scriptForest committees returned greenery in four lakh hectares | वन समितियों ने चार लाख हेक्टेयर में लौटाई greenery | Patrika News

वन समितियों ने चार लाख हेक्टेयर में लौटाई greenery

- पौधरोपण से लेकर पेड़ों को काटने तक का अधिकार मिलेगा समितियों को

- पॉलिसी में उन्हें पौधरोपण से लेकर पेड़ों को काटने तक का अधिकार समितियों को होगा

भोपाल

Published: April 22, 2022 10:44:56 pm

भोपाल। प्रदेश में संयुक्त वन प्रबंध समितियों ने 11 हजार से अधिक गांवों के पांच लाख हेक्टेयर में greenery तैयारी की है। ये समितियां अब उजड़े Forest में पौधरोपण और पांच वर्ष के अंदर greenery तैयार करने के लिए micro plan तैयार कर रही है। समितियां माइक्रो प्लान में वनों के विकास, अच्छे वन तैयार करने और सूखे पेड़ों को काटकर जलाऊ और इमारती लकड़ी को बाजार में बेचने का काम करेंगी। वन विभाग इन समितियों को गांव से जुड़े वनों की सुरक्षा और उजड़ेे वनों में हरियाली तैयार करने का काम दिया जाएगा। इसके लिए सरकार नई पॉलिसी ला रही है। इस पॉलिसी में उन्हें पौधरोपण से लेकर पेड़ों को काटने तक का अधिकार समितियों को होगा।
सरकार यह व्यवस्था उजड़े जंगलों में हरियाली तैयार करने और अतिक्रमण को रोकने के लिए कर रही है। पहले यह काम निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा था, लेकिन समाज सेवी संगठनों के विरोध के चलते अब स्थानीय लोगों को यह काम सौंप जाएगा। उन्हें इसके लिए आर्थिक सहायता के साथ ही अनुदान और तकनीक भी उपलब्ध कराई जाएगी।
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वनों के उत्पादों पर इन समितियों को पूरा अधिकार दिया जाएगा, समितियों और वन विभाग के अधिकारियों का एक संयुक्त खाता होगा जिसमें वनों और वन औषधियों से होने वाले लाभ की पूरी राशि उसी खाते में जमा होगी। वही बांसों के उत्पादन के लिए प्रत्येक जिले में वन भूमि आरक्षित की जाएगी। सरकार का यह प्रयास होगा कि समितियों की जरूरतों के अनुसार उन्हें अच्छे किस्म का पौधा उपलब्ध कराए और उसकी कटाई, छटाई के लिए तमाम तरह की तकनीक उपलब्ध कराए।


निर्माण और विकास कार्य भी समितियों के हाथ में
वन क्षेत्रों में होने वाले निर्माण कार्य और विकास कार्य भी समितियों के हाथों में दिया जाएगा। यह वनों की सुरक्षा के साथ यह भी काम करेंगी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्हें मनरेगा, आत्यनिर्भर भारत, सहकारिता योजना जैसे सरकार की तमाम योजनाओं के जरिए उन्हें लाभ दिया जाएगा। संयुक्त वन प्रबंध समितियों को वनों में अतिक्रमण, अवैध उत्खनन और अवैध कटाई रोकने का भी काम दिया जाएगा।

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