ट्रिपल तलाक देने तब 7500 पति पहुुंचे थे कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के डर से वापस ले ली थी अर्जी

जानें ऐसा क्या हुआ कि तलाक देकर पत्नी से पीछा छुड़ाने की मंशा रखने वाले ये पति अब अपने फैसले पर पछता रहे थे...

By: sanjana kumar

Published: 22 Aug 2017, 04:01 PM IST

भोपाल। तीन तलाक की वैधानिकता को लेकर मप्र में पहली याचिका वर्ष 2010 में लगाई गई। इस मामले पर सुनवाई के दौरान ही कुछ ऐसा हुआ कि मप्र में तलाक के लिए 7500 पुरुषोंं को  अपनी अर्जी वापस लेनी पड़ी।  जानें ऐसा क्या हुआ कि तलाक देकर पत्नी से पीछा छुड़ाने की मंशा रखने वाले ये पति अब अपने फैसले पर पछता रहे थे...

तब हुआ था ऐसा...

मप्र हाईकोर्ट में ट्रिपल तलाक के इस मुद्दे पर बहस का असर प्रदेश में साफ झलकने लगा था। इस मामले में शीर्ष अदालत में सुनवाई शुरू होते ही प्रदेश के उन ऐसे 35 हजार पतियों की नींद उड़ गई है, जो तलाक-तलाक-तलाक कहकर पत्नी से छुटकारा पाना चाहते थे।

 

पतियों को सताने लगा था ये डर

अब वे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न फैमिली कोर्ट, परामर्श केन्द्र, राज्य महिला आयोग और काजी कैंप से मिली जानकारी के अनुसार, तीन तलाक में यकीन रखने वाले पतियों को यह डर सताने लगा था कि कोर्ट कहीं ऐसा फैसाला न सुना दे कि उनका तलाक रद्द हो जाए, अथवा उन पर आर्थिक दंड लग जाए।

 

पत्नियों ने की थी तलाक रोकने की अपील

फैमिली काउंसलर्स की मानें तो पुरुषों को उस समय डर था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से उनका तलाक रद्द न हो जाए। यदि इस दौरान उन्होंने दूसरी शादी कर ली, तब भी पहली पत्नी से छुटकारा नहीं मिलेगा। वहीं महिलाएं भी काजियों के पास जाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक तलाक रोकने की अपील करने लगी थीं।

2010 में लगी थी पहली याचिका

आपको जानकर हैरानी होगी कि सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का मुद्दा पहुंचने से पहले ही मप्र हाईकोर्ट में सन् 2010 में एक मुस्लिम महिलाओं के एनजीओ ने पहली जनहित याचिका दायर की थी जिसमें मेहर की रकम, तीन तलाक के मनमाने तरीके पर कोर्ट के दखल की मांग की गई। हालांकि बाद में यह मुद्दा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हवाले कर दिया गया जिस पर फैसला नहीं आया है।

 

तीन महीने में आ गई थी समझौतों की बाढ़

सुप्रीम कोर्ट में मामला आने के बाद मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों की तलाक के नए नियमों को जानने की उत्सुकता बढ़ी। फैमिली काउंसलर्स के मुताबिक शीर्ष अदालत में मामला पहुंचते ही समझौतों की संख्या में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। प्रदेश में 7500 पतियों ने तो अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली थी।

 

10 दिन चली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिन तक सात याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की थी। तय सवालों पर जिरह हुई। सुनवाई का दौर चलता रहा और आज ऐतिहासिक फैसले से पूरे देश की मुस्लिम महिलाओं में खुशी का माहौल है।

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