में रहवासी

पुराना कबाडख़ाना इलाके में पन्नी के गोदाम में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी देर रात भीषण आग लग गई। 22 सौ वर्गफीट में बना गोदाम देखते ही देखते पूरी तरह जलकर खाक हो गया। तीन फोम फाइटर समेत 15 दमकलों ने करीब चार घंटे की मशक्कत कर आग पर काबू पाया। आग जहांगीराबाद निवासी इसरार खां के पन्नी के गोदाम में लगी थी। कवाडख़ाने में पन्नी की गोदाम में आग लगने की यह पहली घटना नहीं है। करीब ढाई माह के अंदर यह पांचवीं घटना है। इससे कबाड गोदामों को शहर के बाहर करने के मुदृदा फिर गरम हो गया है।


राजधानी के पर्यावरण और सुरक्षा के लिए खतरा बने कबाड़ गोदाम अभी तक शहर से बाहर नहीं हो पाए हैं। अप्रेल 2010 में एक कबाड़ गोदाम में लगी आग बुझाने में अग्निशमन दस्ते को भी पसीना आ गया था। उसके बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए नोटिस तो जारी कर दिए थे लेकिन एक भी गोदाम शहर से बाहर नहीं हो पाया है।


राजधानी में प्रति वर्ष करोड़ों रुपए का कबाड़ व्यवसाय होता है। कबाड़ व्यवसाइयों ने कबाड़ का संग्रह करने के लिए पुराने शहर खासतौर पर कबाडख़ाना क्षेत्र में ही करीब 40 बड़े और 90 छोटे गोदाम बना रखे हैं। इनमें प्लास्टिक, वाहनों का जला ऑयल, गत्ते, कागज एवं अन्य ज्वलनशील पदार्थ भरे रहते हैं। इससे यह गोदाम कभी भी बड़े हादसे को जन्म दे सकते हैं। इनमें से अधिकांश गोदाम रिहायशी इलाकों में हैं। जिनके कारण दुर्घटना के वक्त दमकलों का इन तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। वर्ष 2010 में जिला प्रशासन ने सभी कबाड़ गोदाम संचालकों को नोटिस जारी किए थे। इसमें गोदामों को खाली कर शहर से बाहर ले जाने के लिए कहा गया था। तत्कालीन संभागायुक्त मनोज श्रीवास्तव ने भी वर्ष 2013 में भोपाल के विकास संबंधी बैठक में सभी खतरनाक व्यवसायों को शहर से बाहर करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अभी तक कबाड़ गोदाम अपने स्थानों पर काबिज हैं।

हर गली मोहल्ले में कबाडख़ाना, निगम की सूची में ही 3000 से अधिक

राजधानी के हर मोहल्ले में कबाड़ की दुकान है। रहवासी कॉलोनियों में पुराने सामानों की खरीदारी-बिक्री का ये कारोबार किसी तरह पूरे क्षेत्र के लिए आग लगने का कारण बन सकता है, कबाडख़ाने में लगी आग ने फिर से जाहिर कर दिया। नगर निगम ने करीब एक साल पहले कबाड़ की दुकानों को लेकर सूची तैयार की थी, इसमें 3127 दुकानें सामने आई थी। निगम के अतिक्रमण शाखा की ओर से इन्हें नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। रहवासी क्षेत्र में कई तरह की ज्वलनशील वस्तुओं की खरीद फरोख्त भी करते हैं। कबाड़ से क्षेत्र में गंदगी भी बढ़ती है। अपर आयुक्त कमल सोलंकी का कहना है कि हम इनका एक बार फिर से निरीक्षण कर लेंगे।

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