दो विभागों की खींचतान में केरवा से फिर कटे पेड़, कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति

चंदनपुरा के जंगल से लगे फार्म हाउस में शनिवार शाम से रात तक जेसीबी चली

भोपाल. राजधानी से लगे केरवा के घने वन वाले बाघ भ्रमण क्षेत्र पर जंगल माफिया की नजर गड़ी हुई है। यहां लगातार पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है। ताजा मामला शनिवार शाम का है, जिसमें जेसीबी से बड़ी संख्या में पेड़ों को उखाड़ा गया। इस बार भी वन और राजस्व विभाग के अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
कटाई की उच्च स्तरीय शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे वन अमले ने काम तो रुकवा दिया, लेकिन न तो जेसीबी जब्त की और न ही कटाई करने वालों की पहचान की। रिपोर्ट मिलने पर रविवार को राजस्व के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया, लेकिन उन्होंने भी न तो जेसीबी जब्त की न ही जमीन मालिक के खिलाफ कार्रवाई की। दोनों विभाग पंचनामा और रिपोर्ट बनाकर सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।

वन विभाग ने रिपोर्ट की औपचारिकता पूरी की
समरधा रेंजर द्वारा तहसीलदार को सौंपी रिपोर्ट के अनुसार नौ नवंबर को शाम छह बजे चंदनपुरा में जेसीबी से पेड़ गिराने की सूचना मिली थी। वन दस्ते ने पहाड़ी पर राजेश पारदासानी की निजी भूमि पर साज, पलाश, बेर एवं खैर के पेड़ों की जड़ से खुदाई करना पाया है। यहां 15 मीटर चौड़ाई का रास्ता बनाने के लिए समतलीकरण होना पाया। यह जगह बाघ विचरण क्षेत्र से लगी है एवं वन सरहद से मात्र 60 मीटर दूरी पर है। यहां 29 पेंड़ काटा जाना पाया है। इस कटाई के लिए न तो वन विभाग को सूचना दी गई न ही जमीन मालिक का कोई आदमी मौके पर मिला।

रसूखदारों के फार्म हाउस और जमीनें
केरवा वन क्षेत्र में जहां बाघ सहित कई वन्य जीव विचरण कर रहे हैं, वहां सीमा के साथ-साथ वन के बीच में भी कई राजस्व खसरे हैं। इनमें कई रसूखदारों के फार्म हाउस हैं। वन क्षेत्र के अंदर कई बड़े राजस्व खसरे भी हंै। इन जमीनों की घेराबंदी करने से लेेकर धीरे-धीरे पेड़ काटकर जमीन को समतल कर खेत बनाने की कोशिश होती रहती हंै। कई अन्य गतिविधियां भी हो रही हैं।

पंद्रह साल में 276 एकड़ जंगल उजाड़ा
राजधानी के आसपास कितनी तेजी से जंगल को उजाड़ा जा रहा है, इसकी बानगी एनजीटी के निर्देश पर केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एमओईएफ) के अधिकारी द्वारा किए सर्वे की रिपोर्ट में सामने आ चुका है। एनजीटी के निर्देश पर यह रिपोर्ट एमओईएफ के एडीजी डॉ. तेजेंदर सिंह ने तैयार की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2003 में घने जंगल के बीच बसे मेंडोरा, मेंडोरी और चंदनपुरा गांवों में केवल 45.99 हेक्टेयर जमीन पर नॉन फॉरेस्ट एक्टिविटी चल रही थी, जो कि वर्ष 2018 में 158.05 हेक्टेयर क्षेत्र में फैल गई। इस प्रकार 15 साल में 112.06 हेक्टेयर अर्थात 276 एकड़ जमीन पर जंगल उजाड़ दिया गया। अब वहां पर गैर वन आधारित गतिविधियां जिसमें फार्म हाउस, रिसॉर्ट जैसे पक्के निर्माण और खेती आदि चल रही हैं।

एमओईएफ बता चुका है घना जंगल
केरवा वन क्षेत्र में मेंडोरा के पास बड़े पैमाने पर अवैध कटाई का खुलासा पत्रिका ने 18 मार्च को किया था। इसके बाद एमओईएफ (पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ) के अधिकारियों ने इलाके का निरीक्षण किया था। एडीजी डॉ. तेजेंदर सिंह घने जंगल के बीच निजी भूमि के बोर्ड देखकर चौंक गए थे। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जमीन चाहे किसी की हो खसरे पर किसी तरह के जंगल शब्द का उल्लेख है, उसे वन माना जाएगा। बड़े इलाके में पेड़ों का घनत्व देखकर वन होना लगे तो भी वह जगह वन मानी जाएगी। इस जगह को देखकर मैं साफ कह सकता हूं कि यह चार से पांच स्तर का वन है। तब उन्होंने वन क्षेत्र के बीच में स्थित राजस्व भूमियों के स्वामियों को पाबंद करने के निर्देश भी दिए गए थे। कुछ दिनों बाद फिर गुपचुप कटाई शुरू हो गई।

मुख्यमंत्री को शिकायत की ट्वीट
अवैध कटाई के मामले को केरवा के जंगल बचाने की लड़ाई लड़ रहे राशिद नूर खान ने उठाया। उन्होंने कलेक्टर व कमिश्नर से शिकायत की। इस बीच पर्यावरणविद् सक्रिय हुए। सोशल मीडिया और ट्विटर के माध्यम से सीएम को शिकायत की । इसके बाद रात को मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने जेसीबी रुकवा दी। रविवार को दिन भर वन और राजस्व के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर पंचनामा बनाकर रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर कार्रवाई की जानी है।

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